सोम प्रदोष व्रत (पौष शुक्ल)
आराध्य: भगवान शिव एवं माता पार्वती
प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना से स्वास्थ्य, शांति व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भौम प्रदोष व्रत (माघ कृष्ण)
आराध्य: भगवान भोलेनाथ व मंगल देव
कर्ज मुक्ति, रक्त विकार से सुरक्षा और पराक्रम वृद्धि हेतु अत्यंत फलदायी।
शनि प्रदोष व्रत (माघ शुक्ल)
आराध्य: भगवान चंद्रशेखर
संतान सुख, पितृ शांति और शनि दोष के निवारण हेतु विशेष प्रशस्त।
भौम प्रदोष व्रत (फाल्गुन कृष्ण)
आराध्य: उमा-महेश्वर
समस्त व्याधियों और ऋणों से मुक्ति दिलाने वाला पावन व्रत।
गुरु प्रदोष व्रत (चैत्र शुक्ल)
आराध्य: महादेव शिव
ज्ञान, उच्च पद, पारिवारिक सौहार्द और गुरु कृपा की प्राप्ति।
माघ मासिक शिवरात्रि
आराध्य: भगवान शिव (लिंगोद्भव)
निशीथ काल में भगवान शिव का रुद्राभिषेक समस्त पापों का संहार करता है।
महाशिवरात्रि २०२६ (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी)
आराध्य: देवाधिदेव महादेव व माँ पार्वती
वर्ष का सर्वोच्च शैव महापर्व। चारों प्रहर की साधना से धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति।
फाल्गुन मासिक शिवरात्रि
आराध्य: भगवान नीलकंठ
मनोवांछित जीवनसाथी की प्राप्ति और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति।
चैत्र मासिक शिवरात्रि
आराध्य: भगवान सदाशिव
रोगों से मुक्ति एवं मानसिक शांति हेतु विशेष रुद्राभिषेक।
सावन मासिक शिवरात्रि
आराध्य: श्रावणेश्वर महादेव
श्रावण मास की शिवरात्रि पर गंगाजल से जलाभिषेक करने से कोटि यज्ञों का फल मिलता है।
संकष्टी चतुर्थी / सकट चौथ (माघ कृष्ण)
आराध्य: भगवान गणेश (लंबोदर)
संतान के दीर्घायु और संकटों के हरण हेतु माताएं यह निर्जला व्रत रखती हैं। चंद्रोदय पर अर्घ्य।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी (फाल्गुन कृष्ण)
आराध्य: द्विजप्रिय गणेश
बुद्धि, विद्या और आर्थिक बाधाओं के निवारण हेतु।
भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी (चैत्र कृष्ण)
आराध्य: भालचंद्र गणेश
मानसिक तनाव से मुक्ति और निर्णय क्षमता में वृद्धि।
विकट संकष्टी चतुर्थी (वैशाख कृष्ण)
आराध्य: विकट महागणपति
कठिन से कठिन विपत्ति से रक्षा और शत्रु बाधा शमन।
एकदंत संकष्टी चतुर्थी (ज्येष्ठ कृष्ण)
आराध्य: एकदंत गणेश (अंगारकी योग)
मंगलवार को पड़ने वाली अंगारकी चतुर्थी समस्त मनोकामनाओं को सिद्ध करती है।
पौष पूर्णिमा व्रत (शाकंभरी जयंती)
आराध्य: भगवान सत्यनारायण व माँ शाकंभरी
माघ स्नान का संकल्प, सत्यनारायण कथा व अन्न-वस्त्र दान।
माघी पूर्णिमा व्रत (माघ स्नान समापन)
आराध्य: भगवान विष्णु व तीर्थराज प्रयाग
त्रिवेणी संगम या पवित्र नदियों में स्नान से मोक्ष और पितृ तृप्ति।
मौनी अमावस्या (माघ अमावस्या)
आराध्य: ऋषि मनु व भगवान नारायण
मौन व्रत धारण कर आत्म-मंथन व पवित्र नदी स्नान का महापर्व।
फाल्गुनी पूर्णिमा (होलिका दहन व लक्ष्मी जयंती)
आराध्य: माँ लक्ष्मी व श्रीहरि विष्णु
होलिका पूजन, रात्रि जागरण एवं लक्ष्मी स्तोत्र पाठ से दरिद्रता का नाश।
चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती)
आराध्य: बजरंगबली हनुमान जी
सुंदरकांड पाठ, सिंदूर अर्पण एवं बल-बुद्धि-विद्या की प्राप्ति।
चैत्र नवरात्रि घटस्थापना व नवदिवसीय व्रत
आराध्य: माँ नवदुर्गा (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री)
सनातन नववर्षारंभ एवं नौ दिव्य शक्तियों की साधना।
