आज का पंचांग | सूर्योदय: ०५:४५ AM | सूर्यास्त: ०६:५० PM
मन्त्र योगा

आज का महामंत्र

मंत्र साधना (Jap Yoga) सनातन धर्म की एक परम कल्याणकारी ध्यान पद्धति है। प्रतिदिन के ग्रह गोचरों और विशेष तिथियों के अनुसार ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ने के लिए एक विशेष मंत्र का निर्धारण किया जाता है। भक्तिलोक डिजिटल जप माला के माध्यम से आज के महामंत्र का १०८ बार ध्यान पूर्वक जप करें।

उपासना: मंत्र जप ध्वनि: सिंगिंग बाउल प्रमाण: शास्त्र सम्मत
मन्त्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

मुख्य देवता: भगवान विष्णु (Lord Vishnu)

मंत्र का आध्यात्मिक अर्थ व महत्व:

मैं भगवान वासुदेव को नमन करता हूँ।

डिजिटल जप माला काउंटर (Click to Count)

नीचे दिए गए चक्र को प्रत्येक मंत्र जप पूरा होने पर दबाएं। १०८ बार जप करने पर एक माला पूर्ण होगी।

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जप संख्या
बधाई हो! आपकी १ माला (१०८ जप) पूर्ण हुई।

यह साधना आपके मन को परम शांति और एकाग्रता प्रदान करेगी।

मंत्र साधना का मानसिक एवं भौतिक विज्ञान

सनातन ध्यान पद्धति में **'मंत्र'** शब्द दो धातुओं से मिलकर बना है: **'मन'** अर्थात सोचना/बुद्धि और **'त्र'** अर्थात रक्षा करना/मुक्त करना। वह विशिष्ट ध्वनि तरंग जो हमारे मन को फालतू के विचारों से मुक्त कर रक्षा करती है, मंत्र कहलाती है।

जब हम किसी मंत्र का बार-बार जप (Chanting) करते हैं, तो जीभ और तालु के विशिष्ट बिंदुओं के टकराने से मस्तिष्क के पीनियल और हाइपोथैलेमस ग्रंथियां (Pineal & Hypothalamus glands) उत्तेजित होती हैं। इसके प्रभाव से शरीर में मेलाटोनिन और एंडोर्फिन जैसे प्रसन्नता देने वाले हार्मोन स्रावित होते हैं और ध्यान की गहराई प्राप्त होती है।

माला में १०८ (108) मनकों के जप का खगोलीय नियम

शास्त्रों में किसी भी मंत्र जप की पूर्णता के लिए १०८ बार का विधान है। इसके पीछे गहरा खगोलीय और गणितीय नियम है:

नक्षत्र और चरण गणना: हिंदू ज्योतिष में २७ नक्षत्र माने गए हैं। प्रत्येक नक्षत्र के ४ चरण होते हैं। इस प्रकार २७ गुणा ४ बराबर १०८ होता है। अतः १०८ बार जप करने से संपूर्ण ब्रह्मांडीय नक्षत्रों में शुद्धि का संचार होता है।
सूर्य और पृथ्वी की दूरी: खगोलशास्त्र के अनुसार, सूर्य और पृथ्वी के मध्य की दूरी सूर्य के व्यास (Diameter) का लगभग १०८ गुना है। इसी प्रकार चंद्रमा और पृथ्वी की दूरी भी चंद्रमा के व्यास का १०८ गुना है। अतः यह संख्या ब्रह्मांडीय संतुलन की परिचायक है।
प्राण श्वास की संख्या: एक स्वस्थ मनुष्य दिनभर में (२४ घंटे में) लगभग २१,६०० बार श्वास लेता है। इसका आधा भाग (१०,८००) दिन में और आधा भाग रात्रि में होता है। ध्यान योगी १०,८०० श्वासों का १ प्रतिशत भाग यानी १०८ बार पूर्ण एकाग्रता से जप करते हैं।

मंत्र साधना सम्बन्धी आम प्रश्न (FAQs)

मंत्र जप के लिए सूर्योदय से पूर्व का समय (ब्रह्म मुहूर्त, सुबह ४ से ६ बजे) और संध्याकाल (सूर्यास्त के समय) को सबसे उत्तम माना गया है। इस समय प्रकृति शांत होती है जिससे एकाग्रता में सुगमता रहती है।

शास्त्रों के अनुसार 'मानसिक जप' (बिना जीभ हिलाए मन के भीतर मंत्र गूंजना) वाचिक जप (बोलकर) की तुलना में सौ गुना अधिक फलदायी और मन को तुरंत शांत करने वाला माना गया है।

हाँ, बिल्कुल। गायत्री मंत्र सद्बुद्धि प्रदाता सार्वजनिक कल्याणकारी वेद मंत्र है। पवित्र भाव और श्रद्धा के साथ कोई भी व्यक्ति (चाहे पुरुष हो या महिला) गायत्री महामंत्र का जप कर सकता है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

लेखन एवं संकलन

भक्तिलोक शोध मंडल (Bhaktilok Research Council)

धार्मिक ग्रंथों के प्राचीन ज्ञान का सरल और प्रामाणिक अनुवाद करने वाली समर्पित संस्था।

तथ्य-जांच व धार्मिक समीक्षा

डॉ. विकास शास्त्री (Dr. Vikas Shastri)

वैदिक संस्कृति व मंत्र विज्ञान के विशेषज्ञ विद्वान। पीएचडी (वैदिक अध्ययन)।

प्रामाणिकता सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ अध्ययन काल: ५ मिनट पढ़ें