मंत्र का उद्गम एवं ऋषि-छंद-देवता
वैदिक परंपरा में अश्विनी कुमारों को देवताओं का चिकित्सक माना गया है। ऋग्वेद में इनका वर्णन अत्यंत तेजस्वी, युवा और कल्याणकारी शक्तियों के रूप में मिलता है। अश्विनी कुमार सूर्य देव और संज्ञा के पुत्र हैं। वे न केवल शारीरिक रोगों को दूर करते हैं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक व्याधियों का भी निवारण करने में सक्षम हैं। 'अश्विनी' शब्द का अर्थ है 'प्रकाश लाने वाला'। ये मंत्र साधक के भीतर प्राण ऊर्जा का संचार करते हैं।
मूल शुद्ध मंत्र
ॐ अश्विनीकुमाराभ्यां नमः
उच्चारण: Om Ashwini-Kumarabhyam Namah
पद-दर-पद अर्थ एवं भावार्थ
ॐ: यह ब्रह्मांड का मूल नाद है। अश्विनीकुमाराभ्यां: दोनों अश्विनी कुमारों को (द्विवचन)। नमः: मेरा नमन या नमस्कार है। भावार्थ यह है कि हे देव वैद्य अश्विनी कुमार, मैं आपकी शरण में हूँ, मेरे शरीर और मन के समस्त विकारों को दूर कर मुझे आरोग्य प्रदान करें।
विनियोग, न्यास एवं ध्यान श्लोक
विनियोग: अस्य श्री अश्विनी कुमार मंत्रस्य, अश्विनी कुमार ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, अश्विनी कुमारौ देवता, आरोग्य सिद्धये जपे विनियोगः। ध्यान: 'स्वर्ण कांति वाले, अश्व पर सवार, हाथों में अमृत कलश लिए हुए देवताओं के वैद्य अश्विनी कुमारों का मैं ध्यान करता हूँ।'
जप विधि व नियम
इस मंत्र का जप प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में करना सर्वोत्तम है। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। रुद्राक्ष या स्फटिक की माला का प्रयोग करें। जप के समय मन में पूर्ण विश्वास रखें कि अश्विनी कुमार आपकी चिकित्सा कर रहे हैं।
विशिष्ट लाभ एवं फलश्रुति
यह मंत्र असाध्य रोगों के उपचार में सहायक है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और कायाकल्प में मदद करता है। नियमित जप से मानसिक तनाव दूर होता है और ओज-तेज की वृद्धि होती है।
सावधानियां एवं नियम
साधना काल में सात्विक भोजन करें। मांस-मदिरा का पूर्ण त्याग करें। मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें। ब्रह्मचर्य का पालन करना इस साधना की सफलता के लिए अनिवार्य है।