श्री राम नवमी व्रत
आराध्य: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम
दोपहर १२:०० बजे प्रभु श्री राम का प्राकट्योत्सव एवं उपवास।
श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत
आराध्य: भगवान श्री कृष्ण (बालगोपाल)
मध्यरात्रि १२:०० बजे कान्हा के जन्मोत्सव तक निर्जला/फलाहारी उपवास।
करवा चौथ व्रत (कर्क चतुर्थी)
आराध्य: माँ करवा, भगवान शिव-पार्वती व चंद्र देव
पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य व गृहस्थ सुख हेतु निर्जला व्रत।
छठ महापर्व (सूर्य षष्ठी व्रत)
आराध्य: भगवान भास्कर (सूर्य देव) व षष्ठी मैया
३६ घंटे का निर्जला कठिन तप। अस्ताचलगामी व उदीयमान सूर्य को अर्घ्य।
वर्ष २०२६ के मुख्य व्रत-पर्व सारणी
दैनिक पंचांग एवं चंद्र गति के अनुसार वर्ष २०२६ के प्रमुख मासिक उपवासों की संक्षिप्त तिथिवार सूची:
| व्रत / पर्व का नाम | श्रेणी | दिनांक (२०२६) | आराध्य देव |
|---|---|---|---|
| सोम प्रदोष व्रत (पौष शुक्ल) | प्रदोष व्रत | ३१ जनवरी २०२६, शनिवार | भगवान शिव एवं माता पार्वती |
| भौम प्रदोष व्रत (माघ कृष्ण) | प्रदोष व्रत | १४ फरवरी २०२६, शनिवार | भगवान भोलेनाथ व मंगल देव |
| शनि प्रदोष व्रत (माघ शुक्ल) | प्रदोष व्रत | ०१ मार्च २०२६, रविवार | भगवान चंद्रशेखर |
| भौम प्रदोष व्रत (फाल्गुन कृष्ण) | प्रदोष व्रत | १६ मार्च २०२६, सोमवार | उमा-महेश्वर |
| गुरु प्रदोष व्रत (चैत्र शुक्ल) | प्रदोष व्रत | २९ अप्रैल २०२६, बुधवार | महादेव शिव |
| माघ मासिक शिवरात्रि | मासिक शिवरात्रि | १६ जनवरी २०२६, शुक्रवार | भगवान शिव (लिंगोद्भव) |
| महाशिवरात्रि २०२६ (फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी) | प्रमुख महाव्रत | १५ फरवरी २०२६, रविवार | देवाधिदेव महादेव व माँ पार्वती |
| फाल्गुन मासिक शिवरात्रि | मासिक शिवरात्रि | १७ मार्च २०२६, मंगलवार | भगवान नीलकंठ |
| चैत्र मासिक शिवरात्रि | मासिक शिवरात्रि | १५ अप्रैल २०२६, बुधवार | भगवान सदाशिव |
| सावन मासिक शिवरात्रि | मासिक शिवरात्रि | ११ अगस्त २०२६, मंगलवार | श्रावणेश्वर महादेव |
| संकष्टी चतुर्थी / सकट चौथ (माघ कृष्ण) | संकष्टी चतुर्थी | ०७ जनवरी २०२६, बुधवार | भगवान गणेश (लंबोदर) |
| द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी (फाल्गुन कृष्ण) | संकष्टी चतुर्थी | ०६ फरवरी २०२६, शुक्रवार | द्विजप्रिय गणेश |
| भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी (चैत्र कृष्ण) | संकष्टी चतुर्थी | ०८ मार्च २०२६, रविवार | भालचंद्र गणेश |
| विकट संकष्टी चतुर्थी (वैशाख कृष्ण) | संकष्टी चतुर्थी | ०६ अप्रैल २०२६, सोमवार | विकट महागणपति |
| एकदंत संकष्टी चतुर्थी (ज्येष्ठ कृष्ण) | संकष्टी चतुर्थी | ०५ मई २०२६, मंगलवार | एकदंत गणेश (अंगारकी योग) |
| पौष पूर्णिमा व्रत (शाकंभरी जयंती) | पूर्णिमा / अमावस्या | ०३ जनवरी २०२६, शनिवार | भगवान सत्यनारायण व माँ शाकंभरी |
| माघी पूर्णिमा व्रत (माघ स्नान समापन) | पूर्णिमा / अमावस्या | ०१ फरवरी २०२६, रविवार | भगवान विष्णु व तीर्थराज प्रयाग |
| मौनी अमावस्या (माघ अमावस्या) | पूर्णिमा / अमावस्या | १८ जनवरी २०२६, रविवार | ऋषि मनु व भगवान नारायण |
| फाल्गुनी पूर्णिमा (होलिका दहन व लक्ष्मी जयंती) | पूर्णिमा / अमावस्या | ०३ मार्च २०२६, मंगलवार | माँ लक्ष्मी व श्रीहरि विष्णु |
| चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती) | पूर्णिमा / अमावस्या | ०२ अप्रैल २०२६, गुरुवार | बजरंगबली हनुमान जी |
