श्री विष्णु आरती संग्रह
18+ पावन आरतियाँ

श्री विष्णु की आरतियाँ
पावन स्तुति व भक्ति संग्रह

भक्तिलोक पर भगवान श्री विष्णु जी की समस्त पावन आरतियों, नित्य वंदना, राग-ताल, शास्त्रीय विधि, सरल भावार्थ एवं प्रामाणिक हिंदी लिरिक्स का संपूर्ण संकलन।

शास्त्र-सम्मत एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

शुद्ध पाठ, राग-ताल, शास्त्रीय विधि और सरल भावार्थ सहित आरती संग्रह।

18+ आरतियाँ उपलब्ध
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श्री विष्णु
515 पाठ

ॐ जय जगदीश हरे आरती (Om Jai Jagdish Hare Aarti) – Lyrics in Hindi

भगवान विष्णु की अत्यंत लोकप्रिय आरती 'ॐ जय जगदीश हरे' के संपूर्ण बोल हिंदी में पढ़ें। यह आरती सनातन परंपरा में प्रतिदिन संध्या समय मुख्य रूप से गायी जाती है, जिससे घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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श्री भगवान बद्रीनाथ (भगवान विष्णु)
153 पाठ

श्री बद्रीनाथ जी की आरती - ॐ जय बद्री भगवान, स्वामी जय बद्री भगवान सम्पूर्ण बोल एवं भावार्थ

भगवान श्री बद्रीनाथ जी के पावन धाम की दिव्य आरती 'ॐ जय बद्री भगवान' के सम्पूर्ण बोल और गूढ़ भावार्थ पढ़ें। जानिए इस अलौकिक आरती का पाठ करने से मिलने वाले धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ।

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श्री भगवान विष्णु / जगदीश
34 पाठ

भगवान जगदीश जी की आरती - ॐ जय जगदीश हरे स्वामी जय जगदीश हरे भक्त जनों के संकट दास जनों के संकट

भगवान विष्णु के अवतार श्री जगदीश जी की परम पावन आरती 'ॐ जय जगदीश हरे' के सम्पूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, इतिहास और अनुष्ठानिक विधि का सम्पूर्ण मार्गदर्शिका।

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श्री भगवान बद्रीनाथ / भगवान विष्णु
28 पाठ

श्री बद्रीनाथ जी की पावन आरती - ॐ जय बद्री विशाल, स्वामी जय बद्री विशाल: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान बद्रीनाथ के चरणों में समर्पित 'ॐ जय बद्री विशाल' आरती के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि और धार्मिक महत्व को जानें Bhaktilok.in के इस विशेष गाइड में।

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श्री भगवान हरिहर (विष्णु और शिव)
15 पाठ

श्री हरि हर संयुक्त आरती - ॐ जय हरिहर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान विष्णु (हरि) और भगवान शिव (हर) के संयुक्त स्वरूप 'हरिहर' की इस दिव्य आरती में जगत के पालन और संहार की शक्ति समाहित है। संपूर्ण बोल और भावार्थ पढ़ें।

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श्री भगवान हयग्रीव (भगवान विष्णु का अवतार)
15 पाठ

श्री हयग्रीव भगवान की आरती: ॐ जय हयग्रीव देवा, स्वामी जय हयग्रीव देवा - संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं ज्ञान प्राप्ति की विधि

भगवान हयग्रीव ज्ञान, विद्या और बुद्धि के साक्षात स्वरूप हैं। इस लेख में उनकी आरती, भावार्थ और पूजा की संपूर्ण विधि का विस्तृत वर्णन किया गया है।

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श्री भगवान विष्णु
14 पाठ

श्री विष्णु भगवान की आरती - ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान विष्णु की अत्यंत प्रसिद्ध आरती 'ॐ जय जगदीश हरे' के संपूर्ण बोल, हिंदी भावार्थ, पूजा विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तृत मार्गदर्शन।

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श्री भगवान विष्णु
13 पाठ

श्री वामन अवतार भगवान की पावन आरती - ॐ जय वामन देवा, स्वामी जय वामन देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान विष्णु के पांचवें अवतार, वामन देव की पावन आरती का संपूर्ण संग्रह। इस लेख में वामन अवतार की महिमा, आरती के बोल, पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभों का विस्तृत वर्णन किया गया है।

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श्री भगवान विष्णु (मोहिनी अवतार)
13 पाठ

