श्री शिव आरती संग्रह
20+ पावन आरतियाँ

श्री शिव की आरतियाँ
पावन स्तुति व भक्ति संग्रह

भक्तिलोक पर भगवान श्री शिव जी की समस्त पावन आरतियों, नित्य वंदना, राग-ताल, शास्त्रीय विधि, सरल भावार्थ एवं प्रामाणिक हिंदी लिरिक्स का संपूर्ण संकलन।

शास्त्र-सम्मत एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

शुद्ध पाठ, राग-ताल, शास्त्रीय विधि और सरल भावार्थ सहित आरती संग्रह।

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श्री शिव
484 पाठ

ॐ जय शिव ओंकारा आरती (Om Jai Shiv Omkara Aarti) – Lyrics in Hindi

पढिए प्रसिद्ध शिव आरती 'ॐ जय शिव ओंकारा' हिंदी लिरिक्स और अर्थ के साथ। भगवान शिव की कृपा प्राप्ति के लिए यह आरती अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

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श्री भगवान शिव
47 पाठ

श्री महामृत्युंजय भगवान की आरती - ॐ जय महामृत्युंजय देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के महामृत्युंजय स्वरूप की अराधना और 'ॐ जय महामृत्युंजय देवा' आरती के संपूर्ण बोल, भावार्थ तथा पूजा विधि का विस्तृत मार्गदर्शिका।

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श्री भगवान शिव
45 पाठ

भगवान शिव जी की आरती - ॐ जय शिव ओंकारा प्रभु हर शिव ओंकारा ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा

भगवान शिव की अत्यंत लोकप्रिय आरती 'ॐ जय शिव ओंकारा' के संपूर्ण बोल, भावार्थ, राग और आरती करने की शास्त्रीय विधि की विस्तृत जानकारी।

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श्री भगवान शिव
40 पाठ

श्री भगवान भोलेनाथ की आरती - जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव की पावन आरती 'जय शिव ओंकारा' के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व को जानें।

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श्री भगवान शिव
39 पाठ

श्री भुवनेश्वर महादेव आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के स्वरूप भुवनेश्वर महादेव की इस पवित्र आरती के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ और शास्त्रीय पूजा विधि के साथ आध्यात्मिक लाभ जानें।

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श्री भगवान शिव
39 पाठ

भगवान शिव जी की आरती - ॐ जय शिव ओंकारा प्रभु हर शिव ओंकारा ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा

भगवान शिव की सर्वप्रिय आरती 'ॐ जय शिव ओंकारा' का प्रामाणिक पाठ, प्रत्येक पद का दार्शनिक एवं आध्यात्मिक अर्थ, राग-ताल विवरण तथा आरती नीराजन की शास्त्रीय पूजन विधि।

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श्री भगवान शिव
32 पाठ

श्री भुवनेश्वर महादेव जी की आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा, स्वामी जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के त्रैलोक्य रक्षक स्वरूप श्री भुवनेश्वर महादेव जी की संपूर्ण आरती, भावार्थ और शास्त्रीय पूजा विधि का आनंद लें।

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श्री भगवान शिव
28 पाठ

श्री भुवनेश्वर महादेव जी की पावन प्रातः आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा, स्वामी जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के त्रैलोक्य रक्षक स्वरूप श्री भुवनेश्वर महादेव जी की पावन प्रातः आरती के संपूर्ण बोल, भावार्थ और विस्तृत पूजा विधि यहाँ प्राप्त करें।

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श्री भगवान शिव
28 पाठ

श्री नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान की पावन आरती - ॐ जय नागेश्वर देवा, स्वामी जय नागेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के दसवें ज्योतिर्लिंग श्री नागेश्वर की पावन आरती का संपूर्ण संकलन, भावार्थ, पूजा विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी।

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28 पाठ

श्री भुवनेश्वर महादेव जी की पावन संध्या आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा, स्वामी जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के त्रैलोक्यनाथ रूप श्री भुवनेश्वर महादेव की पावन संध्या आरती के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व को जानें।

