सनातन वैदिक ज्ञानकोश
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१०८ जप विधि व भावार्थ

सम्पूर्ण वैदिक मंत्र संग्रह

समस्त प्रमुख देवी-देवताओं के शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, 108 जप विधि, साधना नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ का पावन संकलन।

१०८ जप माला विधि
संस्कृत व हिंदी शुद्ध उच्चारण संदर्भ
बीज मंत्र ऊर्जा चक्र जागरण
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मां पार्वती १०८ जप विधि

मां स्वयंवर पार्वती सिद्ध मंत्र - ॐ ह्रीं योगिनि योगेश्वरी: मनचाहा जीवनसाथी एवं शीघ्र विवाह साधना

शीघ्र विवाह और मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए मां स्वयंवर पार्वती का यह दिव्य सिद्ध मंत्र अत्यंत प्रभावशाली है। इस लेख में संपूर…

अश्विनी कुमार १०८ जप विधि

श्री अश्विनी कुमार आरोग्य मंत्र: ॐ अश्विनीकुमाराभ्यां नमः - असाध्य रोगों से मुक्ति और कायाकल्प साधना

अश्विनी कुमार देवताओं के वैद्य हैं। इस मंत्र साधना से असाध्य रोगों का नाश होता है और शरीर का कायाकल्प होता है।

पितृ देव (पूर्वज एवं दिव्य पितृगण) १०८ जप विधि

श्री गरुड़ पुराण आधारित पितृ दोष निवारण मंत्र: ॐ पितृभ्यः नमः - पितृ शांति और वंश वृद्धि हेतु सरल साधना

गरुड़ पुराण में वर्णित 'ॐ पितृभ्यः नमः' मंत्र पितृ दोष से मुक्ति, वंश वृद्धि और जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त करने का सबसे सरल…

राहु देव १०८ जप विधि

श्री राहु बीज मंत्र - ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः राहु महादशा, मानसिक तनाव व बाधा शांति शांति साधना

श्री राहु बीज मंत्र राहु ग्रह के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने और जीवन में स्थिरता लाने का एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक उपाय ह…

श्री कामधेनु माता (सुरभि) १०८ जप विधि

श्री कामधेनु मंत्र: ॐ सुरभ्यै नमः - मनोकामना पूर्ति एवं पारिवारिक सुख-समृद्धि का गुप्त विधान

सनातन संस्कृति में माता कामधेनु को समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने वाली कल्पवृक्ष स्वरूपा गोमाता माना गया है। 'ॐ सुरभ्यै नमः' मंत…

कार्तवीर्य अर्जुन १०८ जप विधि

श्री कार्तवीर्य अर्जुन मंत्र - ॐ कार्तवीर्यार्जुनो नाम राजा बाहुसहस्रवान् खोई वस्तु व धन पुनर्प्राप्ति साधना

भगवान कार्तवीर्य अर्जुन का यह मंत्र खोई हुई वस्तुओं को खोजने और धन की हानि को रोकने के लिए अत्यंत प्रभावशाली और चमत्कारी माना…

माँ गायत्री एवं भगवान विष्णु १०८ जप विधि

श्री गायत्री प्राण प्रतिष्ठा व सुरक्षा मंत्र - ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्ववस्थां गतोपि वा सम्पूर्ण शुद्धि व साधना कवच

श्री गायत्री प्राण प्रतिष्ठा एवं सुरक्षा मंत्र साधना से साधক के भीतर और बाहर की सम्पूर्ण अशुद्धियों का नाश होता है तथा divine…

माँ कात्यायनी १०८ जप विधि

श्री कात्यायनी महामंत्र - ॐ कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि शीघ्र विवाह एवं मनोवांछित वर प्राप्ति

शीघ्र विवाह, वैवाहिक बाधा निवारण और मनोवांछित वर प्राप्ति के लिए मां कात्यायनी के अत्यंत शक्तिशाली महामंत्र का विधान, अर्थ और…

महर्षि अगस्त्य १०८ जप विधि

श्री अगस्त्य सिद्ध मूल मंत्र - ॐ श्री अगस्त्याय नमः आरोग्य, आयु वृद्धि और समस्त बाधा निवारण महामंत्र

महर्षि अगस्त्य के सिद्ध मूल मंत्र 'ॐ श्री अगस्त्याय नमः' से आरोग्य, लंबी आयु और समस्त बाधाओं का निवारण करने की संपूर्ण वैदिक …

