🙏 ॐ जय शिव ओंकारा

(Om Jai Shiv Omkara) – प्रसिद्ध शिव आरती 2026

परंपरागत आरती ॥

📝 आरती विवरण

🎤 परंपरा: सनातन
🏷️ श्रेणी: शिव आरती / भगवान शिव
📍 भाव: आस्था, समर्पण, मोक्ष

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखता त्रिभुवन जन मोहे॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥

अक्षमाला वनमाला रुंडमाला धारी।
चंदन मृगमद सोह भाले शशिधारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगसंहारकर्ता॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर के मध्ये ये तीनों एका॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥

काशी में विराजे निरंजन निराकार।
ओंकार रूप शिव ही अविनाशी साकार॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥

त्रिगुण शिव जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, अर्धांगी धारा॥

✍️ परंपरागत आरती (सनातन धर्म)

🙏 आरती का अर्थ और संदेश

यह प्रसिद्ध शिव आरती भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और उनकी महिमा का वर्णन करती है। "ॐ जय शिव ओंकारा" – भगवान शिव की जय हो। वे ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव के रूप में त्रिदेव के स्वामी हैं और पार्वती को अर्धांगिनी रूप में धारण करते हैं।

शिव के अनेक रूपों का वर्णन है – एकमुखी, चतुर्मुखी, पंचमुखी; वे हंस, गरुड़ और वृषभ पर सवार हैं। उनके हाथों में कमंडल, चक्र, त्रिशूल है। वे जगत के कर्ता, भर्ता और संहारक हैं।

आरती के अंत में कहा गया है कि जो कोई इस आरती को गाता है, उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह आरती शिव भक्तों के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

महामृत्युंजय स्वरूप: शिव को महामृत्युंजय कहा जाता है – वे मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाले हैं। इस आरती के माध्यम से भक्त उनसे मोक्ष की कामना करते हैं।

त्रिदेव के स्वामी: आरती में ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव को शिव के अर्धांगी रूप में दर्शाया गया है – यह अद्वैत भाव को प्रकट करता है।

सृष्टि का संचालन: शिव सृष्टि के रचयिता, पालनहार और संहारक हैं। यह आरती उनके इस त्रिकाल व्यापी स्वरूप का बखान करती है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

शिव निराकार और साकार दोनों हैं। वे भक्तों पर सदैव कृपा बरसाते हैं। इस आरती को गाने से भक्त के सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे अंततः मोक्ष की प्राप्ति होती है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह आरती उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो भगवान शिव की कृपा से अपने जीवन में सुख-शांति और मोक्ष की कामना रखते हैं।

🙏 ॐ नमः शिवाय ।। महादेवाय नमः ।।

॥ इति श्रीशिवारती सम्पूर्णम् ॥
॥ ॐ जय शिव ओंकारा ।।