वर-कन्या मिलान एवं मुहूर्त शोधक यंत्र
वर और कन्या की जन्म राशि, मांगलिक स्थिति और विवाह का पसंदीदा माह चुनें। हमारा वैदिक गणना इंजन स्वतः ३६ गुण, मांगलिक दोष एवं शुभ लग्न की गणना प्रस्तुत करेगा।
वर्ष २०२६ के संपूर्ण शास्त्र सम्मत विवाह मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार वर्ष २०२६ में गुरु-शुक्र तारा शुद्धि और देवोत्थान एकादशी के उपरांत पड़ने वाले शुभ विवाह लग्न मुहूर्त:
१८, २२, २६ व ३० जनवरी २०२६
शुभ लग्न: वृष, मिथुन व गोधूलि लग्न
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा, रोहिणी, मृगशिरा। सर्वार्थ सिद्धि योग।
०५, ०९, १४ व १९ फरवरी २०२६
शुभ लग्न: कुंभ, मीन व अभिजीत मुहूर्त
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी, हस्त, अनुराधा। गुरु पुष्य योग।
१८, २१, २५ व २७ अप्रैल २०२६
शुभ लग्न: मेष, वृष व गोधूलि वेला
नक्षत्र: रोहिणी, मघा, उत्तराफाल्गुनी। विवाह लग्न शुद्धि।
०८, १२, १९ (अक्षय तृतीया) व २४ मई
शुभ लग्न: कन्या, तुला व वृष लग्न
नक्षत्र: स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा। अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त।
०३, १०, १५ व २५ जून २०२६
शुभ लग्न: धनु व मकर लग्न
नक्षत्र: मूल, उत्तराषाढ़ा, रेवती। चातुर्मास पूर्व अंतिम लग्न।
२०, २८ नव. एवं ०७, १२, १८ दिसम्बर
शुभ लग्न: वृष, मिथुन व गोधूलि लग्न
नक्षत्र: देवउठनी एकादशी उपरांत शुभ विवाह लग्न शुभारंभ।
अष्टकूट ३६ गुण एवं त्रिबल शुद्धि का शास्त्रीय विज्ञान
सनातन हिंदू दर्शन में विवाह केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं है, अपितु यह दो जीवात्माओं, दो ऊर्जा शरीरों और कुल परंपराओं का एकात्म संरेखण है। वैदिक ऋषियों ने दांपत्य जीवन की स्थिरता, आरोग्यता और संतान सुख सुनिश्चित करने हेतु अष्टकूट मिलान (८ कूट = ३६ गुण) का गणितीय आधार तैयार किया था।
१. अष्टकूट के आठ स्तंभ और उनका महत्व
- वर्ण (१ अंक): वर-कन्या के आध्यात्मिक स्वभाव और सामाजिक कर्तव्य बोध की अनुकूलता।
- वश्य (२ अंक): पारस्परिक आदर, समर्पण और नियंत्रण संतुलन।
- तारा (३ अंक): जन्म नक्षत्रों के आधार पर स्वास्थ्य, भाग्य और दीर्घायु की अनुकूलता।
- योनि (४ अंक): शारीरिक व्यवहार, आकर्षण और काम-सुख की सामंजस्यता।
- ग्रह मैत्री (५ अंक): राशि स्वामियों की मित्रता द्वारा दैनिक वैचारिक व बौद्धिक तालमेल।
- गण (६ अंक): देव, मनुष्य व राक्षस गण द्वारा स्वभाव और जीवन मूल्यों की समानता।
- भकूट (७ अंक): राशियों के परस्पर संबंध (प्रेम, आर्थिक उन्नति, वंश वृद्धि)।
- नाड़ी (८ अंक): रक्त समूह (Blood Group), आनुवंशिक अनुकूलता (Genetics) और भावी संतान का स्वास्थ्य।
२. त्रिबल शुद्धि (Tribal Shuddhi) क्या है?
विवाह मुहूर्त तय करते समय केवल तिथियों को देखना पर्याप्त नहीं होता। शास्त्रों के अनुसार 'त्रिबल शुद्धि' अनिवार्य है:
- सूर्य बल (वर हेतु): वर की राशि से सूर्य का गोचर ४, ८, १२वें भाव में नहीं होना चाहिए।
- गुरु बल (कन्या हेतु): कन्या की राशि से बृहस्पति का गोचर अनुकूल होना चाहिए।
- चंद्र बल (दोनों हेतु): विवाह के दिन चंद्रमा दोनों की राशियों से शुभ भाव में स्थित हो।
विवाह मुहूर्त एवं कुंडली मिलान प्रश्नोत्तर (FAQ)
यह विवाह मुहूर्त एवं अष्टकूट मिलान गणना 'मुहूर्त चिंतामणि', 'ज्योतिष तत्व विवेक', 'वृहत् पराशर होराशास्त्र' एवं द्रिक गणित पंचांग के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर तैयार की गई है। व्यक्तिगत कुंडली मिलान हेतु स्थानीय ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना सर्वोत्तम है।
वैदिक विवाह मंगल श्लोक
मङ्गलम् भगवान विष्णुः मङ्गलम् गरुडध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरीकाक्षो मङ्गलाय तनो हरिः॥
भगवान श्रीहरि विष्णु एवं माता महालक्ष्मी के आशीर्वाद से दंपत्ति का गृहस्थ जीवन सदा सुख, शांति और समृद्धि से परिपूर्ण रहे।