अध्याय 19 : प्लक्ष, शाल्मल आदि द्वीपों का वर्णन
प्लक्ष, शाल्मल और अन्य द्वीपों का विस्तृत वर्णन
शौनकादि ऋषियों ने सूत जी से आग्रह किया – “हे सूत जी! आपने जम्बूद्वीप का तो बहुत विस्तार से वर्णन किया, किन्तु शेष छः द्वीपों – प्लक्ष, शाल्मल, कुश, क्रौञ्च, शाक और पुष्कर – के विषय में हम विशेष जानकारी चाहते हैं। वहाँ के पर्वत, नदियाँ, वृक्ष, जनपद और वहाँ के निवासियों की दिनचर्या कैसी है? कृपया यह सब बताइए।” सूत जी ने कहा – “ये सभी द्वीप स्वर्ग के समान सुखद हैं। वहाँ कोई रोग, शोक या मृत्यु का भय नहीं है। यहाँ के निवासी दीर्घायु, दिव्य शरीरधारी और सदा आनन्द में मग्न रहते हैं।”
प्लक्षद्वीप का विस्तार और उसकी विशेषताएँ
प्लक्षद्वीप का नाम यहाँ पाये जाने वाले प्लक्ष (पाकड़) के विशाल वृक्ष के कारण पड़ा। यह दो लाख योजन विस्तृत है और इसे इक्षुरस का समुद्र घेरे हुए है। इस द्वीप के स्वामी प्रियव्रत के पुत्र मेधातिथि थे। उन्होंने इस द्वीप को सात भागों में बाँटा और अपने सात पुत्रों – शान्तहय, शिशिर, सुखोदय, आनन्द, शिव, क्षेमक और ध्रुव – को यहाँ का राजा बनाया। प्लक्षद्वीप में सात प्रमुख पर्वत हैं – मणिकूट, वज्रकूट, इन्द्रसेन, ज्योतिष्मान, सुमेरु, मलय और सुपर्ण। यहाँ सात नदियाँ बहती हैं, जिनमें अरुणा, नृमणा, आंगिरसी आदि प्रमुख हैं।
प्लक्षद्वीपो द्विलक्षयोजनायामः प्लक्षवृक्षेण नामितः ।
सप्तवर्षविभक्तो मेधातिथिपुत्रैरलङ्कृतः ॥
शाल्मल, कुश और क्रौञ्च द्वीपों का वर्णन
शाल्मल द्वीप चार लाख योजन विस्तृत है और यहाँ शाल्मल (सेमल) का वृक्ष प्रसिद्ध है। सुरा के समुद्र से घिरे इस द्वीप का राजा वपुष्मान था। यहाँ के पर्वतों में कुमुद, उन्नत, बलाहक आदि प्रमुख हैं। कुश द्वीप आठ लाख योजन का है, जहाँ कुश (दर्भ) की प्रचुरता है। यहाँ घृत का समुद्र है और राजा ज्योतिष्मान हैं। क्रौञ्च द्वीप सोलह लाख योजन विस्तृत है, जो दधि के समुद्र से घिरा है। यहाँ का प्रधान पर्वत क्रौञ्च है, जिसका नाम कार्तिकेय ने रखा था। इस द्वीप का राजा द्युतिमान हुआ।
शाक और पुष्कर द्वीपों का परिचय
शाक द्वीप बत्तीस लाख योजन विस्तृत है और दुग्ध के समुद्र से घिरा है। यहाँ शाक (सागौन) के विशाल वृक्ष हैं। इस द्वीप के स्वामी भव्य हैं और यहाँ के पर्वतों में उदयाचल, जलधार, रैवतक आदि प्रसिद्ध हैं। पुष्कर द्वीप चौंसठ लाख योजन का है और स्वच्छ जल के समुद्र से घिरा है। यहाँ ब्रह्मा जी का निवास है तथा एकमात्र महाविशाल पुष्कर (कमल) का वृक्ष है। इस द्वीप के स्वामी सवन हैं। पुष्कर द्वीप में न कोई पर्वत है, न नदी; केवल समतल स्वर्णमयी भूमि है, जहाँ रहने वाले सभी प्राणी अमर हैं।
पुष्करे पुष्करो नाम ब्रह्मणः स्थानमुत्तमम् ।
यत्र देवाः सगन्धर्वाः स्तुवन्ति परमेश्वरम् ॥
इन द्वीपों के वर्णन का पुण्य-फल
सूत जी बोले – “हे ऋषियो! ये सब द्वीप भोगभूमियाँ हैं। यहाँ के निवासी निष्पाप होते हैं और दस हजार से लेकर चौदह हजार वर्ष तक की आयु भोगते हैं। जो मनुष्य एकाग्रचित्त होकर इस अध्याय का श्रवण करता है, उसकी बुद्धि विशाल होती है और वह सम्पूर्ण पृथ्वी के दान का फल प्राप्त करता है। यह पुराण-कथा सभी सांसारिक बन्धनों से मुक्त करने वाली है।”
॥ इति श्रीब्रह्मपुराणे एकोनविंशोऽध्यायः समाप्तः ॥