वैदिक मुहूर्त अन्वेषक 2026-2027
नई दिल्ली (भारत)
साल 2026 कैलेंडर
Vedic Shubh Muhurat Finder

सम्पूर्ण शुभ मुहूर्त 2026-2027
विवाह, गृह प्रवेश, वाहन व मांगलिक समय

सूर्य सिद्धांत एवं मुहूर्त चिंतामणि के शास्त्र-सम्मत नियमों के आधार पर तैयार विवाह लग्न, नूतन गृह प्रवेश, वाहन क्रय, नामकरण, मुंडन व व्यापार आरंभ के सटीक शुभ मुहूर्त।

🛡️ शास्त्र-सम्मत एवं संपादकीय रूप से तैयार सामग्री पंचांग तिथि, नक्षत्र, करण, योग, स्थिर लग्न एवं त्रिबल शुद्धि गणना सहित।
7+ संस्कार श्रेणियां
100+ पावन शुभ मुहूर्त
2026-2027 द्विवर्षीय कैलेंडर

आज का तत्कालीन शुभ मुहूर्त समय

स्थान: नई दिल्ली (भारत) | सूर्योदय: 06:13 AM | सूर्यास्त: 06:06 PM
ब्रह्म मुहूर्त
समाप्त
04:37 AM - 05:25 AM
प्रातः जागरण, ईश्वर ध्यान, गायत्री मंत्र जप व अध्ययन हेतु सर्वश्रेष्ठ समय।
अभिजित मुहूर्त
समाप्त
11:46 AM - 12:34 PM
दिन का 8वां मुहूर्त, किसी भी शुभ व मांगलिक कार्य की शुरुआत हेतु स्वयंसिद्ध शुभ काल।
विजय मुहूर्त
समाप्त
01:22 PM - 02:10 PM
मुकदमा, विवाद समाधान, व्यापारिक समझौते व यात्रा प्रारंभ हेतु विजय कारक समय।
गोधूलि मुहूर्त
समाप्त
05:42 PM - 06:30 PM
संध्या कालीन दीप प्रज्वलन, लक्ष्मी पूजन व आरती हेतु अति पावन मुहूर्त।
अमृत काल
समाप्त
06:51 PM - 08:21 PM
औषधि सेवन, नवीन योजना व मंगल कार्यों हेतु अमृतमयी फलदायी समय।
राहुकाल (त्याज्य समय)
समाप्त
07:43 AM - 09:12 AM
राहुकाल में कोई भी नया कार्य, वाहन क्रय, गृह प्रवेश या यात्रा आरंभ न करें।
संस्कार व प्रयोजन चुनें:

शुभ विवाह मुहूर्त (Wedding Muhurat) - 2026

शास्त्र-सम्मत पावन लग्न, शुभ नक्षत्र व तिथि अनुसार विवाह तिथियां
17 शुभ तिथियां
16 जनवरी शुक्रवार

16 जनवरी 2026

शुक्रवार
अति शुभ (सर्वोत्तम)
तिथि: त्रयोदशी
नक्षत्र: मृगशिरा
शुभ समय: रात्रि 08:35 से प्रातः 07:15 (17 Jan)
शुभ लग्न: सिंह, कन्या, वृश्चिक

मृगशिरा नक्षत्र व स्थिर लग्न में विवाह दांपत्य जीवन में अखंड सौभाग्य और प्रेम प्रदान करता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
17 जनवरी शनिवार

17 जनवरी 2026

शनिवार
उत्तम
तिथि: चतुर्दशी
नक्षत्र: आर्द्रा
शुभ समय: सायं 07:15 से रात्रि 02:40
शुभ लग्न: धनु, कुंभ

संध्या काल गोधूलि वेला में पाणिग्रहण संस्कार हेतु उत्तम मुहूर्त।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
21 जनवरी बुधवार

21 जनवरी 2026

बुधवार
अति शुभ
तिथि: तृतीया
नक्षत्र: शतभिषा
शुभ समय: प्रातः 09:20 से दोपहर 02:45
शुभ लग्न: मीन, वृषभ