| चैत्र नवरात्रि घटस्थापना व नवदिवसीय व्रत | प्रमुख महाव्रत | १९ मार्च २०२६, गुरुवार | माँ नवदुर्गा (शैलपुत्री से सिद्धिदात्री) |
| श्री राम नवमी व्रत | प्रमुख महाव्रत | २७ मार्च २०२६, शुक्रवार | मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम |
| श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत | प्रमुख महाव्रत | ०४ सितम्बर २०२६, शुक्रवार | भगवान श्री कृष्ण (बालगोपाल) |
| करवा चौथ व्रत (कर्क चतुर्थी) | प्रमुख महाव्रत | २९ अक्टूबर २०२६, गुरुवार | माँ करवा, भगवान शिव-पार्वती व चंद्र देव |
| छठ महापर्व (सूर्य षष्ठी व्रत) | प्रमुख महाव्रत | १५ नवम्बर २०२६, रविवार | भगवान भास्कर (सूर्य देव) व षष्ठी मैया |
उपवास का आध्यात्मिक व जैविक विज्ञान (Autophagy & Detox)
सनातन दर्शन में केवल भोजन त्यागने को उपवास नहीं कहा गया है। 'उप' का अर्थ है 'समीप' और 'वास' का अर्थ है 'रहना'—अर्थात अपनी इंद्रियों, विचारों और खान-पान को नियंत्रित कर अपनी चेतना को परमात्मा के समीप स्थापित करना ही वास्तविक उपवास कहलाता है।
१. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और ऑटोफैगी (Autophagy)
आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान से प्रमाणित हो चुका है कि जब मानव शरीर १२ से २४ घंटे तक अल्पाहार या उपवास में रहता है, तो शरीर में उपस्थित स्वस्थ कोशिकाएं आंतरिक रूप से संचित मृत कोशिकाओं, विषाक्त पदार्थों (Toxins) और कैंसरकारी तत्वों को खाकर नष्ट कर देती हैं। इस जैविक प्रक्रिया को 'ऑटोफैगी' कहा जाता है, जिसके लिए जापानी वैज्ञानिक योशिनोरी ओहसुमी को वर्ष २०१६ में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व मासिक उपवास (प्रदोष, एकादशी, शिवरात्रि) को धार्मिक कर्तव्य से जोड़कर समाज को स्वतः निरोगी रखने की व्यवस्था की थी।
२. पंच प्राण व जठराग्नि विश्राम
नियमित भोजन करने से शरीर की जठराग्नि और पाचन तंत्र निरंतर कार्य में व्यस्त रहते हैं। पक्ष में १-२ दिन उपवास रखने से जठराग्नि को विश्राम मिलता है, जिससे शरीर अपनी आंतरिक प्राणशक्ति (Vital Energy) को रोगों के निवारण, मानसिक स्पष्टता और आध्यात्मिक ध्यान में केंद्रित कर पाता है।
व्रत संकल्प एवं सात्विक फलाहार नियम
क्या ग्रहण करें (सात्विक आहार)
- ताजे मौसमी फल, नारियल पानी, नींबू पानी।
- कट्टू का आटा, सिंघाड़े का आटा, राजगिरा (चौलाई)।
- साबूदाना, मखाना खीर, गाय का शुद्ध दूध व दही।
- सेंधा नमक (Rock Salt), काली मिर्च व भुना जीरा।
क्या वर्जित है (तामसिक अन्न)
- अनाज (गेहूं, चावल, मक्का, दालें) एवं साधारण नमक।
- लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा व अन्य तामसिक पदार्थ।
- क्रोध, असत्य भाषण, परनिंदा और कलह।
- दिन में सोना और ब्रह्मचर्य का उल्लंघन।
व्रत एवं उपवास संबंधी सामान्य प्रश्नोत्तर (FAQ)
यह व्रत-उपवास अनुक्रमणिका निर्णय सिंधु, धर्मसिंधु, स्कंद पुराण एवं द्रिक गणित पंचांग के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर तैयार की गई है। स्थानीय सूर्योदय एवं चंद्रोदय समय के आधार पर व्रत पारण समय में कुछ मिनटों का सूक्ष्म अंतर संभव है।
सर्वपाप नाशक गायत्री महामंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्॥
व्रत एवं उपवास के दिन ब्रह्ममुहूर्त में गायत्री मंत्र का जप करने से आत्मिक तेज और सकारात्मक ऊर्जा में असीम वृद्धि होती है।