श्री श्री गणेश आरती संग्रह
6+ पावन आरतियाँ

श्री श्री गणेश की आरतियाँ
पावन स्तुति व भक्ति संग्रह

भक्तिलोक पर भगवान श्री श्री गणेश जी की समस्त पावन आरतियों, नित्य वंदना, राग-ताल, शास्त्रीय विधि, सरल भावार्थ एवं प्रामाणिक हिंदी लिरिक्स का संपूर्ण संकलन।

शास्त्र-सम्मत एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

शुद्ध पाठ, राग-ताल, शास्त्रीय विधि और सरल भावार्थ सहित आरती संग्रह।

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श्री श्री गणेश
36 पाठ

श्री गणेश भगवान की आरती - जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री गणेश भगवान की पावन आरती 'जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा' के संपूर्ण बोल, विस्तृत भावार्थ, पूजा विधि और इसके अलौकिक आध्यात्मिक महत्व को यहाँ पढ़ें।

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श्री श्री गणेश
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श्री संकटनाशन गणेश आरती - संकटनाशन गणेश स्तोत्र व आरती: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री संकटनाशन गणेश आरती और स्तोत्र के संपूर्ण बोल, भावार्थ, नियम और पूजा विधि की विस्तृत मार्गदर्शिका। भगवान गणेश जी की कृपा प्राप्ति का अनुपम साधन।

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श्री वरद विनायक की पावन आरती - ॐ जय वरद विनायक, स्वामी जय वरद विनायक: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री वरद विनायक की पावन आरती भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक को समर्पित है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में आरती के संपूर्ण बोल, भावार्थ, और पूजा विधि का वर्णन है।

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22 पाठ

श्री वरद विनायक जी की आरती - ॐ जय वरद विनायक: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री वरद विनायक जी की आरती (ॐ जय वरद विनायक) के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी भावार्थ, अष्टविनायक महत्व और शास्त्रीय पूजा विधि का विस्तृत मार्गदर्शन।

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श्री वरदविनायक जी की आरती - ॐ जय वरदविनायक देवा, स्वामी जय वरदविनायक देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री वरदविनायक जी की पावन आरती 'ॐ जय वरदविनायक देवा' के संपूर्ण बोल, सरल हिंदी भावार्थ, पूजा विधि और इसके अलौकिक आध्यात्मिक महत्व की विस्तृत जानकारी।

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श्री श्री गणेश
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श्री विनायक चतुर्थी विशेष - श्री गणेश जी की पावन आरती (सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची): संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

श्री विनायक चतुर्थी के पावन अवसर पर प्रस्तुत है भगवान श्री गणेश की सबसे लोकप्रिय और प्रसिद्ध आरती 'सुखकर्ता दुखहर्ता वार्ता विघ्नाची' के संपूर्ण बोल, भावार्थ और पूजा विधि का विस्तृत मार्गदर्शन।

श्री श्री गणेश आरती का आध्यात्मिक महत्व एवं शास्त्रीय विधि

सनातन हिंदू धर्म में आरती की परंपरा अत्यंत प्राचीन, पावन और फलदायी मानी गई है। 'आरती' शब्द संस्कृत के 'आरात्रिक' शब्द से उत्पन्न हुआ है, जिसका शाब्दिक अर्थ होता है — 'रात्रि या अंधकार को दूर करने वाला दिव्य प्रकाश'। भगवान श्री श्री गणेश की नित्य पूजा-अर्चना के समापन पर जब कपूर अथवा शुद्ध देसी घी के पंचमुखी दीपक से आरती की जाती है, तो वह भक्त के हृदय से अज्ञान, भय, और नकारात्मकता के अंधकार को समाप्त कर ज्ञान और भक्ति का दिव्य प्रकाश भर देती है।

"दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः। दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥"
अर्थात्: दीपक की ज्योति साक्षात् परब्रह्म और भगवान जनार्दन का स्वरूप है। हे दिव्य ज्योति! आप हमारे समस्त पापों, संतापों और विघ्नों का हरण करें।

१. श्री श्री गणेश आरती करने के प्रमुख आध्यात्मिक नियम

आरती करते समय कुछ विशेष शास्त्रीय नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक बताया गया है ताकि पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सके:

  • शुद्धता व पवित्रता: आरती सदैव स्नान उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर, शांत व एकाग्र चित्त से करनी चाहिए।
  • दीपक का चयन: आरती के लिए शुद्ध पीतल, तांबा अथवा चांदी की थाली का उपयोग करें। उसमें शुद्ध देसी गाय के घी का दीपक अथवा भीमसेनी कपूर का उपयोग श्रेष्ठ माना गया है।
  • दक्षिणावर्त घुमाने की विधि: आरती की थाली को भगवान के श्री चरणों में ४ बार, नाभि मंडल में २ बार, मुखारविंद के सामने १ बार और संपूर्ण श्री विग्रह के समक्ष ७ बार दक्षिणावर्त (Clockwise - 'ॐ' की आकृति में) घुमाया जाना चाहिए।

२. आरती के समय शंख व घंटी का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक प्रभाव

आरती के दौरान शंख, घंटा और घड़ियाल बजाने की सुदीर्घ परंपरा है। स्कंद पुराण के अनुसार, घंटी की ध्वनि से निकलने वाली तरंगे वातावरण में उपस्थित नकारात्मक ऊर्जा, विषाणुओं और तामसिक शक्तियों को नष्ट करती हैं। इसके साथ ही जब भक्त एकाग्र होकर आरती का सामूहिक गान करते हैं, तो मंदिर अथवा गृह प्रांगण में सकारात्मक प्राण ऊर्जा (Positive Vibrations) का संचार होता है।

३. आरती ग्रहण करने (आरती लेने) की शास्त्रीय विधि

आरती संपन्न होने के उपरांत आरती की थाली को जल के छींटों से शांत (आचमन) किया जाता है। इसके पश्चात दोनों हाथों की हथेलियों को दीपक की ज्योति के ऊपर हल्के से घुमाकर अपने मस्तक, नेत्रों और हृदय पर लगाया जाता है। इसे 'आरती का तेज ग्रहण करना' कहा जाता है, जिससे अंतःकरण पवित्र और प्रफुल्लित होता है।

श्री श्री गणेश आरती से जुड़े सामान्य प्रश्न (FAQs)

भगवान श्री श्री गणेश जी की आरती नित्य प्रातःकाल दैनिक पूजन के उपरांत तथा संध्याकाल सूर्यास्त के समय गोधूलि वेला में करना सर्वोत्तम माना गया है। विशेष पर्वों अथवा त्योहारों पर महाआरती का आयोजन करना और भी पुण्यदायी होता है।
हाँ, घर में अकेले भी श्रद्धापूर्वक भगवान की आरती की जा सकती है। यदि परिवार के सभी सदस्य मिलकर सामूहिक रूप से आरती करें, तो घर में परस्पर प्रेम, सौहार्द और सकारात्मक ऊर्जा का कई गुना अधिक विस्तार होता है।
कपूर जलते समय कोई राख या अवशेष नहीं छोड़ता, जो इस बात का प्रतीक है कि भक्त का अहंकार भगवान की भक्ति में पूर्णतः विलीन हो जाना चाहिए। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध और जीवाणुरहित बनाती है।

श्री श्री गणेश जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

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