भगवान गणेश १०८ जप विधि

श्री गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ

श्री गणेश अथर्वशीर्ष वेदों का एक अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली उपनिषद है जिसके पाठ से विघ्नहर्ता भगवान गणेश की असीम कृपा, बुद्धि…

भगवान श्री गणेश १०८ जप विधि

Ganesh Atharvashirsha Path Kaise Kare

गणेश अथर्वाशीर्ष वेदों का एक अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली स्तोत्र है। इसके नियमित पाठ से विघ्नहर्ता भगवान गणेश की असीम कृपा प्र…

भगवान गणेश १०८ जप विधि

गणेश अथर्वशीर्ष पाठ हिंदी में लिखा हुआ - संपूर्ण विधि, अर्थ एवं पाठ

भगवान गणेश को समर्पित 'गणेश अथर्वशीर्ष' वेदों का एक अत्यंत दुर्लभ और शक्तिशाली स्रोत है। यहाँ पढ़ें संपूर्ण गणेश अथर्वशीर्ष पा…

माता महालक्ष्मी १०८ जप विधि

Shri Suktam Path Ki Vidhi

श्री सूक्त ऋग्वेद का अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली पाठ है। इसके नियमित और विधि-विधान से पाठ करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त…

केतु ग्रह देवता १०८ जप विधि

कृष्ण मूल मंत्र एवं केतु ग्रह देवता के प्राचीन मंत्र

सनातन संस्कृति में श्रीकृष्ण मूल मंत्र और केतु ग्रह देवता के मंत्रों का विशेष महत्व है। इस लेख में जानें दोनों प्राचीन मंत्रो…

माँ प्रत्यंगिरा १०८ जप विधि

श्री प्रत्यंगिरा देवी मंत्र - ॐ अपराजितायै विद्महे शत्रु निषूदिल्यै धीमहि तन्नो शक्तिः प्रचोदयात् घोर शत्रु बाधा व तंत्र दोष निवारण

माँ प्रत्यंगिरा के इस शक्तिशाली गायत्री मंत्र से घोर शत्रु बाधा, तंत्र-मंत्र के प्रभाव और सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं का …

माँ तारा १०८ जप विधि

श्री तारा महाविद्या मंत्र - ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् अमोघ संकट मुक्ति, धन लाभ एवं मोक्ष प्राप्ति साधना

माँ तारा महाविद्या की साधना अत्यंत शक्तिशाली और शीघ्र फलदायी है। यह मंत्र न केवल सांसारिक दुखों का निवारण करता है, बल्कि साधक…

भगवान विष्णु एवं सुदर्शन चक्र १०८ जप विधि

श्री सुदर्शन चक्र महामंत्र - ॐ क्लीं कृष्णाय क्लीं गोविन्दाय क्लीं गोपीजन वल्लभाय स्वाहा एवं सुदर्शन चक्र सुरक्षा कवच साधना

भगवान विष्णु के अस्त्र सुदर्शन चक्र और गोपाल मंत्र के अद्भुत संयोग से निर्मित महामंत्र साधना, जो साधक को अजेय सुरक्षा और अनंत…

भगवान महाविष्णु / विराट पुरुष १०८ जप विधि

पुरुष सूक्त अर्थ सहित

वैदिक सनातन संस्कृति के सर्वोच्च और अत्यंत शक्तिशाली 'पुरुष सूक्त' का संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ, विनियोग, न्यास, जप विधि और चमत…

भगवान शिव (महामृत्युंजय) १०८ जप विधि

श्री महामृत्युंजय त्रयोदशाक्षर मंत्र - ॐ हौं जूं सः माम् पालय पालय सः जूं हौं अमोघ आयु रक्षा और आरोग्य महामंत्र

भगवान शिव के परम शक्तिशाली त्रयोदशाक्षर महामृत्युंजय मंत्र से अमोघ आयु रक्षा, आरोग्य और मृत्युभय का निवारण कैसे करें। जानिए स…

भगवान मंगल (भौम, अंगारका) १०८ जप विधि

मंगल ग्रह शांति मंत्र: ॐ भौं भौमाय नमः एवं ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः

मंगल ग्रह के अशुभ प्रभावों से मुक्ति, भूमि-भवन लाभ और मंगलिक दोष निवारण के लिए मंगल ग्रह शांति मंत्र (ॐ भौं भौमाय नमः एवं ॐ क…

माता महालक्ष्मी १०८ जप विधि

श्री सूक्तम: ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् (16 ऋचाएं एवं अर्थ)