दिन के समय विवाह संस्कार संपन्न करने हेतु श्रेष्ठ योग।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
25 जनवरी रविवार

25 जनवरी 2026

रविवार
अति शुभ (सर्वोत्तम)
तिथि: सप्तमी
नक्षत्र: रेवती
शुभ समय: रात्रि 10:15 से प्रातः 07:12 (26 Jan)
शुभ लग्न: तुला, वृश्चिक

रेवती नक्षत्र में विवाह गृहस्थ जीवन में सुख-समृद्धि एवं वंश वृद्धि लाता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
05 फरवरी गुरुवार

05 फरवरी 2026

गुरुवार
अति शुभ (सर्वोत्तम)
तिथि: चतुर्थी
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी
शुभ समय: सायं 06:40 से रात्रि 11:55
शुभ लग्न: सिंह, वृश्चिक

गुरुवार और उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग दांपत्य को अमर बनाता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
11 फरवरी बुधवार

11 फरवरी 2026

बुधवार
सर्वश्रेष्ठ
तिथि: दशमी
नक्षत्र: रोहिणी
शुभ समय: रात्रि 09:10 से प्रातः 07:05 (12 Feb)
शुभ लग्न: कन्या, धनु

रोहिणी नक्षत्र अमृत मुहूर्त के साथ विवाह हेतु सर्वमान्य व अत्यंत फलदायी है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
18 फरवरी बुधवार

18 फरवरी 2026

बुधवार
उत्तम
तिथि: द्वितीया
नक्षत्र: शतभिषा
शुभ समय: दोपहर 01:15 से सायं 06:30
शुभ लग्न: वृषभ, मिथुन

सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अत्यंत पावन पाणिग्रहण मुहूर्त।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
26 फरवरी गुरुवार

26 फरवरी 2026

गुरुवार
अति शुभ
तिथि: एकादशी
नक्षत्र: मृगशिरा
शुभ समय: रात्रि 08:20 से प्रातः 06:50 (27 Feb)
शुभ लग्न: सिंह, तुला

विवाह लग्न में गुरु की शुभ दृष्टि से परिपूर्ण मंगलकारी समय।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
18 अप्रैल शनिवार

18 अप्रैल 2026

शनिवार
सर्वश्रेष्ठ (अबूझ)
तिथि: तृतीया (अक्षय तृतीया निकट)
नक्षत्र: रोहिणी
शुभ समय: सायं 07:20 से रात्रि 01:10
शुभ लग्न: तुला, वृश्चिक

वैशाख मास में रोहिणी युक्त विवाह अक्षय सुख व यश प्रदान करता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
24 अप्रैल शुक्रवार

24 अप्रैल 2026

शुक्रवार
अति शुभ
तिथि: सप्तमी
नक्षत्र: पुष्य
शुभ समय: रात्रि 09:30 से प्रातः 05:45 (25 Apr)
शुभ लग्न: धनु, मकर

नक्षत्रों के राजा पुष्य में विवाह संस्कार से समस्त दोष स्वतः शांत हो जाते हैं।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
02 मई शनिवार

02 मई 2026

शनिवार
अति शुभ
तिथि: पूर्णिमा
नक्षत्र: स्वाति
शुभ समय: रात्रि 08:15 से प्रातः 05:35 (03 May)
शुभ लग्न: वृश्चिक, धनु

स्वाति नक्षत्र में विवाह युगल को समाज में उच्च मान-सम्मान व वैभव दिलाता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
09 मई शनिवार

09 मई 2026

शनिवार
उत्तम
तिथि: सप्तमी
नक्षत्र: धनिष्ठा
शुभ समय: दोपहर 02:40 से रात्रि 09:15
शुभ लग्न: सिंह, कन्या

धनिष्ठा नक्षत्र धन-धान्य और संतान सुख का वरदान देता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
20 जून शनिवार

20 जून 2026

शनिवार
अति शुभ
तिथि: षष्ठी
नक्षत्र: उत्तराफाल्गुनी
शुभ समय: रात्रि 10:05 से प्रातः 05:25 (21 Jun)
शुभ लग्न: धनु, कुंभ

