वैदिक मंत्र संग्रह · पावन जप
11 पावन मंत्र उपलब्ध
१०८ जप विधि व भावार्थ

भक्ति एवं समर्पण मंत्र

भक्ति एवं समर्पण मंत्र के सभी शक्तिशाली वैदिक मंत्र, बीज मंत्र, १०८ जप विधि, साधना नियम एवं सरल हिंदी भावार्थ।

१०८ जप माला विधि
संस्कृत व हिंदी शुद्ध उच्चारण संदर्भ
बीज मंत्र ऊर्जा चक्र जागरण
संपादकीय संदर्भ-आधारित सामग्री

भक्ति एवं समर्पण मंत्र सूची

नित्य साधना, मन की शांति एवं मनोकामना पूर्ति हेतु संपूर्ण मंत्र संकलन

कुल 11 मंत्र
Vishnu १०८ जप विधि

विष्णु मंत्र – ॐ विष्णवे नमः: अर्थ, जप विधि, तुलसी माला नियम, लाभ व शास्त्र प्रमाण

भगवान श्री हरि विष्णु के पंचाक्षर मंत्र "ॐ विष्णवे नमः" का सम्पूर्ण पदच्छेद, शब्दार्थ, विस्तृत भावार्थ, तुलसी माला जप विधि, ग…

Parvati १०८ जप विधि

पार्वती मंत्र – ॐ श्री पार्वत्यै नमः: अर्थ, जप विधि, विवाह बाधा निवारण, लाभ व शास्त्र प्रमाण

जगज्जननी माँ पार्वती के पावन मंत्र "ॐ श्री पार्वत्यै नमः" का सम्पूर्ण पदच्छेद, शब्दार्थ, भावार्थ, कुण्डलिनी रहस्य, जप विधि, स…

Hanuman १०८ जप विधि

हनुमान मंत्र – ॐ श्री हनुमते नमः: अर्थ, जप विधि, रुद्राक्ष माला नियम, लाभ व शास्त्र प्रमाण

पवनपुत्र श्री हनुमान जी के पावन षडक्षर मंत्र "ॐ श्री हनुमते नमः" का सम्पूर्ण पदच्छेद, शब्दार्थ, विस्तृत भावार्थ, रुद्राक्ष मा…

Rama १०८ जप विधि

राम बीज मंत्र – ॐ रां रामाय नमः: अर्थ, जप विधि, तुलसी माला नियम, लाभ व शास्त्र प्रमाण

प्रभु श्री राम के महाशक्तिशाली बीज मंत्र "ॐ रां रामाय नमः" का सम्पूर्ण पदच्छेद, शब्दार्थ, भावार्थ, अग्नि बीज रहस्य, तुलसी माल…

Rudra (Shiva) १०८ जप विधि

एकादश रुद्र महामंत्र – ॐ नमो भगवते रुद्राय: अर्थ, जप विधि, शत्रु-रोग निवारण, लाभ व शास्त्र प्रमाण

देवाधिदेव भगवान रुद्र के पावन महामंत्र "ॐ नमो भगवते रुद्राय" का सम्पूर्ण पदच्छेद, शब्दार्थ, भावार्थ, एकादश रुद्र रहस्य, रुद्र…

Krishna १०८ जप विधि

कृष्ण बीज मंत्र – ॐ क्लीं कृष्णाय नमः: अर्थ, जप विधि, कामबीज रहस्य, आकर्षण, लाभ व शास्त्र प्रमाण

भगवान श्री कृष्ण के महाशक्तिशाली कामबीज मंत्र "ॐ क्लीं कृष्णाय नमः" का सम्पूर्ण पदच्छेद, शब्दार्थ, भावार्थ, आकर्षण रहस्य, तुल…

Vishnu १०८ जप विधि

अष्टाक्षर नारायण महामंत्र – ॐ नमो नारायणाय: अर्थ, जप विधि, तुलसी माला नियम, लाभ व शास्त्र प्रमाण

भगवान श्रीमन नारायण के पावन अष्टाक्षर महामंत्र "ॐ नमो नारायणाय" का सम्पूर्ण पदच्छेद, शब्दार्थ, भावार्थ, रामानुज परंपरा, तुलसी…

Rama १०८ जप विधि

श्री राम षडक्षर मंत्र – ॐ श्री रामाय नमः: अर्थ, जप विधि, तारक रहस्य, लाभ व शास्त्र प्रमाण

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के पावन षडक्षर तारक मंत्र "ॐ श्री रामाय नमः" का सम्पूर्ण पदच्छेद, शब्दार्थ, विस्तृत भावार्थ…

Vishnu १०८ जप विधि

द्वादशाक्षर मुक्ति महामंत्र – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय: अर्थ, जप विधि, ध्रुव प्रसंग, लाभ व शास्त्र प्रमाण