श्री सूक्तम वेदों का अत्यंत पवित्र और महालक्ष्मी को समर्पित दिव्य स्तोत्र है। इसके पाठ से जीवन में धन, धान्य, ऐश्वर्य और आध्य…

भगवान शिव १०८ जप विधि

महामृत्युंजय मंत्र: ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् (अर्थ, विधि व लाभ)

महामृत्युंजय मंत्र भगवान शिव का अत्यंत शक्तिशाली और मोक्षदायी मंत्र है। इसके निरंतर जप से अकाल मृत्यु का भय टलता है, आरोग्य क…

भगवान चंद्र देव १०८ जप विधि

चंद्र ग्रह शांति मंत्र: ॐ सों सोमाय नमः एवं ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः

चंद्र ग्रह की शांति और मानसिक संतुलन के लिए चंद्र देव के वैदिक एवं तांत्रिक मंत्रों का विस्तृत मार्गदर्शन, जाप विधि और चमत्का…

माता सरस्वती १०८ जप विधि

सरस्वती विद्या मंत्र: अर्थ, महत्व और जाप विधि

सरस्वती विद्या मंत्र (ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः एवं ॐ ऐं वाग्देव्यै च विद्महे) का अर्थ, महत्व, जप विधि और विशेष लाभ जानें। Bhaktilok…

अनंत, वासुकी एवं समस्त नाग देवता १०८ जप विधि

श्री कूर्म वासुकी नाग मंत्र - ॐ अनन्ताय वासुकये च पद्मनाभाय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात् भूमि दोष एवं नाग दोष निवारण

श्री कूर्म वासुकी नाग मंत्र भूमि दोष, वास्तु दोष और नाग दोष से मुक्ति पाने का एक अत्यंत शक्तिशाली वैदिक मंत्र है। इसके नियमित…

भगवान शिव (महाकाल) १०८ जप विधि

श्री महामृत्युंजय त्रयक्षर रक्षा मंत्र - ॐ हौं जूं सः मृत्यंजयय नमः अमोघ स्वास्थ्य एवं दीर्घायु साधना विधि

श्री महामृत्युंजय त्रयक्षर रक्षा मंत्र (ॐ हौं जूं सः मृत्यंजयय नमः) भगवान शिव का अति गोपनीय और अमोघ आरोग्य मंत्र है, जो गंभीर…

श्री लक्ष्मी नृसिंह १०८ जप विधि

श्री लक्ष्मी नृसिंह करुणा मंत्र - ॐ श्रीं ह्रीं क्षौं श्रीं लक्ष्मी नृसिंहाय नमः तीव्र आर्थिक लाभ एवं सुरक्षा कवच

भगवान श्री लक्ष्मी नृसिंह का यह करुणा मंत्र धन, ऐश्वर्य, और समस्त प्रकार की बाधाओं से मुक्ति दिलाने वाला अत्यंत शक्तिशाली और …

भगवान श्री धन्वंतरि (महाविष्णु अवतार) १०८ जप विधि

श्री धन्वंतरि महामंत्र - ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वव्याधि विनाशाय त्रैलोक्य नाथाय महाविष्णवे नमः सम्पूर्ण आरोग्य साधना

भगवान धन्वंतरि के इस महामंत्र से समस्त शारीरिक एवं मानसिक व्याधियों का नाश होता है। जानिए इसकी संपूर्ण साधना विधि, जप नियम और…

भगवान दत्तात्रेय १०८ जप विधि

श्री सर्वार्थ सिद्धि दत्तात्रेय मंत्र - ॐ दिगंबराय विद्महे योगीशाय धीमहि तन्नः दत प्रचोदयात् तीव्र ज्ञान और गुरु कृपा प्राप्ति

भगवान दत्तात्रेय के सर्वार्थ सिद्धि गायत्री मंत्र के माध्यम से तीव्र ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और अमोघ गुरु कृपा प्राप्त करने …

श्री हयग्रीव १०८ जप विधि

श्री Hayagriva (हयग्रीव) विद्या मंत्र - ज्ञान, बुद्धि और वेदों के संरक्षण का दिव्य मंत्र एवं साधना विधि

सनातन धर्म में भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार को ज्ञान, विद्या और वेदों के पुनरुद्धार का प्रतीक माना जाता है। श्री हयग्रीव विद…

माँ कूष्माण्डा १०८ जप विधि

श्री कूष्माण्डा देवी मंत्र - ॐ ऐं ह्रीं श्रीं कूष्माण्डायै नमः आरोग्यता, यश और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्ति महामंत्र

