॥ श्री कामधेनु माता आरती: मनोकामना पूर्ति हेतु संपूर्ण विधि एवं बोल ॥
★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★आरती की पृष्ठभूमि व रचयिता
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, माता कामधेनु का प्राकट्य समुद्र मंथन के समय हुआ था। उन्हें 'सुरभि' के नाम से भी जाना जाता है। कामधेनु को समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली दिव्य गौ माता माना गया है। वे साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप हैं और उनके शरीर में समस्त देवी-देवताओं का वास होता है। कामधेनु आरती का रचयिता अज्ञात है, परंतु यह परंपरा सदियों से चली आ रही है, जिसे भक्त अपनी मनोकामनाओं की सिद्धि के लिए गाते हैं।
सम्पूर्ण आरती के प्रामाणिक बोल
जय कामधेनु माता, जय सुरभि माता।
तुम हो सुख की दाता, सब दुख की त्राता॥
जय कामधेनु माता...
क्षीर सागर से निकली, तुम दिव्य स्वरूपा।
देवों की हो जननी, तुम मंगल रूपा॥
तुम्हारे ही चरणों में, है स्वर्ग समाया।
भक्तों ने जो मांगा, सो तुमने है पाया॥
जय कामधेनु माता...
अंग-अंग में तेरे, देवों का वास है।
तुम्हारी कृपा से ही, मिटता संताप है॥
दरिद्रता को हरती, तुम धन की भंडार हो।
सृष्टि के कल्याण का, तुम ही आधार हो॥
जय कामधेनु माता...
जो कोई गाए आरती, श्रद्धा से तुम्हारी।
उसकी पूरी हो जाए, हर एक अभिलाषा भारी॥
कामधेनु माता की, जयकार हो सदा।
भक्तों के जीवन में, न आए कोई आपदा॥
जय कामधेनु माता...
पद-दर-पद विस्तृत भावार्थ
आरती की प्रथम पंक्ति में माता को 'सुख की दाता' कहा गया है। इसका अर्थ है कि जो भी भक्त सच्चे मन से उनकी सेवा करता है, उसे भौतिक और आध्यात्मिक सुख प्राप्त होता है। द्वितीय पद में 'क्षीर सागर' का उल्लेख है, जो उनके दिव्य प्राकट्य को दर्शाता है। तृतीय पद में 'अंग-अंग में देवों का वास' का अर्थ है कि कामधेनु का पूजन साक्षात समस्त देवताओं का पूजन है।
गायन का राग, ताल एवं धुन
कामधेनु माता की आरती को 'राग भैरवी' में गाना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह राग शांति और भक्ति का प्रतीक है। इसे 'कहरवा ताल' (8 मात्रा) में लयबद्ध तरीके से गाया जाना चाहिए, जिससे मन में एकाग्रता बनी रहे।
दीप प्रज्वलन, थाली घुमाने का क्रम व विधि
आरती की थाली में घी का दीपक, कपूर, फूल और अक्षत रखें। आरती करते समय थाली को पहले माता के चरणों में, फिर नाभि में, फिर मुख मंडल पर और अंत में पूरे शरीर पर घुमाएं। यह क्रम 'ॐ' की आकृति बनाते हुए पूर्ण करना चाहिए।
आध्यात्मिक महत्व व फलश्रुति
कामधेनु माता की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति नित्य प्रातः काल कामधेनु माता का ध्यान करता है, उसके घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती।