१. सत्ययुग / कृतयुग (Satya Yuga – Age of Truth)
सत्ययुग सनातन कालक्रम का प्रथम एवं सर्वाधिक पवित्र युग है। इस युग में अधर्म का लेशमात्र भी अस्तित्व नहीं था। मनुष्य अपनी आत्मिक चेतना से सीधे ब्रह्म से जुड़े रहते थे। वायु और सूर्य से ऊर्जा प्राप्त करने की क्षमता तथा तपोबल ही जीवन का मुख्य आधार था।
युगांतकारी प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएँ (Major Milestones):
- ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि का संकल्प एवं मानस पुत्रों (सनकादि ऋषि, सप्तर्षि) का प्राकट्य।
- हयग्रीव द्वारा वेदों की चोरी पर भगवान विष्णु का प्रथम मत्स्य अवतार एवं वैवस्वत मनु की रक्षा।
- देव-दानव समुद्र मंथन के समय कच्छप (कूर्म) अवतार और १४ दिव्य रत्नों का प्राकट्य।
- हिरण्याक्ष के अत्याचार से भूदेवी के उद्धार हेतु भगवान वराह का प्राकट्य।
- भक्त प्रह्लाद की रक्षा एवं अधर्मी हिरण्यकशिपु के संहार हेतु भगवान नृसिंह का अवतार।
खगोलीय संदर्भों में इस काल को सौरमंडल के प्रारंभिक संतुलन और भूगर्भीय विकास का कालखंड माना जाता है, जिसका विस्तृत उल्लेख सूर्य सिद्धान्त में है।