श्री माता आरती संग्रह
23+ पावन आरतियाँ

श्री माता की आरतियाँ
पावन स्तुति व भक्ति संग्रह

भक्तिलोक पर भगवान श्री माता जी की समस्त पावन आरतियों, नित्य वंदना, राग-ताल, शास्त्रीय विधि, सरल भावार्थ एवं प्रामाणिक हिंदी लिरिक्स का संपूर्ण संकलन।

शास्त्र-सम्मत एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

शुद्ध पाठ, राग-ताल, शास्त्रीय विधि और सरल भावार्थ सहित आरती संग्रह।

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श्री शेरावाली माता
666 पाठ

शेरावाली माता आरती (Sheranwali Mata Aarti) – Lyrics in Hindi

जय शेरावाली माता आरती हिंदी लिरिक्स पढ़ें। माँ दुर्गा के स्वरूप सिंह वाहिनी की यह पावन आरती भक्तों को शक्ति, रक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है। संदर्भ एवं व्याख्या सहित संपूर्ण पाठ यहाँ देखें।

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श्री माता गंगा
89 पाठ

श्री गंगा जी की आरती - ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता (संपूर्ण बोल एवं भावार्थ)

श्री गंगा जी की प्रसिद्ध आरती 'ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता' के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पौराणिक महत्व और पूजा की विधि को विस्तार से जानें।

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श्री माँ दुर्गा / विंध्यवासिनी माता
36 पाठ

श्री विंध्यवासिनी माता की आरती - जय विंध्यवासिनी माता, मैया जय विंध्यवासिनी माता: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

माँ विंध्यवासिनी की पावन आरती संपूर्ण बोल, भावार्थ, पूजा विधि और इसके अलौकिक आध्यात्मिक महत्व के साथ पढ़ें।

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श्री भगवान शिव और माता पार्वती
25 पाठ

श्री अर्धनारीश्वर भगवान की पावन आरती - ॐ जय अर्धनारीश्वर देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

भगवान शिव और माता शक्ति के अद्वितीय और अविभाज्य स्वरूप श्री अर्धनारीश्वर की पावन आरती, संपूर्ण बोल, सरल भावार्थ और विधि-विधान के साथ पढ़ें।

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श्री माता लक्ष्मी
25 पाठ

माता लक्ष्मी जी की आरती - ॐ जय लक्ष्मी माता तुमको निसदिन सेवत हर विष्णु विधाता सम्पूर्ण विधि

सनातन धर्म में माता लक्ष्मी को धन, ऐश्वर्य और सौभाग्य की देवी माना गया है। 'ॐ जय लक्ष्मी माता' आरती के पाठ से साधक के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।

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श्री माता तुलसी
24 पाठ

माता तुलसी जी की आरती - जय जय तुलसी माता मैया जय तुलसी माता सब जग की सुख दाता वर दाता

माता तुलसी जी की आरती 'जय जय तुलसी माता' का संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ और पूजन विधि पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित प्रस्तुत यह पावन आरती तुलसी विवाह और एकादशी व्रत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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श्री माता लक्ष्मी
19 पाठ

श्री महालक्ष्मी अष्टकम एवं महालक्ष्मी आरती - ॐ जय लक्ष्मी माता सम्पूर्ण बोल एवं भावार्थ

सनातन संस्कृति में धन, वैभव, ऐश्वर्य और सौभाग्य की अधिष्ठाता माता महालक्ष्मी की उपासना का विशेष महत्व है। यहाँ पढ़ें संपूर्ण महालक्ष्मी अष्टकम, महालक्ष्मी आरती 'ॐ जय लक्ष्मी माता', और उनका विस्तृत भावार्थ।

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श्री माता सरस्वती
18 पाठ

माता सरस्वती जी की आरती - जय सरस्वती माता मैया जय सरस्वती माता सद्गुण वैभव शालिनी त्रिभुवन विख्याता

विद्या, कला और संगीत की अधिष्ठात्री देवी माता सरस्वती की प्रसिद्ध आरती 'जय सरस्वती माता' के सम्पूर्ण बोल, सरल भावार्थ और शास्त्रीय विधान का विस्तृत पाठ।

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श्री माता कामधेनु
17 पाठ

श्री कामधेनु माता की पावन आरती - ॐ जय सुरभि माता, मैया जय कामधेनु माता: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

