वास्तु व नक्षत्र मुहूर्त निर्धारण यंत्र
गृहस्वामी का जन्म नक्षत्र, प्रवेश का प्रकार, मुख्य द्वार की दिशा और अतिथियों की संख्या चुनें। हमारा वैदिक इंजन स्वतः वास्तु स्कोर, शुभ तिथियां, और सामग्री की सटीक मात्रा तैयार करेगा।
वर्ष २०२६ के संपूर्ण शास्त्र सम्मत गृह प्रवेश मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार वर्ष २०२६ में नूतन भवन, सपूर्व एवं जीर्णोद्धार गृह प्रवेश के प्रमुख शुभ मुहूर्त:
२१, २६ व २९ जनवरी २०२६
नक्षत्र: धनिष्ठा, शतभिषा व रोहिणी
योग: अमृत सिद्धि व सिद्ध योग। नूतन गृह कलश प्रवेश।
०६, १२ व १८ फरवरी २०२६
नक्षत्र: हस्त, उत्तराफाल्गुनी व उत्तराभाद्रपद
योग: सर्वार्थ सिद्धि योग। स्थिर लक्ष्मी व शांति प्रदाता।
१९ (अक्षय तृतीया), २२ व २६ अप्रैल
नक्षत्र: रोहिणी, मघा व उत्तराफाल्गुनी
योग: अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त। सर्वसिद्धि योग।
०९, १४ व २२ मई २०२६
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा, पुष्य व अनुराधा
योग: गुरु पुष्य अमृत योग। वास्तु शांति यज्ञ।
०८, १५ व २२ जून २०२६
नक्षत्र: चित्रा, हस्त व उत्तराषाढ़ा
योग: देवशयनी एकादशी पूर्व अंतिम शुभ मुहूर्त।
२१, ३० नव. एवं ०९, १५, २१ दिसम्बर
नक्षत्र: उत्तराभाद्रपद, रोहिणी व मृगशिरा
योग: देवोत्थान एकादशी उपरांत गृह कलश स्थापना।
गृह प्रवेश वास्तु शास्त्र एवं कलश स्थापना विधान
वास्तु शास्त्र के अनुसार, भूमि और भवन का प्रत्येक खंड पंचमहाभूतों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश) की ऊर्जा धाराओं से संचालित होता है। नए भवन में प्रवेश करने से पूर्व 'वास्तु पुरुष' की विधिवत पूजा और शुद्धि करने से नकारात्मक ऊर्जा का निष्कासन होता है और भवन में सकारात्मक प्राण ऊर्जा का संचार होता है।
१. मुख्य द्वार स्वस्तिक एवं तोरण का शास्त्रीय नियम
मुख्य द्वार को घर का मुख (देहली) माना जाता है। गृह प्रवेश के समय कुमकुम और केसर से द्वार पर नौ अंगुल लंबा और नौ अंगुल चौड़ा स्वस्तिक अंकित करें। इसके दोनों ओर 'शुभ' और 'लाभ' लिखें। द्वार पर ताजे आम के पत्तों और गेंदे के फूलों का तोरण बांधें, जो नकारात्मक तरंगों को भीतर आने से रोकता है।
२. कलश प्रवेश एवं प्रथम रसोई (दूध उफनना)
तांबे या मिट्टी के मंगल कलश में गंगाजल, पंचरत्न, दूर्वा, सिक्का व अक्षत डालकर उस पर श्रीफल (नारियल) स्थापित करें। गृहस्वामी दायां पैर और गृहस्वामिनी बायां पैर आगे रखकर कलश सहित गृह प्रवेश करें। प्रवेश के तुरंत बाद रसोई में नया चूल्हा प्रज्वलित कर ताजे गाय के दूध को उबालें। दूध का बर्तन से बाहर उफनना सुख-समृद्धि और ऐश्वर्य के विस्तार का पावन प्रतीक है।
गृह प्रवेश एवं वास्तु संबंधी प्रश्नोत्तर (FAQ)
यह गृह प्रवेश एवं वास्तु गणना विश्वकर्मा प्रकाश, मयमतम्, मुहूर्त चिंतामणि एवं द्रिक गणित पंचांग के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर तैयार की गई है। व्यक्तिगत गृह शांति यज्ञ हेतु स्थानीय कर्मकांडी पंडित से परामर्श अवश्य लें।
वास्तु पुरुष शांति प्रार्थना
नमस्ते वास्तु पुरुषाय भूशय्या भिरत प्रभो।
मद्गृहं धन-धान्यादि समृद्धं कुरु सर्वदा॥
हे वास्तु पुरुष! आप इस नूतन भवन में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्यता का वास स्थापित करें।