मुख्य पृष्ठ / मंत्र संग्रह / Mantra / श्री सर्वार्थ सिद्धि दत्तात्रेय मंत्र - ॐ दिगंबराय विद्महे योगीशाय धीमहि तन्नः दत प्रचोदयात् तीव्र ज्ञान और गुरु कृपा प्राप्ति
माँ महालक्ष्मी कृपा · भगवान दत्तात्रेय Mantra

श्री सर्वार्थ सिद्धि दत्तात्रेय मंत्र - ॐ दिगंबराय विद्महे योगीशाय धीमहि तन्नः दत प्रचोदयात् तीव्र ज्ञान और गुरु कृपा प्राप्ति

श्री सर्वार्थ सिद्धि दत्तात्रेय मंत्र (ॐ दिगंबराय विद्महे...) के जप विधि, अर्थ, नियम, और तीव्र ज्ञान प्राप्ति के संपूर्ण विधान को जानें।

इष्ट देव भगवान दत्तात्रेय
शास्त्र स्रोत वैदिक सनातन धर्मग्रंथ एवं संहिता
उत्तम जप समय ब्रह्म मुहूर्त या प्रदोष काल
अनुशंसित माला स्फटिक या रुद्राक्ष माला

मूल संस्कृत महामंत्र

शुद्ध शास्त्रीय पाठ एवं उच्चारण स्वरूप

॥ ॐ तत्सत् · सिद्ध वैदिक महामंत्र ॥
ॐ दिगंबराय विद्महे योगीशाय धीमहि तन्नः दत प्रचोदयात्
सरल हिंदी भावार्थ:

हम दिगंबर स्वरूप भगवान दत्तात्रेय को जानते हैं, उन योगेश्वर का हम ध्यान करते हैं, वे दत्तात्रेय भगवान हमें तीव्र ज्ञान और बुद्धि के लिए प्रेरित करें।

विस्तृत आध्यात्मिक व्याख्या एवं शास्त्रीय विवेचन

मंत्र का गूढ़ रहस्य एवं साधना विधि

मंत्र का उद्गम एवं ऋषि-छंद-देवता

सनातन धर्म और अध्यात्म की अनंत परंपरा में भगवान श्री दत्तात्रेय को त्रिदेवों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर—का संयुक्त एवं साक्षात् अवतार माना गया है। वे अद्वैत वेदांत और योग मार्ग के आदिगुरु हैं। 'श्री सर्वार्थ सिद्धि दत्तात्रेय मंत्र' वस्तुतः दत्तात्रेय गायत्री का ही एक अमोघ एवं तीव्र स्वरूप है, जो साधक को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों ही दृष्टियों से परिपूर्ण करता है। वैदिक काल से ही गायत्री छंद की अद्भुत महिमा रही है, और जब इस छंद में भगवान दत्तात्रेय का आह्वान किया जाता है, तो यह ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं को साधक के पक्ष में केंद्रित कर देता है।

इस मंत्र के ऋषि स्वयं वेदव्यास अथवा दत्तात्रेय परंपरा के सिद्ध आचार्य माने जाते हैं। इसका छंद 'गायत्री' है, जिसमें चौबीस अक्षर होते हैं और जो परम चेतना को जाग्रत करने का सामर्थ्य रखता है। इसके देवता साक्षात् परब्रह्म स्वरूप भगवान दत्तात्रेय हैं, जो अत्रि ऋषि और अनुसूया के पुत्र रूप में प्रकट हुए। इस मंत्र के स्मरण मात्र से साधक के जीवन के समस्त अवरोध समाप्त होने लगते हैं और गुरु तत्व की प्राप्ति होती है, जो कि मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।

यहाँ श्री सर्वार्थ सिद्धि दत्तात्रेय मंत्र का मूल संस्कृत पाठ देवनागरी लिपि में तथा इसका प्रामाणिक आंग्ल लिप्यंतरण दिया गया है, ताकि उच्चारण में पूर्ण शुद्धता बनी रहे।

मूल देवनागरी मंत्र:
ॐ दिगंबराय विद्महे योगीशाय धीमहि तन्नः दत प्रचोदयात्।
Phonetic Transliteration:
Om Digambaraya Vidmahe Yogishaya Dhimahi Tannah Dattah Prachodayat.