माँ कूष्माण्डा का यह महामंत्र आरोग्यता, यश, दीर्घायु और आंतरिक सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। जानें इसका संपूर्ण विधान।

माँ तारा १०८ जप विधि

श्री तारा महाविद्या मंत्र - ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट् तीव्र साधना, मोक्ष प्राप्ति व वाक् सिद्धि महामंत्र

सनातन संस्कृति में मां तारा को द्वितीय महाविद्या के रूप में पूजा जाता है। तारा महाविद्या का यह महामंत्र भौतिक बाधाओं का नाश क…

माँ भुवनेश्वरी १०८ जप विधि

श्री भुवनेश्वरी महाविद्या मंत्र - ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं भुवनेश्वeryै नमः सर्वैश्वर्य प्राप्ति एवं राजयोग साधना

दशमहासमुद्र में चतुर्थ महाविद्या माँ भुवनेश्वरी की साधना से जातक को अखंड राजयोग, ऐश्वर्य और भौतिक-आध्यात्मिक सफलता की प्राप्त…

भगवान मंगल एवं देवगुरु बृहस्पति १०८ जप विधि

श्री ऋण मोचन मंगलगुरु मंत्र - ॐ भौमभौमाय नमः एवं ॐ बृं बृहस्पतये नमः भारी कर्ज मुक्ति और आर्थिक स्थिरता महाउपाय

कर्ज के भारी बोझ और आर्थिक संकट से मुक्ति पाने के लिए भौम (मंगल) और गुरु (बृहस्पति) के संयुक्त महामंत्र का विधि-विधान सहित सं…

भगवान कूर्म (विष्णु भगवान का द्वितीय अवतार) १०८ जप विधि

श्री कूर्म महामंत्र - ॐ आं क्रों कूर्मरूपाय नमः अचल अष्ट ऐश्वर्य प्राप्ति एवं भूमि-भवन दोष निवारण महामंत्र

भगवान विष्णु के कूर्म (कछुए) अवतार का यह महामंत्र भूमि-भवन दोषों के शमन, अचल संपत्ति की प्राप्ति और जीवन में स्थिरता व अष्ट ऐ…

माँ छिन्नमस्ता १०८ जप विधि

श्री छिन्नमस्ता महाविद्या मंत्र - ॐ श्रीं ह्रीं ऐं क्लीं वज्र वैरोचण्ये हुं हुं फट् स्वाहा गुप्त शत्रुओं का नाश एवं कुण्डलिनी जागरण महामंत्र

दशमहाविद्याओं में छिन्नमस्ता माता प्रचंड ऊर्जा, शत्रु विनाश और कुण्डलिनी जागरण की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनका यह मंत्र अमोघ है…

मंत्र साधना एवं 108 जप के सार्वभौमिक नियम

शास्त्रसम्मत विधि से जप करने पर ही मंत्र की पूर्ण ऊर्जा एवं मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है

1. ब्रह्ममुहूर्त एवं समय

सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्ममुहूर्त, प्रातः 4:00 से 6:00 बजे) अथवा संध्याकाल में जप करने से मन स्वतः एकाग्र व शांत रहता है।

2. आसन एवं दिशा

कुशा, ऊनी अथवा स्वच्छ सूती आसन पर बैठें। जप के समय साधक का मुख सदैव पूर्व (East) अथवा उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।

3. 108 जप माला विधि

रुद्राक्ष, तुलसी अथवा स्फटिक माला से 108 बार जप करें। माला फेरते समय सुमेरु (शीर्ष दाने) को कभी लांघा नहीं जाता।

4. भाव एवं एकाग्रता

मंत्र के अर्थ का ध्यान करते हुए उपांशु (होंठ हिलें पर आवाज न आए) या मानस जप करना शास्त्रों में सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

वैदिक मंत्रों का आध्यात्मिक व वैज्ञानिक महत्व

सनातन परंपरा में 'मंत्र' केवल शब्दों का समूह नहीं, बल्कि ध्वनि तरंगों (Sound Vibrations) का ऐसा विज्ञान है जो मानव चेतना को ब्रह्मांडीय चेतना से जोड़ता है। 'मंत्र' शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के दो शब्दों से हुई है— 'मननात् त्रायते इति मन्त्रः' अर्थात् जिसके निरंतर मनन, चिंतन और जप से मन के समस्त भय, विकार और अज्ञान से मुक्ति मिले, वही मंत्र है।

