अपनी चंद्र राशि व लक्षणों से जांचें
अपनी राशि चुनें और 3 सामान्य प्रश्नों के उत्तर देकर जानें कि वर्तमान में आप पर शनि साढ़े साती, मांगलिक या पितृ दोष का कितना प्रभाव हो सकता है।
वैदिक दोष विश्लेषण की वैज्ञानिक प्रक्रिया
सनातन ज्योतिष में 'दोष' का अर्थ कोई अभिशाप नहीं, अपितु आत्मा के पूर्व संचित कर्मों की ऊर्जा दिशा है। सही मंत्र जप, दान और आचरण शुद्धि से किसी भी दोष के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सकता है।
👈 बाईं ओर अपनी राशि चुनकर तुरंत जांचेंमांगलिक दोष (Kuja / Mangal Dosha)
वैवाहिक जीवन, ऊर्जा एवं सामंजस्य का वैदिक विश्लेषणपरिभाषा एवं शास्त्रीय आधार
जन्म कुंडली में लग्न, चंद्रमा या शुक्र से १, ४, ७, ८ या १२वें भाव में मंगल के स्थित होने पर मांगलिक दोष बनता है। दक्षिण भारतीय ज्योतिष में द्वितीय भाव को भी माना जाता है।
प्रमुख प्रकार / वर्गीकरण:
दोष भंग योग (जब दोष का प्रभाव नहीं रहता):
- यदि जीवनसाथी की कुंडली में भी उसी भाव में मंगल, शनि, राहु या केतु हो तो दोष स्वतः निष्फल हो जाता है।
- २८ वर्ष की आयु पूर्ण होने के पश्चात मंगल के उग्र प्रभाव में प्राकृतिक रूप से भारी कमी आती है।
- यदि मंगल मेष, वृश्चिक, मकर राशि में स्थित हो या केंद्र में गुरु-चंद्र का गजकेसरी योग हो तो दोष भंग होता है।
शास्त्रोक्त अचूक निवारण उपाय (Remedies)
ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः (नित्य १०८ बार) अथवा मंगल गायत्री मंत्र।
हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ एवं ऋणमोचक मंगल स्तोत्र।
मंगलवार को मसूर की दाल, लाल वस्त्र, गुड़, तांबा एवं रक्त चंदन का दान।
उज्जैन के अंगारेश्वर महादेव या मंगलनाथ मंदिर में भात पूजा / रुद्राभिषेक।