आषाढ़ मास का अंतिम सर्वोत्तम विवाह मुहूर्त (चातुर्मास आरंभ पूर्व)।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
21 नवंबर शनिवार

21 नवंबर 2026

शनिवार
सर्वश्रेष्ठ
तिथि: द्वादशी (तुलसी विवाह)
नक्षत्र: रेवती
शुभ समय: सायं 06:15 से रात्रि 11:45
शुभ लग्न: वृषभ, मिथुन

देवउठनी एकादशी के पश्चात चातुर्मास समाप्ति का पावन प्रथम विवाह मुहूर्त।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
26 नवंबर गुरुवार

26 नवंबर 2026

गुरुवार
अति शुभ
तिथि: तृतीया
नक्षत्र: मृगशिरा
शुभ समय: रात्रि 09:00 से प्रातः 06:50 (27 Nov)
शुभ लग्न: कर्क, सिंह

गुरुवार व मृगशिरा का संगम विवाह को दीर्घायु व मंगलमय बनाता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
04 दिसंबर शुक्रवार

04 दिसंबर 2026

शुक्रवार
अति शुभ
तिथि: एकादशी
नक्षत्र: हस्त
शुभ समय: रात्रि 07:30 से रात्रि 01:40
शुभ लग्न: कन्या, तुला

हस्त नक्षत्र में कन्या दान व पाणिग्रहण अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
11 दिसंबर शुक्रवार

11 दिसंबर 2026

शुक्रवार
उत्तम
तिथि: तृतीया
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा
शुभ समय: रात्रि 08:50 से प्रातः 07:05 (12 Dec)
शुभ लग्न: धनु, मकर

वर्ष 2026 का अंतिम विवाह मुहूर्त (मलमास/धनु संक्रांति पूर्व)।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत

शुभ गृह प्रवेश मुहूर्त (House Warming Muhurat) - 2026

नवीन घर, फ्लैट व भवन में सुख-शांति व लक्ष्मी वास हेतु पावन मुहूर्त
8 शुभ तिथियां
12 फरवरी गुरुवार

12 फरवरी 2026

गुरुवार
सर्वोत्तम
तिथि: एकादशी
नक्षत्र: मृगशिरा
शुभ समय: प्रातः 07:10 से दोपहर 12:35
शुभ लग्न: कुंभ, मीन

मृगशिरा नक्षत्र में नूतन गृह प्रवेश से घर में वास्तु दोष शांत रहते हैं एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
27 फरवरी शुक्रवार

27 फरवरी 2026

शुक्रवार
अति शुभ
तिथि: द्वादशी
नक्षत्र: पुनर्वसु
शुभ समय: प्रातः 06:55 से प्रातः 11:20
शुभ लग्न: मेष, वृषभ

पुनर्वसु नक्षत्र में गृह प्रवेश सुख, शांति व संतानों की उन्नति हेतु वरदान स्वरूप है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
06 मार्च शुक्रवार

06 मार्च 2026

शुक्रवार
सर्वोत्तम
तिथि: तृतीया
नक्षत्र: हस्त
शुभ समय: प्रातः 06:40 से दोपहर 01:15
शुभ लग्न: वृषभ, मिथुन

हस्त नक्षत्र में वास्तु पूजन व कलश स्थापना से लक्ष्मी का चिरस्थाई वास होता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
19 अप्रैल रविवार

19 अप्रैल 2026

रविवार
सर्वश्रेष्ठ (अबूझ)
तिथि: तृतीया (अक्षय तृतीया पूर्व)
नक्षत्र: रोहिणी
शुभ समय: प्रातः 05:55 से पूर्वाह्न 10:45
शुभ लग्न: मिथुन, कर्क

वैशाख शुक्ल तृतीया के समीप रोहिणी नक्षत्र में गृह प्रवेश महामंगलकारी है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
08 मई शुक्रवार

08 मई 2026

शुक्रवार
अति शुभ
तिथि: षष्ठी
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा
शुभ समय: प्रातः 05:35 से प्रातः 11:10
शुभ लग्न: कर्क, सिंह