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श्री भगवान शिव
24 पाठ

श्री बालगंगाधर एवं बटेश्वर महादेव आरती - ॐ जय बटेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के पावन और जागृत स्वरूप श्री बालगंगाधर एवं बटेश्वर महादेव की संपूर्ण आरती, हिंदी भावार्थ, पूजा विधि और इसके आध्यात्मिक महत्व का विस्तृत मार्गदर्शन।

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श्री भगवान शिव
23 पाठ

श्री भुवनेश्वर महादेव आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा, स्वामी जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के त्रैलोक्यनाथ स्वरूप श्री भुवनेश्वर महादेव की संपूर्ण आरती, सरल हिंदी भावार्थ, और वैदिक पूजा विधि के साथ आध्यात्मिक लाभ जानें।

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श्री भगवान शिव
20 पाठ

श्री भुवनेश्वर महादेव जी की पावन आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के पावन और जागृत स्वरूप श्री भुवनेश्वर महादेव जी की आरती के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व का संपूर्ण मार्गदर्शिका।

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श्री भगवान शिव और माता पार्वती
10 पाठ

श्री अर्धनारीश्वर भगवान की पावन आरती - ॐ जय अर्धनारीश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव और माता शक्ति के अद्वितीय और अविभाज्य स्वरूप श्री अर्धनारीश्वर की पावन आरती, संपूर्ण बोल, सरल भावार्थ और विधि-विधान के साथ पढ़ें।

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श्री भगवान हरिहर (विष्णु और शिव)
10 पाठ

श्री हरि हर संयुक्त आरती - ॐ जय हरिहर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान विष्णु (हरि) और भगवान शिव (हर) के संयुक्त स्वरूप 'हरिहर' की इस दिव्य आरती में जगत के पालन और संहार की शक्ति समाहित है। संपूर्ण बोल और भावार्थ पढ़ें।

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श्री भगवान शिव
9 पाठ

श्री भोलेनाथ जी की पावन आरती - जय शिव ओमकारा, स्वामी जय शिव ओमकारा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव की अत्यंत लोकप्रिय और पवित्र आरती 'जय शिव ओमकारा' के सम्पूर्ण बोल, गहन भावार्थ, पूजा विधि और आध्यात्मिक लाभ के साथ विस्तृत गाइड।

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श्री भगवान शिव
8 पाठ

श्री भुवनेश्वर महादेव जी की पावन आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा, स्वामी जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के त्रैलोक्य स्वामी रूप 'श्री भुवनेश्वर महादेव' की पावन आरती। यहाँ पढ़ें संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि, आवश्यक सामग्री और इसके अलौकिक आध्यात्मिक लाभ।

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श्री भगवान भुवनेश्वर (लिंगराज शिव)
8 पाठ

श्री भुवनेश्वर भगवान की आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

समस्त त्रिभुवन के स्वामी देवाधिदेव भगवान भुवनेश्वर की यह पावन आरती असीम शांति, सुख-समृद्धि और मोक्ष प्रदान करने वाली है। यहाँ पढ़ें आरती के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ और शास्त्रीय विधि।

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श्री भगवान शिव
7 पाठ

श्री भुवनेश्वर महादेव जी की पावन सायं आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा, स्वामी जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के एक अत्यंत पावन और कल्याणकारी स्वरूप श्री भुवनेश्वर महादेव जी की सायं कालीन आरती, संपूर्ण बोल, सरल भावार्थ और शास्त्रीय पूजा विधि के साथ पढ़ें।

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श्री भगवान शिव
5 पाठ

श्री भुवनेश्वर महादेव जी की पावन रात्रि आरती - ॐ जय भुवनेश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव के पावन स्वरूप श्री भुवनेश्वर महादेव जी की रात्रि आरती के संपूर्ण बोल, सरल भावार्थ और विधि-विधान सहित संपूर्ण मार्गदर्शिका।