श्री मोहिनी अवतार भगवान की पावन आरती - ॐ जय मोहिनी देवा, स्वामी जय मोहिनी देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान विष्णु का मोहिनी अवतार जगत को मोह-माया और अमृत का रहस्य समझाने वाला है। इस पावन आरती के माध्यम से प्रभु के इस दिव्य स्वरूप की आराधना करें।

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श्री भगवान विष्णु (हयग्रीव अवतार)
13 पाठ

श्री हयग्रीव भगवान की आरती: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं ज्ञान प्राप्ति की विधि

विद्या, बुद्धि और ज्ञान के अधिष्ठाता भगवान हयग्रीव की आरती का संपूर्ण मार्गदर्शक। जानें विधि, महत्व और फलश्रुति।

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श्री भगवान हयग्रीव (भगवान विष्णु के अवतार)
12 पाठ

श्री हयग्रीव भगवान की पावन आरती - ॐ जय हयग्रीव देवा, स्वामी जय हयग्रीव देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

ज्ञान, बुद्धि और विद्या के अधिष्ठाता भगवान हयग्रीव की पावन आरती का संपूर्ण संग्रह। जानिए विधि, महत्व और भावार्थ।

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श्री भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी जी
11 पाठ

श्री लक्ष्मीनारायण भगवान की आरती - ॐ जय लक्ष्मीनारायण देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

सनातन धर्म में श्री लक्ष्मीनारायण की उपासना सुख, समृद्धि और वैवाहिक सौहार्द का प्रतीक है। प्रस्तुत है श्री लक्ष्मीनारायण भगवान की आरती के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि एवं इसके आध्यात्मिक महत्व की संपूर्ण मार्गदर्शिका।

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श्री श्री शालिग्राम भगवान / भगवान विष्णु
11 पाठ

श्री शालिग्राम भगवान की आरती - ॐ जय शालिग्राम देवा, स्वामी जय शालिग्राम देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री शालिग्राम भगवान की संपूर्ण आरती, सरल हिंदी भावार्थ, पूजा विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी Bhaktilok.in पर पढ़ें।

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श्री भगवान विष्णु (हंसावतार)
10 पाठ

श्री हंसावतार भगवान की पावन आरती - ॐ जय हंस देवा, स्वामी जय हंस देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान विष्णु के हंसावतार की दिव्य आरती, जो ज्ञान, विवेक और मोक्ष प्रदान करने वाली है। इस लेख में आरती के बोल, भावार्थ और पूजा विधि का विस्तृत वर्णन है।

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श्री भगवान विष्णु
9 पाठ

श्री मत्स्य अवतार भगवान की पावन आरती - ॐ जय मत्स्य देवा, स्वामी जय मत्स्य देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान विष्णु के प्रथम मत्स्य अवतार की महिमा का गुणगान करती यह पावन आरती भक्तों को भवसागर से पार लगाने वाली है। इस लेख में मत्स्य आरती के संपूर्ण बोल, अर्थ और पूजा विधि का विस्तृत वर्णन है।

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श्री भगवान विष्णु (कुर्म अवतार)
9 पाठ

श्री कुर्म अवतार भगवान की पावन आरती - ॐ जय कुर्म देवा, स्वामी जय कुर्म देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान विष्णु के कच्छप (कुर्म) अवतार की पावन आरती, भावार्थ और पूजा विधि का विस्तृत मार्गदर्शिका। समुद्र मंथन के आधार स्तंभ प्रभु कुर्म की भक्ति का आनंद लें।

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श्री भगवान विष्णु
9 पाठ

श्री विष्णुकान्त भगवान की पावन आरती - ॐ जय विष्णुकान्त देवा, स्वामी जय विष्णुकान्त देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान विष्णु के पावन स्वरूप 'विष्णुकान्त' की इस दिव्य आरती में संपूर्ण ब्रह्मांड के पालनहार की महिमा का गुणगान किया गया है। यहाँ पढ़ें संपूर्ण बोल और भावार्थ।

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श्री भगवान विष्णु (वराह अवतार)
9 पाठ

श्री वराह भगवान की पावन आरती - ॐ जय वराह देवा, स्वामी जय वराह देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान विष्णु के तृतीय वराह अवतार की पावन आरती 'ॐ जय वराह देवा' के संपूर्ण बोल, भावार्थ, नियम और धार्मिक महत्व का विस्तृत devotional guide।

