पूजा में तांबे के पात्र एवं भीमसेनी कपूर का वैज्ञानिक रहस्य
हिंदू पूजा पद्धति में उपयोग होने वाली प्रत्येक धातु और द्रव्य का एक स्पष्ट वैज्ञानिक और बायो-एनर्जेटिक प्रभाव होता है। आधुनिक धातु विज्ञान भी तांबे के शुद्धिकारक गुणों की पुष्टि करता है।
१. ताम्र पात्र (Copper Vessel) एवं जल शुद्धि
तांबे के लोटे में जब जल रखा जाता है, तो उसमें ओलिगोडायनामिक प्रभाव (Oligodynamic Effect) के कारण जल में मौजूद बैक्टीरिया और हानिकारक सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं। तांबे से चार्ज हुआ जल शरीर में त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) का संतुलन करता है, इसीलिए पूजा के कलश में सदैव तांबे का पात्र प्रयुक्त होता है।
२. तुलसी पत्र चयन एवं निर्माल्य विसर्जन के अनिवार्य नियम
रविवार, द्वादशी तिथि, सूर्य/चंद्र ग्रहण और संक्रांति के दिन तुलसी दल तोड़ना पूर्णतः वर्जित है। पूजा के लिए एक दिन पूर्व तोड़े गए तुलसी दल का प्रयोग करें (तुलसी कभी बासी नहीं मानी जाती)।
कृत्रिम केमिकल कपूर के स्थान पर शुद्ध भीमसेनी कपूर का उपयोग करें। इसका धूम्र फेफड़ों को शुद्ध करता है और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा तरंगों का संचार करता है।
पूजा में चढ़ाए गए फूलों को कभी कूड़ेदान में न डालें। उन्हें किसी पवित्र वृक्ष (पीपल, शमी) की जड़ में अर्पित करें अथवा गमले की मिट्टी में दबाकर जैविक खाद बनने दें।