१. ध्वनि विज्ञान और बीज मंत्रों की शक्ति

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के ऋषियों ने ध्यान की उच्चतम अवस्था में जिन दिव्य ध्वनियों का साक्षात्कार किया, उन्हें छंदबद्ध मंत्रों के रूप में लिपिबद्ध किया। मंत्रों में निहित 'बीज मंत्र' (जैसे ॐ, ह्रीं, क्लीं, ऐं, श्रीं) विशेष फ्रीक्वेंसी पर कंपन उत्पन्न करते हैं, जो मानव शरीर के 7 प्रमुख ऊर्जा चक्रों (चक्र तंत्र) को संतुलित और जागृत करने में सहायक होते हैं।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: आधुनिक न्यूरोसाइंस (Neuroscience) के शोध भी यह प्रमाणित करते हैं कि नियमित गायत्री मंत्र अथवा महामृत्युंजय मंत्र के जप से मस्तिष्क की अल्फा तरंगे (Alpha Waves) सक्रिय होती हैं, जिससे तनाव हार्मोन (Cortisol) घटता है और स्मरण शक्ति में अप्रत्याशित वृद्धि होती है।

२. मंत्र जप के तीन प्रमुख भेद

शास्त्रों में मंत्र जप की तीन कोटियां बताई गई हैं:

  • वाचिक जप: जिसमें मंत्र का उच्चारण स्पष्ट वाणी से किया जाता है जिसे अन्य लोग भी सुन सकें। यह प्रारंभिक साधकों के लिए एकाग्रता बनाने हेतु उपयुक्त है।
  • उपांशु जप: जिसमें केवल जीभ और होंठ हिलते हैं, किंतु ध्वनि इतनी धीमी होती है कि केवल साधक स्वयं सुन सके। इसे वाचिक जप से 100 गुना अधिक फलदायी माना गया है।
  • मानस जप: जिसमें होंठ और जीभ स्थिर रहते हैं और केवल मन ही मन ध्यानपूर्वक मंत्र का अनुशीलन किया जाता है। इसे सर्वोच्च और 1000 गुना फलदायी माना गया है।

३. १०८ बार ही जप करने का ब्रह्मांडीय रहस्य

भारतीय ज्योतिष में संपूर्ण आकाशमंडल को 12 राशियों और 27 नक्षत्रों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक नक्षत्र के 4 पद या चरण होते हैं। इस प्रकार (27 × 4 = 108) संपूर्ण खगोल मंडल 108 चरणों का प्रतिनिधित्व करता है। जब साधक 108 मनकों की माला से जप पूर्ण करता है, तो वह प्रतिकात्मक रूप से संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा कर दिव्य ऊर्जा को अपने भीतर आत्मसात करता है।

मंत्र साधना से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

शास्त्रसम्मत संदर्भों के आधार पर तैयार महत्वपूर्ण जिज्ञासाएं एवं समाधान

शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय से पूर्व का समय (ब्रह्ममुहूर्त, प्रातः 4:00 से 6:00 बजे) मंत्र जप के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसके अतिरिक्त प्रदोष काल (संध्या समय) भी शिव एवं शक्ति मंत्रों के लिए अत्यंत शुभ होता है।

सामान्य वैदिक स्तुति मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, गायत्री मंत्र, गणेश मंत्र और नाम जप (जैसे ॐ नमः शिवाय, श्री सीताराम, ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) का जप कोई भी श्रद्धालु शुद्ध भाव से कर सकता है। केवल तांत्रिक षट्कर्म मंत्रों के लिए विशेष गुरु दीक्षा अनिवार्य होती है।

भारतीय ज्योतिष और खगोल शास्त्र में 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। 108 बार मंत्र जप करने से ब्रह्मांड की समस्त सकारात्मक ऊर्जा हमारे शरीर और मन के साथ संरेखित होती है।

माला के शीर्ष दाने को 'सुमेरु' कहते हैं। 108 दाने पूर्ण होने पर सुमेरु को लांघा नहीं जाता, बल्कि माला को वहीं से घुमाकर (Reverse) पुनः उल्टी दिशा में फेरा जाता है।

मंत्र जप में भाव और श्रद्धा सर्वोपरि हैं। यदि उच्चारण में कठिनाई हो, तो धीमी गति से उपांशु अथवा मानस जप करें। भक्तिलोक पर प्रत्येक मंत्र का शुद्ध संस्कृत पाठ और संदर्भ उपलब्ध कराया गया है।

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