उत्तराषाढ़ा नक्षत्र गृह स्वामी को समाज में प्रतिष्ठा और स्थायी संपत्ति लाभ देता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
12 जून शुक्रवार

12 जून 2026

शुक्रवार
उत्तम
तिथि: त्रयोदशी
नक्षत्र: स्वाति
शुभ समय: प्रातः 05:25 से प्रातः 10:30
शुभ लग्न: कन्या, तुला

स्वाति नक्षत्र में गृह प्रवेश भवन की दीर्घायु और सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
22 नवंबर रविवार

22 नवंबर 2026

रविवार
अति शुभ
तिथि: त्रयोदशी
नक्षत्र: अश्विनी
शुभ समय: प्रातः 06:50 से दोपहर 12:15
शुभ लग्न: वृश्चिक, धनु

देवप्रबोधिनी के बाद नूतन घर में प्रवेश आरोग्य और त्वरित उन्नति कारक है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
05 दिसंबर शनिवार

05 दिसंबर 2026

शनिवार
उत्तम
तिथि: द्वादशी
नक्षत्र: चित्रा
शुभ समय: प्रातः 07:05 से प्रातः 11:45
शुभ लग्न: धनु, मकर

मार्गशीर्ष मास में गृह प्रवेश धन-धान्य की कभी कमी नहीं होने देता।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत

वाहन क्रय मुहूर्त (Vehicle Purchase Muhurat) - 2026

कार, बाइक, स्कूटर व व्यावसायिक वाहन खरीदी के अमृत व सर्वार्थ सिद्धि मुहूर्त
7 शुभ तिथियां
22 जनवरी गुरुवार

22 जनवरी 2026

गुरुवार
अति शुभ
तिथि: चतुर्थी
नक्षत्र: शतभिषा
शुभ समय: प्रातः 08:15 से दोपहर 02:30
शुभ लग्न: चर व स्थिर लग्न

शतभिषा नक्षत्र वाहन के सुरक्षित संचालन और दुर्घटनाओं से सुरक्षा प्रदान करता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
08 फरवरी रविवार

08 फरवरी 2026

रविवार
सर्वोत्तम
तिथि: सप्तमी
नक्षत्र: स्वाति
शुभ समय: प्रातः 09:30 से सायं 04:15
शुभ लग्न: वृषभ, मिथुन

स्वाति नक्षत्र में क्रय किया गया वाहन व्यापारिक यात्राओं में अत्यंत लाभप्रद सिद्ध होता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
15 मार्च रविवार

15 मार्च 2026

रविवार
अति शुभ
तिथि: एकादशी
नक्षत्र: श्रवण
शुभ समय: प्रातः 07:45 से दोपहर 01:20
शुभ लग्न: कर्क, सिंह

श्रवण नक्षत्र में वाहन खरीदी से गति, स्थायित्व और परिवार में हर्षोल्लास रहता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
19 अप्रैल रविवार

19 अप्रैल 2026

रविवार
सर्वश्रेष्ठ (अबूझ)
तिथि: तृतीया (अक्षय तृतीया)
नक्षत्र: रोहिणी
शुभ समय: अबूझ मुहूर्त (सूर्योदय से सूर्यास्त)
शुभ लग्न: सर्व लग्न

अक्षय तृतीया पर नया वाहन घर लाना दीर्घकालिक सुख और मान-प्रतिष्ठा बढ़ाता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
14 मई गुरुवार

14 मई 2026

गुरुवार
सर्वश्रेष्ठ
तिथि: त्रयोदशी
नक्षत्र: पुष्य
शुभ समय: प्रातः 06:10 से दोपहर 03:00
शुभ लग्न: सिंह, कन्या

गुरु पुष्य नक्षत्र में वाहन खरीद से वाहन की लंबी आयु व परिवार की सुरक्षा होती है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
18 अक्टूबर रविवार

18 अक्टूबर 2026

रविवार
अति शुभ
तिथि: नवमी (दशहरा पूर्व)
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा
शुभ समय: प्रातः 08:00 से सायं 05:00
शुभ लग्न: धनु, मकर

नवरात्रि व दशहरा काल में वाहन खरीदना विजय और कार्य सिद्धि का प्रतीक है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
06 नवंबर शुक्रवार

