पीपल (Peepal Tree / Ashvattha)
पद्म पुराण के अनुसार पीपल के मूल में भगवान विष्णु, तने में केशव, शाखाओं में नारायण और पत्तों में सभी देवी-देवताओं का वास होता है। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने गीता (१०.२६) में कहा है—"अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां" (समस्त वृक्षों में मैं पीपल हूँ)।
शनिवार को प्रातः तांबे के पात्र में जल, कच्चा दूध, काले तिल और गुड़ मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करें और ७ परिक्रमा करें। सायंकाल में सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
पीपल की छाल का काढ़ा दमा, फेफड़ों के संक्रमण और त्वचा विकारों में गुणकारी है। इसके कोमल पत्ते रक्त शोधक होते हैं।
पीपल एकमात्र ऐसा विशाल वृक्ष है जो २४ घंटे ऑक्सीजन उत्सर्जित करता है और वायुमंडल को हानिकारक जीवाणुओं से मुक्त रखता है।