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सनातन दिव्य लिरिक्स

शेरावाली माता आरती (Sheranwali Mata Aarti) – Lyrics in Hindi

शेरावाली माता आरती – यह प्रसिद्ध दुर्गा आरती माँ शेरावाली की महिमा का गुणगान करती है। हिंदी लिरिक्स, अर्थ और विशेष जानकारी सहित।

देव: श्री शेरावाली माता कुल पाठ: 443 बार

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आरती दिव्य तरंग (Ambient Temple Chants)

मंदिर घंटियों और ॐ जप के पावन स्वर के साथ आरती का अनुभव करें।

जय श्री शेरावाली माता आरति लिरिक्स

🙏 जय शेरावाली माता

(Sheranwali Mata Aarti) – प्रसिद्ध दुर्गा आरती

सिंह वाहिनी माता की आरती ॥

📝 आरती विवरण

🎤 परंपरा: सनातन
🏷️ श्रेणी: दुर्गा आरती / शेरावाली माता
📍 भाव: शक्ति, रक्षा, भक्ति

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

जय शेरावाली माता, जय जय शेरावाली माता।
सिंह वाहिनी माता, भक्तों की रखवाली माता॥

जय जय अम्बे भवानी, जय जगदम्बा माता।
त्रिनेत्र धारिणी माता, शुम्भ निशुम्भ संहारी॥

जय शेरावाली माता, जय जय शेरावाली माता।
सिंह वाहिनी माता, भक्तों की रखवाली माता॥

महिषासुर मर्दिनी माता, चण्ड मुण्ड विनाशिनी।
रक्तबीज संहारिणी, जय जय जगत तारिणी॥

जय शेरावाली माता, जय जय शेरावाली माता।
सिंह वाहिनी माता, भक्तों की रखवाली माता॥

हरिद्वार में विराजती, वैष्णो देवी कहलाई।
भक्तों की मनोकामना, पूर्ण करो मैया॥

जय शेरावाली माता, जय जय शेरावाली माता।
सिंह वाहिनी माता, भक्तों की रखवाली माता॥

अष्टभुजा दशभुजा, हाथों में शस्त्र सजाए।
शेर पर सवार हो, रण में दैत्य मारे॥

जय शेरावाली माता, जय जय शेरावाली माता।
सिंह वाहिनी माता, भक्तों की रखवाली माता॥

जो नर श्रद्धा से, यह आरती गाता है।
दुःख दरिद्र मिटाकर, सुख संपत्ति पाता है॥

जय शेरावाली माता, जय जय शेरावाली माता।
सिंह वाहिनी माता, भक्तों की रखवाली माता॥

जय शेरावाली माता, जय जय शेरावाली माता।
सिंह वाहिनी माता, भक्तों की रखवाली माता॥

✍️ परंपरागत आरती (सनातन धर्म)

🙏 आरती का अर्थ और संदेश

शेरावाली माता – माँ दुर्गा का वह स्वरूप जो सिंह (शेर) पर सवार होकर भक्तों की रक्षा करती हैं। यह आरती माँ की महिमा, उनके विभिन्न रूपों और असुरों के संहार का वर्णन करती है।

आरती के माध्यम से भक्त माँ से सुख, शांति और मनोकामनाएँ पूर्ण करने की प्रार्थना करते हैं। यह विशेष रूप से वैष्णो देवी, हरिद्वार और शक्तिपीठों में गाई जाती है।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

शक्ति का प्रतीक: शेरावाली माता शक्ति, साहस और विजय की देवी हैं। इनकी आरती से भक्तों में आत्मविश्वास और नकारात्मक शक्तियों पर विजय का भाव जागता है।

रक्षा का वरदान: जो भी श्रद्धा से यह आरती गाता है, माता उसकी सभी विपत्तियों को दूर करती हैं और उसे संकटों से बचाती हैं।

॥ इति श्रीशेरावाली माता आरती सम्पूर्णम् ॥
॥ जय अम्बे गौरी मैया, जय शेरावाली माता ॥

आरती का शास्त्रीय व आध्यात्मिक महत्व

सनातन हिंदू धर्म में देव पूजा की पूर्णता आरती से होती है। आरती शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के शब्द 'आर्त्रिका' से हुई है, जिसका अर्थ होता है विपत्ति का हरण करना या संकट दूर करना। पूजा-पाठ के दौरान होने वाली त्रुटियों और कमियों को दूर करने के लिए पूजा के अंत में आरती करने का विधान शास्त्रों में निर्दिष्ट किया गया है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, आरती की थाली में सजाया गया दीया ईश्वर की दिव्य ज्योति का प्रतीक होता है। थाली में जलने वाली कपूर या घी की बत्तियां हमारे भीतर छुपे अंधकार (अज्ञान) को मिटाकर प्रकाश (ज्ञान) की ओर जाने का प्रतीक हैं। आरती के समय घंटियों और घड़ियाल की ध्वनि से वातावरण शुद्ध होता है तथा नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

आरती का वैज्ञानिक दृष्टिकोण

वैज्ञानिक शोध के अनुसार, आरती के दौरान जलने वाले कपूर (Camphor) और घी की सुगंध से वायुमंडल में मौजूद सूक्ष्म कीटाणु नष्ट होते हैं। आरती के समय बजने वाले शंख और तांबे की घंटियों की ध्वनि तरंगें मस्तिष्क को शांत करने और मानसिक तनाव दूर करने में सहायक सिद्ध होती हैं।

आरती करने की सही शास्त्रीय विधि (Aarati Vidhi)

हरिभक्ति विलास ग्रंथ के अनुसार, आरती घुमाने का एक निश्चित चक्र होता है, जिसका पालन अत्यंत आवश्यक है:

प्रथम चरण: चरणों की चार बार आरती आरती की थाली को भगवान के श्री चरणों की ओर सबसे पहले चार बार घुमाना चाहिए। यह समर्पण और नमन का सूचक है।
द्वितीय चरण: नाभि की दो बार आरती इसके बाद भगवान की नाभि की ओर दो बार थाली घुमाई जाती है, जो कि सृष्टि के केंद्र की वंदना मानी गई है।
तृतीय चरण: मुखमंडल की एक बार आरती भगवान के मुखारविंद के सामने एक बार आरती घुमाएं, जिससे उनके सौंदर्य और करुणामय स्वरूप का दर्शन होता है।
चतुर्थ चरण: सम्पूर्ण स्वरूप की सात बार आरती अंत में, भगवान के मस्तक से लेकर चरणों तक, सम्पूर्ण शरीर के चारों ओर चक्राकार रूप में सात बार आरती घुमाई जाती है।

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लेखन एवं संकलन

भक्तिलोक शोध मंडल (Bhaktilok Research Council)

सनातन संप्रदायों के शास्त्रों, भजनों और आरतियों का शोध कर प्रामाणिक पाठ उपलब्ध कराने वाली संस्था।

धार्मिक तथ्य-समीक्षा

डॉ. विकास शास्त्री (Dr. Vikas Shastri)

वैदिक संस्कृति व देव साहित्य के विद्वान। पीएचडी (वैदिक संस्कृत साहित्य)।

संदर्भ-आधारित समीक्षा
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ अध्ययन काल: ५ मिनट पढ़ें