06 नवंबर 2026

शुक्रवार
सर्वश्रेष्ठ (अबूझ)
तिथि: धनतेरस
नक्षत्र: हस्त
शुभ समय: अबूझ पावन मुहूर्त
शुभ लग्न: वृषभ, तुला

धनतेरस पर वाहन क्रय करने से कुबेर व लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत

नामकरण संस्कार मुहूर्त (Naming Ceremony) - 2026

नवजात शिशु के उज्ज्वल भविष्य व संस्कार हेतु 10वें, 11वें व 100वें दिन के शुभ मुहूर्त
5 शुभ तिथियां
20 जनवरी मंगलवार

20 जनवरी 2026

मंगलवार
अति शुभ
तिथि: द्वितीया
नक्षत्र: धनिष्ठा
शुभ समय: प्रातः 08:30 से दोपहर 12:00
शुभ लग्न: कुंभ

धनिष्ठा नक्षत्र में नामकरण से शिशु पराक्रमी और बुद्धिमान बनता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
15 फरवरी रविवार

15 फरवरी 2026

रविवार
सर्वोत्तम
तिथि: त्रयोदशी
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा
शुभ समय: प्रातः 09:15 से दोपहर 01:30
शुभ लग्न: मेष, वृषभ

रविवार को स्थिर नक्षत्र में नामकरण करने से दीर्घायु और निरोगी काया की प्राप्ति होती है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
22 मार्च रविवार

22 मार्च 2026

रविवार
सर्वश्रेष्ठ
तिथि: पंचमी
नक्षत्र: रोहिणी
शुभ समय: प्रातः 08:00 से दोपहर 12:30
शुभ लग्न: मिथुन

रोहिणी नक्षत्र में रखा गया नाम बच्चे को समाज में यश और लोकप्रियता दिलाता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
18 मई सोमवार

18 मई 2026

सोमवार
अति शुभ
तिथि: द्वितीया
नक्षत्र: मृगशिरा
शुभ समय: प्रातः 07:30 से पूर्वाह्न 11:45
शुभ लग्न: कर्क, सिंह

मृगशिरा नक्षत्र में नामकरण बच्चे में विद्या और विनम्रता का विकास करता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
15 नवंबर रविवार

15 नवंबर 2026

रविवार
सर्वोत्तम
तिथि: षष्ठी
नक्षत्र: श्रवण
शुभ समय: प्रातः 08:45 से दोपहर 01:15
शुभ लग्न: धनु, मकर

श्रवण नक्षत्र बालक को धार्मिक, सुसंस्कृत और ज्ञानवान बनाता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत

मुंडन संस्कार मुहूर्त (Mundan / Head Shaving) - 2026

प्रथम, तृतीय या पंचम वर्ष में बालक/बालिका के केश संस्कार हेतु शुभ लग्न
4 शुभ तिथियां
20 फरवरी शुक्रवार

20 फरवरी 2026

शुक्रवार
सर्वोत्तम
तिथि: तृतीया
नक्षत्र: अश्विनी
शुभ समय: प्रातः 08:15 से दोपहर 12:30
शुभ लग्न: कुंभ, मीन

अश्विनी नक्षत्र में मुंडन संस्कार बच्चे की मानसिक एकाग्रता व बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
12 मार्च गुरुवार

12 मार्च 2026

गुरुवार
अति शुभ
तिथि: दशमी
नक्षत्र: हस्त
शुभ समय: प्रातः 07:45 से दोपहर 01:10
शुभ लग्न: मेष, वृषभ

हस्त नक्षत्र में चूड़ाकर्म संस्कार से पूर्व जन्म के दोषों का नाश होता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
22 अप्रैल बुधवार

22 अप्रैल 2026

बुधवार
सर्वश्रेष्ठ
तिथि: पंचमी
नक्षत्र: मृगशिरा
शुभ समय: प्रातः 06:50 से पूर्वाह्न 11:30
शुभ लग्न: मिथुन, कर्क

मृगशिरा नक्षत्र में मुंडन से बालक का स्वास्थ्य उत्तम रहता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
15 मई शुक्रवार