सनातन धर्म में गौ माता को साक्षात देवी स्वरूप माना गया है। कामधेनु माता की आरती करने से सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस लेख में आरती के संपूर्ण बोल और विधि का वर्णन है।

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श्री श्री राधिका माता
17 पाठ

श्री राधिका माता की पावन आरती - जय राधिका माता, मैया जय राधिका माता: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री राधिका माता की पावन आरती के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि और आध्यात्मिक महत्व को जानें Bhaktilok.in के इस विस्तृत गाइड में।

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श्री माता त्रिपुरसुंदरी (मां ललिता राजराजेश्वरी)
17 पाठ

श्री त्रिपुरसुरा सुंदरी माता आरती: मां राजराजेश्वरी की संपूर्ण आरती और विधान

महाविद्या मां ललिता त्रिपुरसुंदरी की यह दिव्य आरती श्रीविद्या साधना, ऐश्वर्य, मानसिक शांति और मोक्ष की प्रदायिका है। यहाँ आरती के प्रामाणिक बोल, गूढ़ तांत्रिक भावार्थ और शास्त्रीय थाली चालन विधि का विस्तृत संकलन है।

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श्री यमुना माता एवं एकादशी माता
17 पाठ

यमुना माता सर्व संकट निवारक शक्तिपीठ आरती: ॐ जय एकादशी माता मैया जय एकादशी माता का शुद्ध पाठ एवं भावार्थ

यमुना माता और एकादशी माता के पावन चरणों में समर्पित इस सर्व संकट निवारक आरती के माध्यम से साधक अपने जीवन के समस्त कष्टों का नाश कर परम मोक्ष प्राप्त कर सकते हैं। यहाँ संपूर्ण पाठ, भावार्थ और विधि दी गई है।

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श्री एकादशी माता
17 पाठ

ॐ जय एकादशी माता (एकादशी व्रत की मंगल आरती) (विशेष संस्करण #112)

एकादशी व्रत और माँ एकादशी की महिमा का गुणगान करती यह पावन आरती साधकों को विष्णु लोक की प्राप्ति और समस्त पापों से मुक्ति दिलाती है। यहाँ पढ़ें संपूर्ण आरती, अर्थ और विधान।

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श्री संतोषी माता
17 पाठ

माता संतोषी जी की आरती - जय संतोषी माता मैया जय संतोषी माता अपने सेवक जन को सुख सम्पति दाता

माँ संतोषी की महिमा और उनकी पवित्र आरती के संपूर्ण बोल, भावार्थ और अनुष्ठानिक विधि का विस्तृत मार्गदर्शिका।

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श्री माता गायत्री
15 पाठ

माता गायत्री जी की आरती - जयति जय गायत्री माता जयति जय गायत्री माता जो तुमको ध्यावे सो सुख पावे

माता गायत्री जी की अत्यंत पावन और प्रसिद्ध आरती 'जयति जय गायत्री माता' के सम्पूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ और पूजा विधि का सम्पूर्ण विवरण।

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श्री माता अन्नपूर्णा
14 पाठ

श्री अन्नपूर्णा माता आरती: माता अन्नपूर्णा की संपूर्ण आरती, विधि और कृपा प्राप्ति के मंत्र

माता अन्नपूर्णा जगत की पालनकर्ता और पोषण की देवी हैं। यहाँ पढ़ें उनकी संपूर्ण प्रामाणिक आरती, विस्तृत भावार्थ और पूजन विधि।

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श्री श्री दधिमती माता
13 पाठ

श्री दधिमती माता की पावन आरती - जय दधिमती माता, मैया जय दधिमती माता: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री दधिमती माता की पावन आरती का संपूर्ण पाठ, हिंदी भावार्थ, पूजा विधि और इसके धार्मिक महत्व का विस्तृत विवरण Bhaktilok.in पर प्राप्त करें।

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श्री माता कामधेनु
13 पाठ

श्री कामधेनु माता आरती: मनोकामना पूर्ति हेतु संपूर्ण विधि एवं बोल

माता कामधेनु, जो समस्त इच्छाओं को पूर्ण करने वाली हैं, उनकी आरती का गायन और विधि विधान से पूजन करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है।

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श्री श्री शीतला माता
13 पाठ

श्री शीतला माता आरती: संपूर्ण बोल, विधि और आरोग्य प्राप्ति के मंत्र

सनातन हिंदू धर्म में मां शीतला को भगवती दुर्गा का साक्षात स्वरूप माना गया है। संक्रामक रोगों की अधिष्ठात्री माता शीतला की यह दिव्य आरती जन-कल्याण और आरोग्य प्राप्ति के लिए संदर्भ एवं व्याख्या सहित प्रस्तुत है।