परम पुरुषोत्तम भगवान वासुदेव के पावन द्वादशाक्षर मुक्ति मंत्र "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" का सम्पूर्ण पदच्छेद, शब्दार्थ, भावार्थ,…

Krishna १०८ जप विधि

हरे कृष्ण महामंत्र – कलिसंतरण महामंत्र: अर्थ, जप विधि, चैतन्य महाप्रभु महिमा, लाभ व उपनिषद् प्रमाण

कलियुग के परम तारक "हरे कृष्ण महामंत्र" का सम्पूर्ण पदच्छेद, शब्दार्थ, भावार्थ, अचिंत्य-भेदाभेद दर्शन, तुलसी माला जप विधि, दस…

Shiva १०८ जप विधि

शिव पंचाक्षर महामंत्र – ॐ नमः शिवाय: अर्थ, जप विधि, पंचतत्व रहस्य, लाभ व शिव पुराण प्रमाण

देवाधिदेव भगवान शिव के पावन पंचाक्षर महामंत्र "ॐ नमः शिवाय" का सम्पूर्ण पदच्छेद, शब्दार्थ, भावार्थ, पंचतत्व विज्ञान, रुद्राक्…

मंत्र साधना एवं 108 जप के सार्वभौमिक नियम

शास्त्रसम्मत विधि से जप करने पर ही मंत्र की पूर्ण ऊर्जा एवं मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है

1. ब्रह्ममुहूर्त एवं समय

सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्ममुहूर्त, प्रातः 4:00 से 6:00 बजे) अथवा संध्याकाल में जप करने से मन स्वतः एकाग्र व शांत रहता है।

2. आसन एवं दिशा

कुशा, ऊनी अथवा स्वच्छ सूती आसन पर बैठें। जप के समय साधक का मुख सदैव पूर्व (East) अथवा उत्तर (North) दिशा की ओर होना चाहिए।

3. 108 जप माला विधि

रुद्राक्ष, तुलसी अथवा स्फटिक माला से 108 बार जप करें। माला फेरते समय सुमेरु (शीर्ष दाने) को कभी लांघा नहीं जाता।

4. भाव एवं एकाग्रता

मंत्र के अर्थ का ध्यान करते हुए उपांशु (होंठ हिलें पर आवाज न आए) या मानस जप करना शास्त्रों में सर्वाधिक फलदायी माना गया है।

भक्ति एवं समर्पण मंत्र का आध्यात्मिक महत्व

सनातन परंपरा में भक्ति एवं समर्पण मंत्र का पाठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मबल की प्राप्ति का सशक्त माध्यम है। वैदिक ऋषियों ने प्रत्येक मंत्र में ध्वनि कंपन (Sound Frequency) का ऐसा संयोजन किया है जो साधक की चेतना को उच्चतम स्तर पर प्रतिष्ठित करता है।

१. बीज मंत्र और उनकी दिव्य शक्ति

इस श्रेणी के मंत्रों में निहित बीज मंत्र शरीर के ऊर्जा चक्रों (Chakra System) को सक्रिय करते हैं। जब साधक एकाग्रचित्त होकर नित्य जप करता है, तो उसके भीतर की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है और दैवीय अनुकंपा का अनुभव होता है।

संपादकीय सुझाव: मंत्र जप के समय मन में किसी प्रकार का संशय न रखें। पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध आसन और नियत समय पर जप करने से मंत्र सिद्धि शीघ्र प्राप्त होती है।

२. जप के उपरांत क्षमा प्रार्थना

मंत्र जप पूर्ण होने के बाद कम से कम २ मिनट मौन ध्यान करें और अंत में ईश्वर से अनजाने में हुई किसी भी त्रुटि (मात्रा, स्वर अथवा उच्चारण) के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

भक्ति एवं समर्पण मंत्र – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

शास्त्रसम्मत संदर्भों के आधार पर तैयार महत्वपूर्ण जिज्ञासाएं एवं समाधान

शास्त्रों के अनुसार प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त अथवा संध्याकाल में शुद्ध आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके 108 बार रुद्राक्ष अथवा तुलसी माला से जप करना सर्वोत्तम माना गया है।

हाँ, शुद्ध भाव, पवित्रता और श्रद्धा के साथ कोई भी साधक इन पावन वैदिक स्तुति मंत्रों का जप कर सकता है।

भारतीय ज्योतिष और खगोल शास्त्र में 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नक्षत्र के 4 चरण होते हैं (27 × 4 = 108)। 108 बार मंत्र जप करने से ब्रह्मांड की समस्त सकारात्मक ऊर्जा हमारे शरीर और मन के साथ संरेखित होती है।

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