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चंद्र चक्र तिथियां

पूर्णिमा व अमावस्या कैलेंडर

सनातन पंचांग में चंद्रमा की गतियों पर आधारित तिथियों का गहरा वैज्ञानिक प्रभाव है। **पूर्णिमा (Full Moon)** के दिन चंद्रमा का आकर्षण बल चरम पर होता है, जो जल तत्वों (जैसे महासागर व हमारे शरीर के रक्त प्रवाह) को उद्द्वेलित करता है, जिससे मन अतिसंवेदनशील होता है। **अमावस्या (New Moon)** पर गुरुत्वाकर्षण की विपरीत स्थिति पितृ तर्पण व आभ्यांतरिक आत्मशुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ मानी गई है।

विधा: चंद्र आकर्षण विज्ञान नियम: व्रत, दान व पितृ तर्पण

चंद्र चक्र आगामी तिथियां

पूर्णिमा (Full Moon) 28 August 2026

श्रावण पूर्णिमा / रक्षाबंधन

भाई-बहन के स्नेह का पर्व रक्षाबंधन और श्रावणी पूर्णिमा।


व्रत आहार: दूध, फल व गंगाजल। सूर्योदय से चंद्रोदय तक। दान नियम: चावल, शक्कर, दूध व श्वेत वस्तुओं का दान।
अमावस्या (New Moon) 10 September 2026

भाद्रपद अमावस्या

पितृ तर्पण एवं दान-पुण्य के लिए अमावस्या तिथि।


व्रत आहार: पूर्ण उपवास या फलाहार। सेंधा नमक वर्जित। दान नियम: तिल, जौ, काली गाय को चारा व वस्त्र दान।

चंद्र गतियों का मानवीय शरीर व मस्तिष्क पर प्रभाव

चंद्रमा की गतियों का हमारे सूक्ष्म शरीर पर गहरा जैविक प्रभाव पड़ता है, जिसे ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व समझ लिया था:

पूर्णिमा और जल तत्व (Full Moon & Fluid Retention)

हमारा शरीर ७०% जल से निर्मित है। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी पर स्थित सभी जल स्रोतों को अपनी ओर खींचती है, जिससे समुद्र में ज्वार-भाटा (Tides) आता है। इसी प्रकार हमारे मस्तिष्क के भीतर भी जल व रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे भावनाएं उग्र होती हैं। इस दिन उपवास रखने से शरीर में जल स्तर संतुलित रहता है और मानसिक उग्रता शांत होती है।

अमावस्या और पितृ लोक का द्वार (New Moon & Pitru Tarpan)

अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही सीध में होते हैं। ज्योतिष के अनुसार यह संधिकाल पितरों (पूर्वजों) के ऊर्जा प्रवाह को पृथ्वी लोक के सर्वाधिक समीप लाता है। इस दिन किया गया तर्पण, तिल जल दान और पिंड दान पितरों की भटकती आत्मा को परम शांति प्रदान करता है और घर में सुख-समृद्धि लाता है।

चंद्र तिथियां शंका समाधान (FAQs)

पूर्णिमा व्रत का पारण शाम को **चंद्रोदय होने और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद** किया जाता है। तांबे के पात्र में गंगाजल, कच्चा दूध, अक्षत और रोली मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। पारण के भोजन में नमक व सात्विक भोजन ग्रहण करें।

अमावस्या पर नकारात्मक तरंगे तीव्र होने के कारण शास्त्रों में इन कार्यों को वर्जित बताया गया है:
१. कोई भी नया व्यवसाय या शुभ कार्य आरम्भ न करें।
२. सुनसान स्थानों या श्मशान भूमि के समीप रात को न जाएं।
३. घर में वाद-विवाद न करें, अन्यथा पितृ दोष बढ़ता है।
४. इस दिन तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) व नशीले पदार्थों का सेवन सर्वथा वर्जित है।

संपादकीय विश्वसनीयता एवं समीक्षा जानकारी

खगोल शास्त्र व पंचांग संपादन

भक्तिलोक खगोल पंचांग विभाग (Bhaktilok Lunar Math Wing)

सूर्य सिद्धांत और वैदिक ज्योतिष के चंद्र गणितीय सिद्धांतों के अनुसार पूर्णिमा-अमावस्या काल निर्धारण करने वाली विंग।

तिथि शुद्धि व व्रत समीक्षा

पं. भवानीदत्त पाठक (Pt. Bhawanidutt Pathak)

संयोजक, धर्मसभा वाराणसी। ३४+ वर्षों का तिथि संधिकाल शुद्धि, व्रत निर्णय व श्राद्ध कर्म विधान समीक्षा अनुभव।

तिथियां सत्यापित
अंतिम संशोधन: ०८ अगस्त २०२६ पठन काल: ५ मिनट पढ़ें