15 मई 2026

शुक्रवार
अति शुभ
तिथि: त्रयोदशी
नक्षत्र: पुनर्वसु
शुभ समय: प्रातः 06:15 से प्रातः 10:45
शुभ लग्न: कर्क, सिंह

पुनर्वसु नक्षत्र में केश दान से बालकों को दीर्घायु और ओज की प्राप्ति होती है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत

दुकान व व्यापार आरंभ मुहूर्त (Business Opening) - 2026

नवीन प्रतिष्ठान, दुकान, कार्यालय व फैक्ट्री उद्घाटन के शुभ चौघड़िया व लग्न
4 शुभ तिथियां
26 जनवरी सोमवार

26 जनवरी 2026

सोमवार
अति शुभ
तिथि: अष्टमी
नक्षत्र: भरणी
शुभ समय: प्रातः 09:15 से दोपहर 01:45
शुभ लग्न: स्थिर लग्न (वृषभ/कुंभ)

स्थिर लग्न में व्यापार आरंभ करने से व्यापार स्थायी रूप से फलता-फूलता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
08 मार्च रविवार

08 मार्च 2026

रविवार
सर्वोत्तम
तिथि: पंचमी
नक्षत्र: स्वाति
शुभ समय: प्रातः 08:30 से दोपहर 02:00
शुभ लग्न: वृषभ

स्वाति नक्षत्र व्यापार में ग्राहकों की निरंतर आवक और साख बढ़ाता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
19 अप्रैल रविवार

19 अप्रैल 2026

रविवार
सर्वश्रेष्ठ (अबूझ)
तिथि: अक्षय तृतीया
नक्षत्र: रोहिणी
शुभ समय: अबूझ मुहूर्त (पूरा दिन)
शुभ लग्न: सर्व लग्न

अक्षय तृतीया पर प्रारंभ किया गया कोई भी व्यवसाय कभी घाटे में नहीं जाता।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
06 नवंबर शुक्रवार

06 नवंबर 2026

शुक्रवार
सर्वश्रेष्ठ
तिथि: धनतेरस
नक्षत्र: हस्त
शुभ समय: अमृत चौघड़िया मुहूर्त
शुभ लग्न: वृषभ, तुला

धनतेरस पर दुकान या प्रतिष्ठान का उद्घाटन महालक्ष्मी का चिरस्थाई आशीर्वाद दिलाता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत

सोना-चांदी क्रय मुहूर्त (Gold & Jewelry Purchase) - 2026

पुष्य नक्षत्र, सर्वार्थ सिद्धि योग व धनतेरस पर स्वर्ण-आभूषण व निवेश के मुहूर्त
4 शुभ तिथियां
19 अप्रैल रविवार

19 अप्रैल 2026

रविवार
सर्वश्रेष्ठ (अबूझ)
तिथि: अक्षय तृतीया
नक्षत्र: रोहिणी
शुभ समय: प्रातः 05:50 से रात्रि 11:30
शुभ लग्न: सर्व लग्न

अक्षय तृतीया पर खरीदा गया सोना अक्षय रहता है और घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि करता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
14 मई गुरुवार

14 मई 2026

गुरुवार
सर्वश्रेष्ठ
तिथि: त्रयोदशी
नक्षत्र: गुरु पुष्य नक्षत्र
शुभ समय: प्रातः 06:00 से दोपहर 02:40
शुभ लग्न: सिंह, कन्या

गुरु पुष्य नक्षत्र में स्वर्ण क्रय करने से धन-संपदा में कई गुना वृद्धि होती है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
31 अक्टूबर शनिवार

31 अक्टूबर 2026

शनिवार
सर्वोत्तम
तिथि: पुष्य नक्षत्र (दीपावली पूर्व)
नक्षत्र: पुष्य
शुभ समय: प्रातः 08:15 से रात्रि 09:30
शुभ लग्न: वृषभ, तुला

दीपावली से पूर्व पुष्य नक्षत्र में सोने-चांदी के सिक्के व आभूषण खरीदना महामंगलकारी है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
06 नवंबर शुक्रवार