मंत्र जप में उच्चारण की शुद्धता का अत्यधिक महत्व होता है। 'दिगंबराय' शब्द का अर्थ है दिशाएं ही जिनके वस्त्र हैं (अर्थात अंबर शून्य और अनंत है), 'विद्महे' का अर्थ हम जानते हैं, 'योगीशाय' योगियों के ईश्वर, 'धीमहि' हम ध्यान करते हैं, 'तन्नः दत प्रचोदयात्' हमारे उस दत्तात्रेय प्रभु हमें प्रेरित करें।

मंत्र के प्रत्येक शब्द का गहन दार्शनिक और आध्यात्मिक अर्थ है। जब साधक अर्थ को समझकर जप करता है, तो मंत्र की प्रभावशीलता कई गुना बढ़ जाती है:

  • ॐ : ब्रह्मांड का मूल नाद, प्रणव मंत्र, जिससे संपूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति हुई है।
  • दिगंबराय : जिनका कोई आवरण नहीं है, जो आकाश की भांति अनंत और मुक्त हैं।
  • विद्महे : हम उनके अस्तित्व को जानते हैं, पहचानते हैं और स्वीकार करते हैं।
  • योगीशाय : जो सभी योगियों, सिद्धों और संन्यासियों के भी अधीश्वर हैं।
  • धीमहि : हम उन परम प्रभु के स्वरूप का अपने हृदय में ध्यान करते हैं।
  • तन्नः : वे हमारे (मन और बुद्धि को)...
  • दत (Dattah / Dattatreya): भगवान दत्तात्रेय...
  • प्रचोदयात् : सत्प्रेरणा दें, हमारी बुद्धि को प्रदीप्त करें, तीव्र ज्ञान प्रदान करें।

भावार्थ: हम उन अनंत स्वरूप, दिगंबर, योगियों के स्वामी भगवान दत्तात्रेय को जानते हैं और उनका ध्यान करते हैं। हे प्रभु! आप हमारी बुद्धि और चेतना को प्रदीप्त करें तथा हमें समस्त संशयों से मुक्त कर तीव्र ज्ञान की प्राप्ति कराएं।

किसी भी वैदिक या तांत्रिक मंत्र के अनुष्ठान से पूर्व विनियोग और न्यास का विधान अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इससे शरीर और मन में दैवीय ऊर्जा का संचार होता है।

विनियोग

दाएं हाथ में जल लेकर निम्नलिखित विनियोग मंत्र का उच्चारण करें और जल को जमीन पर छोड़ दें:

अस्य श्री दत्तात्रेय गायत्री मंत्रस्य अत्रि ऋषिः, गायत्री छन्दः, दत्तात्रेयो देवता, सर्वार्थ सिद्धि प्राप्ति विनियोगः।

ध्यान श्लोक

जप से पूर्व भगवान दत्तात्रेय के इस सुंदर ध्यान श्लोक का मानसिक पाठ करना चाहिए:

दिगंबरं भस्मसुगन्धितं च चक्रं त्रिशूलं डमरूं दधानम्।
स्मृत्या च पापं हरतं प्रसन्ने भक्तप्रियायै सततं नमामि॥

इस ध्यान में भगवान दत्तात्रेय के तीन सिर, छह भुजाएं और उनके हाथों में सुदर्शन चक्र, त्रिशूल, डमरू आदि दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का स्मरण किया जाता है, जो साधक की रक्षा करते हैं।

इस मंत्र की साधना के लिए कुछ विशिष्ट नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

  • माला का चयन: इस मंत्र के जप के लिए 'स्फटिक माला' या 'रुद्राक्ष माला' सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है। स्फटिक माला मन को शांत और एकाग्र करती है, जबकि रुद्राक्ष ऊर्जा को ऊर्ध्वगामी बनाता है।
  • जप संख्या: प्रतिदिन कम से कम 1 माला (108 बार) का जप अवश्य करना चाहिए। विशेष सिद्धि या अनुष्ठान के लिए इसे 11 माला प्रतिदिन 41 दिनों तक किया जा सकता है।
  • सर्वोत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4:00 बजे से 6:00 बजे के बीच) या संध्याकाल (प्रदोष काल) इस मंत्र के जप के लिए सबसे उत्तम माना जाता है।
  • दिशा: साधक को उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठना चाहिए। आसन कुश या ऊन का होना चाहिए।

श्री सर्वार्थ सिद्धि दत्तात्रेय मंत्र के नित्य और विधि-विधान पूर्वक जप से साधक को अकल्पनीय लाभ प्राप्त होते हैं:

