पावन आरती संग्रह · स्तुति पाठ
श्री भगवान हयग्रीव (भगवान विष्णु के अवतार) आरती
14 पाठ

श्री हयग्रीव भगवान की पावन आरती - ॐ जय हयग्रीव देवा, स्वामी जय हयग्रीव देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि

सम्पूर्ण आरती लिरिक्स हिंदी में, सरल भावार्थ, शास्त्रीय विधि, गायन नियम एवं नित्य पाठ के आध्यात्मिक लाभ।

राग कल्याण / यमन / भैरवी शास्त्रीय राग / ताल
5 पठन अवधि
Hindi आरती भाषा
Vivek.Kumar रचनाकार / स्रोत
अक्षर आकार:

॥ श्री हयग्रीव भगवान की पावन आरती - ॐ जय हयग्रीव देवा, स्वामी जय हयग्रीव देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि ॥

★ नित्य पाठ व संकीर्तन ★

भगवान हयग्रीव, जो साक्षात भगवान विष्णु के विद्या और ज्ञान के अवतार माने जाते हैं, वेदों के रक्षक और बुद्धि के अधिष्ठाता हैं। उनकी पावन आरती का गायन न केवल मन को शांति प्रदान करता है, बल्कि साधक को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। इस लेख में हम श्री हयग्रीव भगवान की आरती, उसके गूढ़ अर्थ और पूजा की शास्त्रीय विधि पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

सम्पूर्ण आरती मूल बोल

ॐ जय हयग्रीव देवा, स्वामी जय हयग्रीव देवा।
ब्रह्मा-विष्णु-महेश, वंदना करें देवा॥ ॐ जय हयग्रीव देवा॥

अश्वमुख धारी प्रभु, ज्ञान के सागर।
वेदों के रक्षक तुम, विघ्न के नाशक॥ ॐ जय हयग्रीव देवा॥

मधु-कैटभ संहारक, दुष्टों के काल।
भक्तों के तुम रक्षक, संकट के टाल॥ ॐ जय हयग्रीव देवा॥

शंख-चक्र-गदा-पद्म, कर में विराजे।
तेज पुंज मुख मंडल, सब जग में साजे॥ ॐ जय हयग्रीव देवा॥

विद्या बुद्धि प्रदाता, शरण में आए।
जो भी ध्यावे तुमको, भव से तर जाए॥ ॐ जय हयग्रीव देवा॥

हयग्रीव की आरती, जो कोई गावे।
सुख-संपत्ति-वैभव, सब कुछ वो पावे॥ ॐ जय हयग्रीव देवा॥

आरती का सरल हिंदी भावार्थ एवं प्रत्येक पंक्ति का अर्थ

आरती की प्रथम पंक्ति 'ॐ जय हयग्रीव देवा' में हम भगवान के जयकारे लगाते हैं। हयग्रीव का अर्थ है 'अश्व के समान मुख वाले'। वे भगवान विष्णु का वह स्वरूप हैं जिन्होंने वेदों की रक्षा के लिए अवतार लिया। 'ब्रह्मा-विष्णु-महेश, वंदना करें देवा' का अर्थ है कि स्वयं त्रिदेव भी ज्ञान के इस स्वरूप को नमन करते हैं। 'अश्वमुख धारी प्रभु' पंक्ति उनके दिव्य स्वरूप का वर्णन करती है, जो बुद्धि और चपलता का प्रतीक है। 'मधु-कैटभ संहारक' का संदर्भ उस पौराणिक कथा से है जहाँ भगवान ने वेदों को पुनः प्राप्त करने के लिए असुरों का वध किया था। 'विद्या बुद्धि प्रदाता' पंक्ति स्पष्ट करती है कि जो भी विद्यार्थी या साधक उनकी शरण में आता है, उसे असीम ज्ञान की प्राप्ति होती है।

आरती का धार्मिक एवं पौराणिक महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब मधु और कैटभ नामक असुरों ने वेदों को चुराकर रसातल में छिपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने हयग्रीव रूप धारण किया। हयग्रीव रूप में उन्होंने वेदों का उद्धार किया और सृष्टि में पुनः ज्ञान का प्रकाश फैलाया। इसलिए, उन्हें 'ज्ञान का अधिष्ठाता' कहा जाता है। हयग्रीव की पूजा करने से एकाग्रता, स्मरण शक्ति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।

आरती करने की सही विधि एवं नियम

आरती के लिए सर्वप्रथम एक स्वच्छ स्थान पर भगवान हयग्रीव की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। शुद्ध घी का दीपक जलाएं। धूप, दीप, नैवेद्य और पुष्प अर्पित करें। आरती करते समय मन को एकाग्र रखें और भगवान के स्वरूप का ध्यान करें। आरती के बाद 'कर्पूरगौरं करुणावतारं' मंत्र का जाप करें और अंत में क्षमा प्रार्थना करें।

