श्रीमद् वाल्मीकि रामायण – सात कांड
रामायण केवल एक महाकाव्य नहीं, अपितु मर्यादा, कर्तव्य, भक्ति और प्रेम का सर्वोच्च आदर्श है। यहाँ पढ़ें सम्पूर्ण रामकथा कांड दर कांड, सरल हिंदी अर्थ एवं व्याख्या के साथ।
बाल काण्ड | अध्याय 3 | श्लोक 13
विघातं चाभिषेकस्य रामस्य च विवासनम् । राज्ञः शोकं विलापं च परलोकस्य चाश्रयम् ॥
“अभिषेक का विघ्न, राम का वनवास, राजा (दशरथ) का शोक और विलाप, तथा उनका परलोकगमन।”
पूरा श्लोक पढ़ेंसम्पूर्ण रामायण – सात कांड
बाल काण्ड
288 श्लोक
बाल काण्ड में भगवान राम के दिव्य जन्म, अयोध्या में बाल्यकाल, शिव-धनुष भंग तथा माता सीता से विवाह का वर्णन है।
अयोध्या काण्ड
0 श्लोक
अयोध्या काण्ड में राम के राज्याभिषेक की तैयारी, कैकेयी के वरदान, राम का वनवास, दशरथ का देहांत, भरत का राम से मिलने आना और राम की पादुका लेकर अयोध्या लौटने का वर्णन है।
अरण्य काण्ड
0 श्लोक
अरण्य काण्ड में राम, सीता और लक्ष्मण के वनवास के चौदह वर्षों का वर्णन है। इसमें शूर्पणखा प्रकरण, खर-दूषण वध, मारीच का स्वर्ण मृग बनना, रावण द्वारा सीता हरण, जटायु मोक्ष और राम का विलाप तथा सीता की खोज आरंभ होती है।
किष्किन्धा काण्ड
0 श्लोक
किष्किन्धा काण्ड में राम की हनुमान और सुग्रीव से मित्रता, वाली का वध, सुग्रीव का राज्याभिषेक, वर्षा ऋतु का व्यतीत होना, और सीता की खोज में चारों दिशाओं में वानर दलों का प्रस्थान करने का वर्णन है।
सुन्दर काण्ड
0 श्लोक
सुन्दर काण्ड में हनुमान जी की लंका यात्रा, अशोक वाटिका में सीता माता से भेंट, रावण द्वारा बंदी बनाया जाना, लंका दहन, तथा राम के पास सीता का समाचार लेकर लौटने का वर्णन है। यह काण्ड भक्ति, शौर्य और समर्पण का अद्भुत संगम है।
युद्ध काण्ड
0 श्लोक
युद्ध काण्ड में राम और रावण के बीच भीषण युद्ध, समुद्र पर सेतु निर्माण, इन्द्रजीत, कुम्भकर्ण और रावण का वध, सीता की अग्नि परीक्षा, विभीषण का राज्याभिषेक, तथा राम का अयोध्या लौटकर राज्याभिषेक का वर्णन है। यह सम्पूर्ण रामायण का चरमोत्कर्ष है।
उत्तर काण्ड
0 श्लोक
उत्तर काण्ड में राम के राज्यकाल का वर्णन, सीता का द्वितीय वनवास, लव-कुश का जन्म, अश्वमेध यज्ञ, लव-कुश द्वारा रामायण गान, सीता का धरती में समाना, और राम का जलसमाधि लेने का वर्णन है। यह काण्ड करुणा, त्याग और धर्म की जटिलताओं का चित्रण करता है।
प्रमुख कांड की विशेषताएँ
बालकांड
राम के बाल्यकाल, विश्वामित्र यज्ञ रक्षा, सीता स्वयंवर और परशुराम संवाद का वर्णन।
अयोध्याकांड
राम के वनगमन, भरत मिलाप और पादुका पूजन – मर्यादा और कर्तव्य का आदर्श।
अरण्यकांड
वनवास के दौरान ऋषियों से भेंट, शूर्पणखा प्रकरण और सीता हरण की दुःखद घटना।
किष्किन्धाकांड
हनुमान और सुग्रीव से मित्रता, वाली वध और सीता की खोज का प्रारंभ।
सुन्दरकांड
हनुमान का लंका गमन, सीता से भेंट, अशोक वाटिका दहन – भक्ति और शौर्य का अद्भुत संगम।
युद्धकांड
राम-रावण युद्ध, कुम्भकर्ण, मेघनाद वध, और रावण संहार – धर्म की विजय।
उत्तरकांड
राम का अयोध्या लौटना, राज्याभिषेक, सीता का वनवास, लव-कुश जन्म और राम का सशरीर स्वर्गारोहण।