  • तीव्र ज्ञान एवं स्मरण शक्ति: विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए यह मंत्र बुद्धि को तीव्र करने और एकाग्रता बढ़ाने में रामबाण सिद्ध होता है।
  • गुरु कृपा प्राप्ति: जिन लोगों को योग्य गुरु की तलाश है या जिन्हें अपने वर्तमान गुरु से पूर्ण मार्गदर्शन चाहिए, उन्हें इस मंत्र से साक्षात गुरु दत्तात्रेय की कृपा मिलती है।
  • सर्वार्थ सिद्धि: जीवन के प्रत्येक क्षेत्र (व्यापार, नौकरी, पारिवारिक शांति, स्वास्थ्य) में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है।
  • नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति: भूत-प्रेत बाधा, बुरी नजर, मानसिक अवसाद और अज्ञात भय का नाश होता है।

साधना मार्ग में पवित्रता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखना पड़ता है:

  • सात्विकता: अनुष्ठान काल में पूर्ण रूप से सात्विक भोजन (प्याज-लहसुन रहित) ग्रहण करें। मांस, मदिरा और तंबाकू का सेवन वर्जित है।
  • ब्रह्मचर्य: साधना के दिनों में शारीरिक और मानसिक ब्रह्मचर्य का सख्ती से पालन करें।
  • नियमितता: जिस समय और स्थान पर जप शुरू करें, प्रयास करें कि रोज उसी समय और स्थान पर जप हो।
  • गोपनीयता: अपनी साधना और मंत्र जाप की संख्या को दूसरों के सामने प्रकट न करें।

क्या महिला1s भी इस दत्तात्रेय मंत्र का जाप कर सकती हैं?

हाँ, भगवान दत्तात्रेय समस्त ब्रह्मांड के आदिगुरु हैं। माता अनुसूया के पुत्र होने के कारण वे मातृशक्ति का अत्यधिक सम्मान करते हैं। महिलाएं पूरी श्रद्धा और पवित्रता के साथ इस मंत्र का जप कर सकती हैं।

क्या इस मंत्र के लिए दीक्षा लेना अनिवार्य है?

सामान्य नित्य जप (1 माला) के लिए किसी विशेष दीक्षा की अनिवार्यता नहीं है। कोई भी आस्तिक व्यक्ति श्रद्धापूर्वक इसका जप कर सकता है। हालांकि, बड़े अनुष्ठान के लिए गुरु मार्गदर्शन श्रेष्ठ है।

मंत्र जप के समय कौन सा वस्त्र पहनना चाहिए?

पीले, श्वेत या लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनकर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठना सबसे उत्तम माना गया है।

यह मंत्र कितने दिनों में अपना प्रभाव दिखाने लगता है?

यह साधक की श्रद्धा, एकाग्रता और पवित्रता पर निर्भर करता है। सामान्यतः 21 से 41 दिनों के निरंतर जप से मानसिक शांति और सकारात्मक परिवर्तन अनुभव होने लगते हैं।

जाप के सिद्ध फल व सावधानियां

पुण्य लाभ एवं साधना के महत्वपूर्ण नियम

प्राप्त होने वाले पुण्य लाभ
तीव्र बुद्धि, स्मरण शक्ति, गुरु कृपा, और सर्वार्थ सिद्धि
साधना में ध्यान रखने योग्य नियम
सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य और पवित्रता का पूर्ण पालन

मंत्र से जुड़े मुख्य प्रश्न व समाधान (FAQs)

श्रद्धालुओं द्वारा पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न

इस पावन मंत्र का जप ब्रह्म मुहूर्त या प्रदोष काल में स्फटिक या रुद्राक्ष माला से १०८ बार करना सबसे शुभ व फलदायी माना गया है।
हाँ, मानसिक जप (मानस जप) को शास्त्रों में वाचिक जप से भी अधिक प्रभावशाली और फलदायी माना गया है। इसे आप शांत चित्त होकर कभी भी कर सकते हैं।
नियमित जप से अकाल मृत्यु व नकारात्मकता का भय समाप्त होता है, मानसिक शांति व सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और इष्टदेव की असीम कृपा प्राप्त होती है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री

यह लेख वेदों, उपनिषदों एवं सनातन धर्मग्रंथों के उपलब्ध संदर्भों के आधार पर भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन हेतु तैयार किया गया है।

मंत्र जप के ५ स्वर्णिम नियम
शुद्धता: स्नान के उपरांत स्वच्छ वस्त्र धारण कर पवित्र आसन पर बैठें।
दिशा: पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके जप करना सर्वोत्तम है।
माला का नियम: जप करते समय माला पर तर्जनी उंगली का स्पर्श न होने दें।
एकाग्रता: मंत्र के शब्दों के भावार्थ का हृदय में निरंतर ध्यान करें।
नियमितता: प्रतिदिन निश्चित समय और संख्या में जप करने से सिद्धि मिलती है।
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!