श्री शिव आरती का आध्यात्मिक महत्व एवं शास्त्रीय विधि

सनातन हिंदू धर्म में आरती की परंपरा अत्यंत प्राचीन, पावन और फलदायी मानी गई है। 'आरती' शब्द संस्कृत के 'आरात्रिक' शब्द से उत्पन्न हुआ है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है — 'रात्रि या अंधकार को दूर करने वाला दिव्य प्रकाश'। भगवान श्री शिव की नित्य पूजा-अर्चना के समापन पर जब कपूर अथवा शुद्ध देसी घी के पंचमुखी दीपक से आरती की जाती है, तो वह भक्त के हृदय से अज्ञान, भय, और नकारात्मकता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान और भक्ति का दिव्य प्रकाश भर देती है।

"दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥"
अर्थात्: दीपक की ज्योति साक्षात् परब्रह्म और भगवान जनार्दन का स्वरूप है। हे दिव्य ज्योति! आप हमारे समस्त पापों, संतापों और विघ्नों का हरण करें।

१. श्री शिव आरती करने के प्रमुख आध्यात्मिक नियम

आरती करते समय कुछ विशेष शास्त्रीय नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक बताया गया है ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके:

  • शुद्धता व पवित्रता: आरती सदैव स्नान उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर, शांत व एकाग्र चित्त से करनी चाहिए।
  • दीपक का चयन: आरती के लिए शुद्ध पीतल, तांबा अथवा चांदी की थाली का उपयोग करें। उसमें शुद्ध देसी गाय के घी का दीपक अथवा भीमसेनी कपूर का उपयोग श्रेष्ठ माना गया है।
  • दक्षिणावर्त घुमाने की विधि: आरती की थाली को भगवान के श्री चरणों में ४ बार, नाभि मंडल में २ बार, मुखारविंद के सामने १ बार और संपूर्ण श्री विग्रह के समक्ष ७ बार दक्षिणावर्त (Clockwise - 'ॐ' की आकृति में) घुमाया जाना चाहिए।

२. आरती के समय शंख व घंटी का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक प्रभाव

आरती के दौरान शंख, घंटा और घड़ियाल बजाने की सुदीर्घ परंपरा है। स्कंद पुराण के अनुसार, घंटी की ध्वनि से निकलने वाली तरंगे वातावरण में उपस्थित नकारात्मक ऊर्जा, विषाणुओं और तामसिक शक्तियों को नष्ट करती हैं। इसके साथ ही जब भक्त एकाग्र होकर आरती का सामूहिक गान करते हैं, तो मंदिर अथवा गृह प्रांगण में सकारात्मक प्राण ऊर्जा (Positive Vibrations) का संचार होता है।

३. आरती ग्रहण करने (आरती लेने) की शास्त्रीय विधि

आरती संपन्न होने के उपरांत आरती की थाली को जल के छींटों से शांत (आचमन) किया जाता है। इसके पश्चात दोनों हाथों की हथेलियों को दीपक की ज्योति के ऊपर हल्के से घुमाकर अपने मस्तक, नेत्रों और हृदय पर लगाया जाता है। इसे 'आरती का तेज ग्रहण करना' कहा जाता है, जिससे अंतःकरण पवित्र और प्रफुल्लित होता है।

श्री शिव आरती से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)

भगवान श्री शिव जी की आरती नित्य प्रातःकाल दैनिक पूजन के उपरांत तथा संध्याकाल सूर्यास्त के समय गोधूलि वेला में करना सर्वोत्तम माना गया है। विशेष पर्वों अथवा त्योहारों पर महाआरती का आयोजन करना और भी पुण्यदायी होता है।
हाँ, घर में अकेले भी श्रद्धापूर्वक भगवान की आरती की जा सकती है। यदि परिवार के सभी सदस्य मिलकर सामूहिक रूप से आरती करें, तो घर में परस्पर प्रेम, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा का कई गुना अधिक विस्तार होता है।
कपूर जलते समय कोई राख या अवशेष नहीं छोड़ता, जो इस बात का प्रतीक है कि भक्त का अहंकार भगवान की भक्ति में पूर्णतः विलीन हो जाना चाहिए। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध और जीवाणुरहित बनाती है।

श्री शिव जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

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