अखण्ड दीप घृत व तैल नियोजक
अखण्ड ज्योति के लिए ईंधन की मात्रा (Estimated Volume):
अखण्ड ज्योति के लिए मोटी बाती (रक्षासूत्र/कलावा से बनी) का ही प्रयोग करें जो लंबे समय तक जलती रहे।
अखण्ड ज्योति स्थापना दिशा व वास्तुशास्त्र
दीये की लौ (Flame) की दिशा केवल सजावट का विषय नहीं है; सनातन वास्तुशास्त्र के अनुसार प्रत्येक दिशा में लौ प्रज्वलित करने का एक विशिष्ट प्रभाव होता है:
| लौ की दिशा (Direction) | आध्यात्मिक/भौतिक प्रभाव (Vastu Impact) |
|---|---|
| पूर्व दिशा (East) | आरोग्य (उत्तम स्वास्थ्य) तथा दीर्घायु की प्राप्ति। |
| उत्तर दिशा (North) | धन-धान्य, व्यवसाय में लाभ तथा श्री समृद्धि का आगमन। |
| दक्षिण दिशा (South) | यह दिशा हानि व कष्ट का कारक मानी गई है। अतः दीये की लौ दक्षिण में न रखें। |
| पश्चिम दिशा (West) | यह मध्यम फल देती है, लेकिन विशेष साधना संकल्पों में इसका प्रयोग वर्जित है। |
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अखण्ड ज्योति में जलने वाले ईंधन का चयन साधक के साधना पथ को प्रभावित करता है:
अखण्ड ज्योति सम्बन्धी प्रमुख प्रश्न (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
शास्त्र समीक्षा एवं संकलन
भक्तिलोक कर्मकांड परिषद् (Bhaktilok Karmakand Council)
वैदिक हवन, यज्ञ, और पूजा विधान से जुड़ी प्रामाणिक शास्त्र सामग्रियों का विश्लेषण करने वाली विदुषी परिषद्।
तथ्य-जांच व धार्मिक समीक्षा
डॉ. विकास शास्त्री (Dr. Vikas Shastri)
वैदिक संस्कृति व कर्मकांड विधि के विशेषज्ञ विद्वान। पीएचडी (वैदिक अध्ययन)।
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