"आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं" यह अत्यंत ही पावन और भक्ति रस से ओत-प्रोत भजन सनातन धर्म की शक्ति स्वरूपा माँ दुर्गा की आराधना का एक उत्कृष्ट माध्यम है। जगजननी, जो इस संपूर्ण ब्रह्मांड की जननी हैं, उनकी स्तुति करना जीवात्मा के लिए परम कल्याणकारी माना गया है। यह भजन न केवल देवी के प्रति हमारी श्रद्धा को व्यक्त करता है, बल्कि यह हमें उनके वात्सल्य और करुणा के सागर में डुबो देता है। संध्याकाल में जब भक्त इस आरती का गायन करते हैं, तो वातावरण में एक दिव्य ऊर्जा का संचार होता है, जो मन की चंचलता को शांत कर उसे एकाग्रता और भक्ति की ओर ले जाता है। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी समस्त चिंताओं को माँ के चरणों में समर्पित कर देता है, जिससे उसे मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल की प्राप्ति होती है।
सम्पूर्ण आरती पाठ | Complete Aarti Lyrics
आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं,
मैया मैं तेरी गाऊं, जगजननी मैं तेरी गाऊं।
सिंहासन पर तुम विराजी, महिमा तेरी गाऊं,
भक्तों की तुम पीर हरो माँ, चरणों में शीश नवाऊं।
आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं...
लाल चुनरिया सिर पर सोहे, मुख पर तेज निराला,
हाथों में खड्ग और त्रिशूल, गले में मुण्डन माला।
दुष्टों का तुम नाश करो माँ, भक्तों को अपनाऊं,
आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं...
ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी ध्यावें, शेष न पावे पारा,
वेद पुराणों ने गाया है, महिमा का विस्तार तुम्हारा।
मैं तो हूँ एक बालक तेरा, शरण तुम्हारी आऊं,
आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं...
जो भी आए द्वार तुम्हारे, खाली न कोई जाए,
सच्चे मन से जो भी ध्यावे, मनवांछित फल पाए।
भक्ति का वरदान दो मैया, यही आस लगाऊं,
आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं...
आरती का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Meaning & Bhavarth
इस आरती में भक्त माँ जगदम्बा के विराट स्वरूप का वर्णन कर रहा है। भक्त कहता है कि हे माँ, मैं आपकी आरती गाकर स्वयं को धन्य महसूस कर रहा हूँ। आप सिंहासन पर विराजमान होकर भक्तों के दुखों का निवारण करती हैं। आपके मुख पर जो तेज है, वह अलौकिक है। आपके हाथों में शस्त्र और गले में मुण्डन माला आपके रौद्र रूप को दर्शाती है, जो दुष्टों के विनाश के लिए है, किंतु भक्तों के लिए आप अत्यंत दयालु हैं। भक्त स्वीकार करता है कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश भी आपकी महिमा का गुणगान करते हैं, तो मैं तो एक तुच्छ बालक हूँ। अंत में, भक्त माँ से भक्ति का वरदान मांगता है ताकि उसका जीवन सफल हो सके।
कठिन शब्दों के अर्थ | Difficult Words
| शब्द | सरल अर्थ | संदर्भ |
|---|---|---|
| जगजननी | संसार की माता | देवी दुर्गा के लिए प्रयुक्त |
| पीर हरो | दुख दूर करना | भक्तों की पीड़ा का निवारण |
| खड्ग | तलवार | देवी के शस्त्र का प्रतीक |
| मनवांछित | मन की इच्छा के अनुसार | माँ की कृपा से मिलने वाला फल |
आरती में वर्णित देवी की महिमा | Glory of the Deity
माँ जगदम्बा को 'आद्या शक्ति' कहा गया है। वे सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार की अधिष्ठात्री हैं। इस आरती में उनके 'सौम्य' और 'रौद्र' दोनों रूपों का सुंदर समन्वय है। जहाँ एक ओर वे भक्तों की पीर हरने वाली करुणामयी माँ हैं, वहीं दूसरी ओर वे दुष्टों का संहार करने वाली शक्ति भी हैं।
आरती करने की सही विधि एवं थाली सज्जा | Aarti Vidhi & Thali Preparation
आरती की थाली में शुद्ध घी का दीपक, कपूर, अक्षत (चावल), रोली, पुष्प और धूप-दीप रखें। आरती करते समय घंटी और शंख का नाद करना अत्यंत शुभ माना जाता है। आरती हमेशा देवी के चरणों से शुरू करके मुख मंडल तक घुमानी चाहिए।
आरती का आध्यात्मिक संदेश एवं दैनिक जीवन सीख
यह आरती हमें सिखाती है कि अहंकार का त्याग करके ही ईश्वर की शरण में जाया जा सकता है। जिस प्रकार भक्त स्वयं को 'बालक' मानकर माँ की शरण में जाता है, उसी प्रकार हमें भी अपने जीवन के समस्त कर्मों को ईश्वर को समर्पित कर देना चाहिए।
एक नजर में आरती की जानकारी | Quick Information
| आरती का नाम | आरती जगजननी मैं तेरी गाऊं |
|---|---|
| आराध्य देव | माँ दुर्गा / जगदम्बा |
| मुख्य भाव | शरणागति एवं भक्ति |
| उपयुक्त अवसर | नवरात्रि, दैनिक पूजा, संध्या वंदन |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न: यह आरती किस समय करनी चाहिए?
उत्तर: यह आरती प्रातः काल या संध्या काल में पूजा के अंत में करना सर्वोत्तम है। - प्रश्न: क्या इसे घर पर गाया जा सकता है?
उत्तर: हाँ, इसे घर पर श्रद्धापूर्वक गाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। - प्रश्न: आरती के समय किन बातों का ध्यान रखें?
उत्तर: मन में पूर्ण पवित्रता और देवी के प्रति अटूट विश्वास रखें। - प्रश्न: क्या आरती के बाद क्षमा प्रार्थना करनी चाहिए?
उत्तर: हाँ, पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए अंत में क्षमा प्रार्थना अवश्य करें। - प्रश्न: नवरात्रि में इसका क्या महत्व है?
उत्तर: नवरात्रि के नौ दिनों में माँ के विभिन्न स्वरूपों की पूजा के समय यह आरती विशेष फलदायी है।
संपादकीय रूप से तैयार सामग्री।
स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References
यह सामग्री पौराणिक ग्रंथों, देवी भागवत पुराण और सनातन भक्ति परंपराओं के आधार पर संकलित की गई है।
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