पंचांग काल गणना व उपवास अन्वेषक

क्या आज मेरा व्रत है? (Is Fast Today)

सनातन हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक दिन की तिथि, नक्षत्र और वार का विशेष आध्यात्मिक प्रभाव होता है। आज एकादशी, प्रदोष, संकष्टी चतुर्थी, पूर्णिमा, अमावस्या अथवा कोई साप्ताहिक उपवास है या नहीं, यह जानने के लिए नीचे तारीख चुनें और पंचांग-सत्यापित रिपोर्ट प्राप्त करें।

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एकादशी व्रत 26 Sep 2026

जी हाँ! आज पावन व्रत है

आराध्य: भगवान विष्णु

सात्त्विक फलाहार एवं आहार निर्देश:

पारण का शुभ समय:

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उपवास विज्ञान व मीमांसा

सनातन हिंदू उपवास का खगोलीय, शारीरिक व यौगिक विज्ञान

हिंदू धर्म में 'उपवास' शब्द दो मूल शब्दों से मिलकर बना है: 'उप' अर्थात समीप और 'वास' अर्थात निवास करना—अर्थात अपने अंतर्मन में स्थित परमात्मा के समीप निवास करना ही सच्चा उपवास है। व्रत केवल भोजन त्यागने का नाम नहीं, बल्कि इंद्रियों पर संयम, मानसिक शुद्धि और जैविक ऊर्जा के संतुलन की वैज्ञानिक साधना है।

१. चंद्र कलाएं (Tithi) और मानव शरीर का गुरुत्वाकर्षण संबंध

जिस प्रकार पूर्णिमा और अमावस्या पर चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण से समुद्र में ज्वार-भाटा (Tides) उत्पन्न होता है, उसी प्रकार मानव शरीर (जिसमें ७०% से अधिक जल तत्व है) पर भी चंद्रमा की कलाओं का गहरा प्रभाव पड़ता है।

एकादशी (११वीं तिथि), त्रयोदशी (प्रदोष) और पूर्णिमा/अमावस्या के दिन उपवास करने से पाचन तंत्र को विश्राम मिलता है, शरीर में ऑटोफैगी (Autophagy) की प्रक्रिया सक्रिय होती है जिससे मृत व विषाक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और मस्तिष्क में एकाग्रता बढ़ती है।

२. उपवास के शास्त्रीय संकल्प की सरल विधि

शास्त्रों के अनुसार बिना संकल्प के किया गया कोई भी व्रत पूर्ण फलदायी नहीं होता। प्रातःकाल उठकर निम्नलिखित तीन चरणों में संकल्प लें:

१. शुचिता व आचमन:

सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और तीन बार आचमन कर स्वस्तिवाचन करें।

२. कुश व जल ग्रहण:

दाहिने हाथ में थोड़ा गंगाजल, अक्षत, तिल और पुष्प लेकर अपने इष्टदेव के सम्मुख हाथ जोड़ें।

३. संकल्प मंत्र व प्रतिज्ञा:

"हे प्रभु! आज मैं आपकी प्रसन्नता और चित्त शुद्धि हेतु इस पावन व्रत का निष्ठापूर्वक पालन करूंगा।" बोलकर संकल्प जल भूमि पर छोड़ दें।

प्रमुख व्रत सारणी

सनातन धर्म के प्रमुख व्रत, तिथि एवं साधना फल

व्रत का नाम पंचांग तिथि अधिष्ठाता देवता धार्मिक एवं आध्यात्मिक फल
एकादशी व्रत (Ekadashi) माह में दो बार (शुक्ल व कृष्ण ११वीं) भगवान विष्णु समस्त पापों का नाश, मोक्ष प्राप्ति व आरोग्य।
प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) त्रयोदशी तिथि (१३वीं तिथि) भगवान शिव शंकर शत्रु बाधा, रोग मुक्ति, संतान सुख व शिव कृपा।
संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी (४थी तिथि) भगवान श्री गणेश संकटों का निवारण, बुद्धि व कार्य सिद्धि।
मासिक शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (१४वीं) देवाधिदेव महादेव कालसर्प शांति, अकाल मृत्यु भय से मुक्ति।
पूर्णिमा व्रत (Satyanarayan) मास का अंतिम दिन (१५वीं तिथि) सत्यनारायण भगवान व चंद्र देव घर में सुख-शांति, समृद्धि व मानसिक संतुलन।
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प्रश्नोत्तर

व्रत एवं उपवास संबंधी मुख्य प्रश्न (FAQs)

हाँ, तिथि के घटने-बढ़ने और सूर्योदय स्पर्श काल के कारण एकादशी कई बार दो दिनों तक खिंच जाती है। पहले दिन गृहस्थ एकादशी व्रत रखते हैं और दूसरे दिन वैष्णव संप्रदाय के लोग (सन्यासी/साधु) व्रत रखते हैं।

प्रदोष व्रत प्रत्येक चंद्र मास के शुक्ल और कृष्ण दोनों पक्षों की त्रयोदशी (१३वीं तिथि) को रखा जाता है। जबकि मासिक शिवरात्रि केवल कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (१४वीं तिथि) को रखी जाती है। दोनों ही व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम हैं।

यदि किसी बीमारी, यात्रा अथवा सूतक के कारण व्रत टूट जाता है, तो अगले पक्ष में उसी व्रत का दुगना दान-पुण्य करना चाहिए अथवा अपने इष्टदेव का नाम जप कर क्षमा याचना करनी चाहिए।

सेंधा नमक (Rock Salt) शुद्ध प्राकृतिक खनिज है, जिसे किसी रासायनिक प्रक्रिया या मिलावट के बिना तैयार किया जाता है। अतः इसे पूर्णतः सात्त्विक मानकर उपवास में ग्रहण किया जाता है।

हाँ, सोमवार (शिव), मंगलवार (हनुमान), गुरुवार (विष्णु/बृहस्पति) और शनिवार (शनिदेव) जैसे साप्ताहिक व्रत संकल्पपूर्वक रखने से संबंधित नवग्रहों की शांति और मनोकामना पूर्ति होती है।

शास्त्रों के अनुसार विशेषकर एकादशी व्रत में 'हरिवासर' समाप्त होने के बाद और द्वादशी तिथि के भीतर पारण करना अनिवार्य होता है, अन्यथा व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं होता।
संपादकीय विश्वसनीयता संदर्भ-आधारित एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

ज्योतिषीय गणना एवं संकलन

भक्तिलोक पंचांग परिषद् (Bhaktilok Panchang Council)

सूर्य सिद्धांत, निर्णय सिंधु और कालनिर्णय के शास्त्रीय नियमों पर आधारित प्रामाणिक तिथि गणना।

धार्मिक व पंचांग समीक्षा

डॉ. विकास शास्त्री (Dr. Vikas Shastri, Ph.D. Sanskrit)

वैदिक ज्योतिष एवं व्रत अनुष्ठान के विशेषज्ञ विद्वान, पंचांग परीक्षक।

अंतिम अद्यतन: १३ सितंबर २०२६ अध्ययन काल: ५ मिनट पठन