आरती के समय आवश्यक सामग्री

  • शुद्ध घी का दीपक (पंचमुखी हो तो उत्तम)
  • कपूर की टिकिया
  • धूप या अगरबत्ती
  • ताजे पुष्प (विशेषकर तुलसी दल)
  • नैवेद्य (मिठाई या फल)
  • शंख और घंटी

राग, ताल एवं गायन समय

हयग्रीव आरती को राग कल्याण या यमन में गाना अत्यंत प्रभावी माना जाता है। यह राग मन को शांत और एकाग्र करता है। आरती का सर्वोत्तम समय ब्रह्ममुहूर्त या संध्याकाल है।

दैनिक जीवन में आध्यात्मिक लाभ एवं फलश्रुति

नियमित रूप से हयग्रीव आरती करने से मानसिक तनाव दूर होता है। छात्रों के लिए यह आरती अत्यंत लाभकारी है क्योंकि यह स्मरण शक्ति को तीव्र करती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर घर में सकारात्मकता का संचार करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

१. श्री हयग्रीव भगवान की पावन आरती - ॐ जय हयग्रीव देवा, स्वामी जय हयग्रीव देवा: संपूर्ण बोल, भावार्थ एवं पूजा विधि का सरल भावार्थ

यह पावन आरती भगवान श्री भगवान हयग्रीव (भगवान विष्णु के अवतार) के दिव्य स्वरूप, उनकी अलौकिक लीलाओं और भक्तों पर उनकी अहैतुकी कृपा का गुणगान करती है। जब भक्त पूर्ण निष्ठा, भक्ति और एकाग्रता के साथ इस आरती का गायन करते हैं, तो उनके हृदय में ईश्वरीय चेतना, सात्विक भाव और आध्यात्मिक शांति का संचार होता है।

"कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम्। सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि॥"
अर्थात्: जो कर्पूर के समान गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के साक्षात् अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, उन भगवान शिव और माता भवानी को मैं अपने हृदय कमल में नमन करता हूँ।

२. आरती की शास्त्रीय पूजा विधि एवं थाली घुमाने के नियम

आरती सदैव शुद्ध, पवित्र और एकाग्र चित्त होकर करनी चाहिए। शास्त्रों में आरती की थाली घुमाने का विशेष वैज्ञानिक व आध्यात्मिक नियम निर्धारित किया गया है:

  • चरणों में ४ बार: भगवान के श्री चरणों में ४ बार आरती की थाली घुमाकर प्रणाम करें।
  • नाभि मंडल में २ बार: भगवान की नाभि में २ बार घुमाकर समस्त सृष्टि के पालनकर्ता को नमन करें।
  • मुखारविंद पर १ बार: भगवान के दिव्य मुख के सम्मुख १ बार घुमाकर उनके दर्शन करें।
  • सम्पूर्ण विग्रह पर ७ बार: सम्पूर्ण श्री विग्रह पर ७ बार 'ॐ' की आकृति बनाते हुए दक्षिणावर्त (Clockwise) घुमाएं।

३. नित्य आरती गायन के आध्यात्मिक एवं भौतिक लाभ

प्रतिदिन प्रातःकाल एवं सायंकाल आरती करने से घर के वातावरण में व्याप्त नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। शंख, घंटी और कपूर की दिव्य सुगंध से मन शांत होता है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और समस्त प्रकार के अनिष्ट व कष्ट दूर होते हैं।

४. आरती से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (FAQs)

हाँ, भगवान के प्रति पूर्ण आदर, सत्कार और विनम्रता प्रकट करने के लिए आरती खड़े होकर दोनों हाथों से थाली पकड़कर ही करनी चाहिए। अस्वस्थ होने की स्थिति में बैठकर भी आरती की जा सकती है।
आरती संपन्न होने पर थाली के चारों ओर जल का एक घेरा बनाकर अग्नि को शांत किया जाता है, जिसके पश्चात सभी भक्त दोनों हाथों से ज्योति की ऊष्मा (आशीर्वाद व तेज) ग्रहण करते हैं।
कपूर जलते समय कोई अवशेष नहीं छोड़ता, जो अहंकार के पूर्ण विसर्जन का प्रतीक है। साथ ही कपूर की सुगंध वातावरण को शुद्ध, पवित्र और जीवाणुरहित बनाती है।

संबंधित पावन आरतियाँ

समस्त आरतियाँ देखें →

भक्त विचार एवं टिप्पणियां (0)

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। सर्वप्रथम अपने भक्ति विचार साझा करें!

भगवान श्री भगवान हयग्रीव (भगवान विष्णु के अवतार) जी की नित्य वंदना और आरती पाठ से मन की चंचलता शांत होती है, एकाग्रता बढ़ती है एवं जीवन के सभी विघ्न-बाधाएं नष्ट होती हैं।

श्री भगवान हयग्रीव (भगवान विष्णु के अवतार) की समस्त आरतियाँ
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!