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देव शक्ति

हिंदू देवी-देवता ज्ञानकोश

"एकम सद् विप्रा बहुधा वदन्ति" – अर्थात् सत्य (परब्रह्म) एक ही है, जिसे ज्ञानी पुरुष विभिन्न रूपों में वर्णित करते हैं। सनातन परंपरा में त्रिगुण और प्रकृति की शक्तियों को विभिन्न देवी-देवताओं के विग्रहों के रूप में पूजा जाता है। देवताओं के वाहन, प्रतीक शस्त्र और ध्यान मन्त्र उनके गहरे आध्यात्मिक व मनोवैज्ञानिक अर्थों को दर्शाते हैं।

विधा: स्वरूप व प्रतीक विमर्श शास्त्र: ऋग्वेद व उपनिषद सम्मत

देव स्वरूप व प्रतीक विमर्श विनिर्देशन

भगवान शिव (Lord Shiva)

१. आध्यात्मिक स्वरूप (Representation):संहारक व कल्याणकारी देव।
२. प्रमुख वाहन (Vahana):नंदी बैल (धर्म का प्रतीक)।
३. प्रतीक शास्त्र/शस्त्र (Symbols):त्रिशूल, डमरू, जटाजूट, अर्धचंद्र।
४. सिद्ध मूल मंत्र (Beej Mantra):ॐ नमः शिवाय
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मंदिर में देव विग्रह स्थापित करने के ५ आवश्यक नियम

घर के मंदिर में देव विग्रहों (मूर्तियों) की स्थापना करते समय इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:

विग्रहों की संख्या व आमने-सामने होना

घर के मंदिर में कभी भी एक ही देव विग्रह के सम्मुख दूसरा विग्रह आमने-सामने नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, एक ही घर में ३ गणेश, ३ देवियाँ, या २ शंख एक साथ पूजा गृह में स्थापित करना वर्जित माना जाता है।

ऊंचाई व प्राण प्रतिष्ठा नियम

गृहस्थों के घर में मूर्तियों की ऊंचाई हमेशा अंगूठे से लेकर ९ इंच तक होनी चाहिए। इससे बड़ी मूर्तियों के लिए कड़े प्राण प्रतिष्ठा नियमों और नित्य नैवेद्य का ध्यान रखना अनिवार्य हो जाता है जो गृहस्थ जीवन में कठिन है।

देव स्वरूप शंका समाधान (FAQs)

बाईं सूंड वाले गणेश (वाममुखी): यह सौम्य और शांत होते हैं, इनकी पूजा गृहस्थ जीवन के लिए सर्वोत्तम है।
दाहिनी सूंड वाले गणेश (सिद्धिविनायक): यह उग्र स्वभाव (सूर्य नाड़ी) के होते हैं। इनकी पूजा के लिए कड़े नियमों की आवश्यकता होती है, अतः इन्हें मंदिरों या विशेष तांत्रिक साधनाओं में ही स्थापित किया जाता है।

गृहस्थों के लिए घर के मंदिर में भगवान शिव की सपरिवार (गौरी, गणेश, कार्तिकेय सहित) मूर्ति रखना सबसे उत्तम है। यदि शिवलिंग रखना हो, तो वह अंगूठे के पोर से बड़ा नहीं होना चाहिए और नित्य उस पर जल चढ़ाना अनिवार्य है। नर्मदा नदी से प्राप्त 'नर्मदेश्वर शिवलिंग' सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि इसे प्राण प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं होती।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

देव विग्रह व रूप संपादन

भक्तिलोक विग्रह शोध परिषद (Bhaktilok Iconography Desk)

श्रीमद्देवीभागवत, शिवपुराण और विष्णुधर्मोत्तर पुराण के रूप-चित्रण अध्यायों के अनुसार देव स्वरूप संकलन करने वाली विंग।

कर्मकांड व वैदिक देव समीक्षा

आचार्य देवदत्त शास्त्री (Acharya Devdutt Shastri)

पूर्व अध्यक्ष, संस्कृत संस्कृति विभाग, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय काशी। ३०+ वर्षों का देव प्रतिष्ठा व वैदिक मूर्ति लक्षण समीक्षा अनुभव।

देव स्वरूप सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें