पावन सप्त नदी विनिर्देशन
गंगा नदी (River Ganga)
| १. उद्गम स्रोत (Origin Source): | गंगोत्री हिमनद (भागीरथी), उत्तराखंड। |
| २. पौराणिक इतिहास व कथा: | 0 |
| ३. जल के वैज्ञानिक गुण (Science): | 0 |
| विशिष्ट स्नान टिप: 0 | |
"गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥"
पवित्र नदियों में स्नान के ५ शास्त्रीय महा नियम
नदियों की पवित्रता बनाए रखने और स्नान का पूर्ण आध्यात्मिक फल प्राप्त करने के लिए शास्त्रों में ये नियम बताए गए हैं:
पवित्र नदी के बहते जल में कभी भी साबुन लगाना, वस्त्र धोना, या थूकना नहीं चाहिए। यह वरुण देव और साक्षात नदी देवी का अनादर माना जाता है, जिससे पुण्य मिलने के स्थान पर वरुण दोष का पाप लगता है।
नदी में खड़े होकर स्नान करने के पश्चात तांबे के पात्र या दोनों हाथों की अंजलि में नदी जल भरकर सूर्य देव की ओर मुख करके जल अर्पित (अर्घ्य) करना चाहिए। इससे आरोग्यता और तेज की प्राप्ति होती है।
पवित्र नदी स्नान शंका समाधान (FAQs)
संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी
तीर्थ भूगर्भ व ग्रन्थ संपादन
भक्तिलोक तीर्थ वारि शोध पीठ (Bhaktilok Hydrology Desk)
स्कंद पुराण (काशी खंड, रेवा खंड) और ऋग्वेद के नदी सूक्त के श्लोकों का वैज्ञानिक तथ्यों से मिलान करने वाली विंग।
कर्मकांड व तीर्थ शुद्धि समीक्षा
पं. भालचंद्र शास्त्री (Pt. Bhalchandra Shastri)
अधिष्ठाता, गंगोत्री धाम पुरोहित सभा। ३०+ वर्षों का तीर्थ शुद्धि कर्मकांड व गंगा सप्तमी मेला स्नान शुद्धि समीक्षा अनुभव।
नदी विवरण सत्यापित