06 नवंबर 2026

शुक्रवार
सर्वश्रेष्ठ (अबूझ)
तिथि: धनतेरस
नक्षत्र: हस्त
शुभ समय: सायं 05:40 से रात्रि 08:50 (प्रदोष काल)
शुभ लग्न: वृषभ (स्थिर लग्न)

धनतेरस पर प्रदोष काल में स्थिर लग्न में स्वर्ण-चांदी खरीदना कुबेर लक्ष्मी कृपा दिलाता है।

शेयर करें शास्त्र-सम्मत
वैदिक ज्योतिष एवं पंचांग ज्ञान

शुभ मुहूर्त का सनातन विज्ञान: महत्व, नियम एवं गणना प्रणाली

लेखक: भक्तिलोक वैदिक शोध दल | संदर्भ: सूर्य सिद्धांत, मुहूर्त चिंतामणि, धर्मसिंधु एवं निर्णयसिंधु

1. सनातन धर्म में 'मुहूर्त' का गूढ़ अर्थ एवं उत्पत्ति

वैदिक काल गणना में समय को केवल भौतिक गति नहीं, अपितु एक चेतन शक्ति माना गया है। 'मुहूर्त' शब्द का निर्माण दो शब्दों 'मुहु' (क्षण/पल) और 'ऋत' (सत्य/प्रकृति का नियम) से हुआ है। एक अहोरात्र (24 घंटे) को 30 मुहूर्तों में विभाजित किया जाता है, जिसमें प्रत्येक मुहूर्त का मान 2 घटी अर्थात 48 मिनट होता है। इनमें से 15 मुहूर्त दिन के और 15 मुहूर्त रात्रि के होते हैं।

ऋग्वेद एवं यजुर्वेद में स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि जिस प्रकार भूमि में बीज बोने के लिए ऋतु और अनुकूल जलवायु आवश्यक है, ठीक उसी प्रकार किसी भी नए कार्य, संस्कार, व्यापार या गृह प्रवेश की सफलता उस समय प्रवाहित होने वाली आकाशीय ऊर्जाओं और ग्रहों के अनुग्रह पर निर्भर करती है।

2. पंचांग के पांच मुख्य अंग और मुहूर्त शुद्धि

किसी भी शुभ मुहूर्त का निर्धारण पंचांग के 5 अनिवार्य अंगों के शुद्ध संतुलन द्वारा किया जाता है:

  • तिथि (Tithi): चंद्र मास का दिन। शुभ कार्यों के लिए द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी व त्रयोदशी श्रेष्ठ मानी जाती हैं। रिक्ता तिथियों (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) को त्याज्य माना गया है।
  • वार (Weekday): सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को शुभ व सौम्य वार माना जाता है, जबकि रविवार, मंगलवार और शनिवार क्रूर कार्यों या विशिष्ट अनुष्ठानों हेतु प्रयुक्त होते हैं।
  • नक्षत्र (Nakshatra): 27 नक्षत्रों में रोहिणी, मृगशिरा, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद और रेवती को सर्वकार्य सिद्धिप्रद माना गया है।
  • योग (Yoga): 27 योगों में विष्कुंभ, अतिगंड, शूल, व्याघात, वज्र, व्यतीपात और वैधृति जैसे अशुभ योगों को छोड़कर आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, सुकर्मा, धृति आदि में कार्य प्रारंभ किया जाता है।
  • करण (Karana): विष्टि (भद्रा) करण में मांगलिक कार्य सर्वथा वर्जित हैं। बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर और वणिज शुभ करण हैं।

3. विवाह मुहूर्त: त्रिबल शुद्धि एवं मेलापक नियम

विवाह संस्कार 16 संस्कारों में सबसे महत्वपूर्ण संस्कार है क्योंकि यह दो आत्माओं और दो परिवारों का पावन मिलन है। विवाह लग्न तय करते समय तीन ग्रहों का बल देखना अनिवार्य होता है:

