चंद्र चक्र आगामी तिथियां
श्रावण पूर्णिमा / रक्षाबंधन
भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन और श्रावणी पूर्णिमा।
भाद्रपद अमावस्या
पितृ तर्पण एवं दान-पुण्य के लिए अमावस्या तिथि।
चंद्र गतियों का मानवीय शरीर व मस्तिष्क पर प्रभाव
चंद्रमा की गतियों का हमारे सूक्ष्म शरीर पर गहरा जैविक प्रभाव पड़ता है, जिसे ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व समझ लिया था:
हमारा शरीर ७०% जल से निर्मित है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी पर स्थित सभी जल स्रोतों को अपनी ओर खींचती है, जिससे समुद्र में ज्वार-भाटा (Tides) आता है। इसी प्रकार हमारे मस्तिष्क के भीतर भी जल व रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे भावनाएं उग्र होती हैं। इस दिन उपवास रखने से शरीर में जल स्तर संतुलित रहता है और मानसिक उग्रता शांत होती है।
अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही सीध में होते हैं। ज्योतिष के अनुसार यह संधिकाल पितरों (पूर्वजों) के ऊर्जा प्रवाह को पृथ्वी लोक के सर्वाधिक समीप लाता है। इस दिन किया गया तर्पण, तिल जल दान और पिंड दान पितरों की भटकती आत्मा को परम शांति प्रदान करता है और घर में सुख-समृद्धि लाता है।
चंद्र तिथियां शंका समाधान (FAQs)
१. कोई भी नया व्यवसाय या शुभ कार्य आरम्भ न करें।
२. सुनसान स्थानों या श्मशान भूमि के समीप रात को न जाएं।
३. घर में वाद-विवाद न करें, अन्यथा पितृ दोष बढ़ता है।
४. इस दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) व नशीले पदार्थों का सेवन सर्वथा वर्जित है।
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
खगोल शास्त्र व पंचांग संपादन
भक्तिलोक खगोल पंचांग विभाग (Bhaktilok Lunar Math Wing)
सूर्य सिद्धांत और वैदिक ज्योतिष के चंद्र गणितीय सिद्धांतों के अनुसार पूर्णिमा-अमावस्या काल निर्धारण करने वाली विंग।
तिथि शुद्धि व व्रत समीक्षा
पं. भवानीदत्त पाठक (Pt. Bhawanidutt Pathak)
संयोजक, धर्मसभा वाराणसी। ३४+ वर्षों का तिथि संधिकाल शुद्धि, व्रत निर्णय व श्राद्ध कर्म विधान समीक्षा अनुभव।
तिथियां सत्यापित