श्री माता आरती का आध्यात्मिक महत्व एवं शास्त्रीय विधि

सनातन हिंदू धर्म में आरती की परंपरा अत्यंत प्राचीन, पावन और फलदायी मानी गई है। 'आरती' शब्द संस्कृत के 'आरात्रिक' शब्द से उत्पन्न हुआ है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है — 'रात्रि या अंधकार को दूर करने वाला दिव्य प्रकाश'। भगवान श्री माता की नित्य पूजा-अर्चना के समापन पर जब कपूर अथवा शुद्ध देसी घी के पंचमुखी दीपक से आरती की जाती है, तो वह भक्त के हृदय से अज्ञान, भय, और नकारात्मकता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान और भक्ति का दिव्य प्रकाश भर देती है।

"दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥"
अर्थात्: दीपक की ज्योति साक्षात् परब्रह्म और भगवान जनार्दन का स्वरूप है। हे दिव्य ज्योति! आप हमारे समस्त पापों, संतापों और विघ्नों का हरण करें।

१. श्री माता आरती करने के प्रमुख आध्यात्मिक नियम

आरती करते समय कुछ विशेष शास्त्रीय नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक बताया गया है ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके:

  • शुद्धता व पवित्रता: आरती सदैव स्नान उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर, शांत व एकाग्र चित्त से करनी चाहिए।
  • दीपक का चयन: आरती के लिए शुद्ध पीतल, तांबा अथवा चांदी की थाली का उपयोग करें। उसमें शुद्ध देसी गाय के घी का दीपक अथवा भीमसेनी कपूर का उपयोग श्रेष्ठ माना गया है।
  • दक्षिणावर्त घुमाने की विधि: आरती की थाली को भगवान के श्री चरणों में ४ बार, नाभि मंडल में २ बार, मुखारविंद के सामने १ बार और संपूर्ण श्री विग्रह के समक्ष ७ बार दक्षिणावर्त (Clockwise - 'ॐ' की आकृति में) घुमाया जाना चाहिए।

२. आरती के समय शंख व घंटी का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक प्रभाव

आरती के दौरान शंख, घंटा और घड़ियाल बजाने की सुदीर्घ परंपरा है। स्कंद पुराण के अनुसार, घंटी की ध्वनि से निकलने वाली तरंगे वातावरण में उपस्थित नकारात्मक ऊर्जा, विषाणुओं और तामसिक शक्तियों को नष्ट करती हैं। इसके साथ ही जब भक्त एकाग्र होकर आरती का सामूहिक गान करते हैं, तो मंदिर अथवा गृह प्रांगण में सकारात्मक प्राण ऊर्जा (Positive Vibrations) का संचार होता है।

३. आरती ग्रहण करने (आरती लेने) की शास्त्रीय विधि

आरती संपन्न होने के उपरांत आरती की थाली को जल के छींटों से शांत (आचमन) किया जाता है। इसके पश्चात दोनों हाथों की हथेलियों को दीपक की ज्योति के ऊपर हल्के से घुमाकर अपने मस्तक, नेत्रों और हृदय पर लगाया जाता है। इसे 'आरती का तेज ग्रहण करना' कहा जाता है, जिससे अंतःकरण पवित्र और प्रफुल्लित होता है।

श्री माता आरती से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)

भगवान श्री माता जी की आरती नित्य प्रातःकाल दैनिक पूजन के उपरांत तथा संध्याकाल सूर्यास्त के समय गोधूलि वेला में करना सर्वोत्तम माना गया है। विशेष पर्वों अथवा त्योहारों पर महाआरती का आयोजन करना और भी पुण्यदायी होता है।
हाँ, घर में अकेले भी श्रद्धापूर्वक भगवान की आरती की जा सकती है। यदि परिवार के सभी सदस्य मिलकर सामूहिक रूप से आरती करें, तो घर में परस्पर प्रेम, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा का कई गुना अधिक विस्तार होता है।
कपूर जलते समय कोई राख या अवशेष नहीं छोड़ता, जो इस बात का प्रतीक है कि भक्त का अहंकार भगवान की भक्ति में पूर्णतः विलीन हो जाना चाहिए। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध और जीवाणुरहित बनाती है।

श्री माता जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

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