  1. सूर्य बल (वर हेतु): वर के लिए सूर्य का गोचर 3, 6, 10, 11वें भाव में शुभ फलदायी होता है।
  2. गुरु बल (कन्या हेतु): कन्या के लिए देवगुरु बृहस्पति का बल 2, 5, 7, 9, 11वें भाव में अखंड सौभाग्य कारक होता है।
  3. चंद्र बल (दोनों हेतु): वर और कन्या दोनों की जन्म राशि से चंद्रमा का 4, 8, 12वें भाव में न होना अनिवार्य है।

इसके अतिरिक्त सिंहस्थ गुरु (जब गुरु सिंह राशि में हों) और चातुर्मास (आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक) में मांगलिक विवाह वर्जित माने जाते हैं।

4. गृह प्रवेश एवं वास्तु शुद्धि के शास्त्रीय नियम

गृह प्रवेश तीन प्रकार का होता है:

  • अपूर्व गृह प्रवेश: नवनिर्मित नवीन भवन में पहली बार प्रवेश।
  • सपूर्व गृह प्रवेश: पुरानी खरीदी गई संपत्ति या यात्रा के बाद पुनः घर में प्रवेश।
  • द्वंद्व गृह प्रवेश: किसी विपत्ति, जीर्णोद्धार या आग/भूकंप के बाद घर में पुनः प्रवेश।

गृह प्रवेश हमेशा स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) में किया जाना चाहिए ताकि घर में लक्ष्मी का वास स्थाई रहे। प्रवेश के समय 'नवग्रह शांति', 'वास्तु पुरुष पूजन' और 'मंगल कलश स्थापना' की विधि अवश्य संपन्न करनी चाहिए।

5. अबूझ मुहूर्त क्या होते हैं?

सनातन ज्योतिष में कुछ ऐसे दुर्लभ और स्वयंसिद्ध दिन होते हैं जिन्हें 'अबूझ मुहूर्त' कहा जाता है। इन पावन दिनों में किसी भी पंचांग मिलान, ग्रह दोष या लग्न शुद्धि की आवश्यकता नहीं होती। ये दिन हैं:

  • अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया): दान, विवाह, स्वर्ण क्रय, गृह प्रवेश और नवीन व्यवसाय का स्वयंसिद्ध दिन।
  • देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी): चातुर्मास समाप्ति के बाद तुलसी विवाह का पावन अबूझ मुहूर्त।
  • विजयादशमी / दशहरा (आश्विन शुक्ल दशमी): विजय, वाहन क्रय, शस्त्र पूजन और नए उपक्रम का दिन।
  • धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी): वाहन, स्वर्ण, रजत एवं नवीन संपत्ति क्रय का महामुहूर्त।
  • वसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी): विद्यारंभ, नामकरण, संगीत व विवाह संस्कार का शुभ दिन।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

अभिजित मुहूर्त सूर्योदय और सूर्यास्त के ठीक मध्य (सोलर नून) के 24 मिनट पूर्व से 24 मिनट पश्चात (कुल 48 मिनट) तक रहता है। यह समय प्रतिदिन सूर्य के गति और स्थानीय अक्षांश के अनुसार बदलता है। बुधवार को अभिजित मुहूर्त वर्जित माना गया है।

नहीं, राहुकाल में केवल नवीन कार्य का प्रारंभ (आरंभ) वर्जित है। यदि कोई कार्य पहले से चल रहा हो, दैनिक पूजा या नित्य कर्म हो तो उसे रोकने की आवश्यकता नहीं होती।

पुष्य को 27 नक्षत्रों का राजा 'अमृत्य' माना गया है। इसके स्वामी शनि और अधिष्ठाता देव गुरु बृहस्पति हैं। पुष्य नक्षत्र में खरीदी गई धातु (सोना, चांदी) में कभी क्षय नहीं होता और यह निरंतर वृद्धि करती है।

लाइव चौघड़िया क्लॉक

आज के दिन व रात के 8-8 चौघड़िया याम देखें।

चौघड़िया देखें

आज की वैदिक तिथि

आज की तिथि, पक्ष, नक्षत्र, वार व संपूर्ण वैदिक विवरण।

आज की तिथि

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी

दैनिक 5 रोचक प्रश्न खेलें व अपना ज्ञान परखें।

क्विज खेलें