श्री विष्णु आरती का आध्यात्मिक महत्व एवं शास्त्रीय विधि

सनातन हिंदू धर्म में आरती की परंपरा अत्यंत प्राचीन, पावन और फलदायी मानी गई है। 'आरती' शब्द संस्कृत के 'आरात्रिक' शब्द से उत्पन्न हुआ है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है — 'रात्रि या अंधकार को दूर करने वाला दिव्य प्रकाश'। भगवान श्री विष्णु की नित्य पूजा-अर्चना के समापन पर जब कपूर अथवा शुद्ध देसी घी के पंचमुखी दीपक से आरती की जाती है, तो वह भक्त के हृदय से अज्ञान, भय, और नकारात्मकता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान और भक्ति का दिव्य प्रकाश भर देती है।

"दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥"
अर्थात्: दीपक की ज्योति साक्षात् परब्रह्म और भगवान जनार्दन का स्वरूप है। हे दिव्य ज्योति! आप हमारे समस्त पापों, संतापों और विघ्नों का हरण करें।

१. श्री विष्णु आरती करने के प्रमुख आध्यात्मिक नियम

आरती करते समय कुछ विशेष शास्त्रीय नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक बताया गया है ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके:

  • शुद्धता व पवित्रता: आरती सदैव स्नान उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर, शांत व एकाग्र चित्त से करनी चाहिए।
  • दीपक का चयन: आरती के लिए शुद्ध पीतल, तांबा अथवा चांदी की थाली का उपयोग करें। उसमें शुद्ध देसी गाय के घी का दीपक अथवा भीमसेनी कपूर का उपयोग श्रेष्ठ माना गया है।
  • दक्षिणावर्त घुमाने की विधि: आरती की थाली को भगवान के श्री चरणों में ४ बार, नाभि मंडल में २ बार, मुखारविंद के सामने १ बार और संपूर्ण श्री विग्रह के समक्ष ७ बार दक्षिणावर्त (Clockwise - 'ॐ' की आकृति में) घुमाया जाना चाहिए।

२. आरती के समय शंख व घंटी का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक प्रभाव

आरती के दौरान शंख, घंटा और घड़ियाल बजाने की सुदीर्घ परंपरा है। स्कंद पुराण के अनुसार, घंटी की ध्वनि से निकलने वाली तरंगे वातावरण में उपस्थित नकारात्मक ऊर्जा, विषाणुओं और तामसिक शक्तियों को नष्ट करती हैं। इसके साथ ही जब भक्त एकाग्र होकर आरती का सामूहिक गान करते हैं, तो मंदिर अथवा गृह प्रांगण में सकारात्मक प्राण ऊर्जा (Positive Vibrations) का संचार होता है।

३. आरती ग्रहण करने (आरती लेने) की शास्त्रीय विधि

आरती संपन्न होने के उपरांत आरती की थाली को जल के छींटों से शांत (आचमन) किया जाता है। इसके पश्चात दोनों हाथों की हथेलियों को दीपक की ज्योति के ऊपर हल्के से घुमाकर अपने मस्तक, नेत्रों और हृदय पर लगाया जाता है। इसे 'आरती का तेज ग्रहण करना' कहा जाता है, जिससे अंतःकरण पवित्र और प्रफुल्लित होता है।

श्री विष्णु आरती से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)

भगवान श्री विष्णु जी की आरती नित्य प्रातःकाल दैनिक पूजन के उपरांत तथा संध्याकाल सूर्यास्त के समय गोधूलि वेला में करना सर्वोत्तम माना गया है। विशेष पर्वों अथवा त्योहारों पर महाआरती का आयोजन करना और भी पुण्यदायी होता है।
हाँ, घर में अकेले भी श्रद्धापूर्वक भगवान की आरती की जा सकती है। यदि परिवार के सभी सदस्य मिलकर सामूहिक रूप से आरती करें, तो घर में परस्पर प्रेम, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा का कई गुना अधिक विस्तार होता है।
कपूर जलते समय कोई राख या अवशेष नहीं छोड़ता, जो इस बात का प्रतीक है कि भक्त का अहंकार भगवान की भक्ति में पूर्णतः विलीन हो जाना चाहिए। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध और जीवाणुरहित बनाती है।

श्री विष्णु जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

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