मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 तैनूं तेरेयां नरातियां दी वधाई ऐ – नवरात्रि भेंट
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
(Tainu Tereyan Naratiyan Di Vadhai Ae – Navratri Bhent by Ansh Sharma)
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (पंजाबी-हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
तैनूं तेरेयां नरातियां दी वधाई ऐ, वधाई ऐ, वधाई माँ।
तैनूं मेहरांवाली कहंदे ने, मेहरां ही मेहरां वरसाईं माँ।
तैनूं तेरेयां नरातियां दी वधाई ऐ॥
॥ अंतरा १ – मंदर सजे, फुल्लां महकाए ॥
सज गए ने तेरे मंदर माँ,
असीं घर वी अपने सजाए ने,
तारे पए जगमग करदे ने,
फुल्लां ने राह महकाए ने।
इक सोहणी जई चुन्नी वी,
माये तेरे लई बनाई ऐ।
तैनूं तेरेयां नरातियां दी वधाई ऐ॥
॥ अंतरा २ – ज्योत जगाके, रौनकां नाल तेरे ॥
तेरी ज्योत जगाके अम्मीये नी,
राह तकदे पए ने लाल तेरे,
तेरे नाल ही खुशियां खेड़े माँ,
सारे घर च रौनकां नाल तेरे।
असीं तेरे बच्चे हां,
ते तूं साड़ी भोली माई ऐं।
तैनूं तेरेयां नरातियां दी वधाई ऐ॥
॥ अंतरा ३ – ढोल नगाड़े, चंदन दी चौकी ॥
वजदे ने ढोल नगाड़े माँ,
हर पासे रौनकां छाईयां ने,
बच्चेयां ने माँ नाल मिलणा ऐ,
किन्नी सोहनियां घड़ियां आईयां ने।
चंदन दी चौकी वी,
माये तेरे लई बनाई ऐ।
तैनूं तेरेयां नरातियां दी वधाई ऐ॥
🚩 जय माता जी 🚩
🎤 गायक : अंश शर्मा
🎵 तर्ज : पंजाबी भेंट / जगराता भजन
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत हृदयस्पर्शी नवरात्रि भेंट (भजन) है, जो माँ दुर्गा को नवरात्रि के पावन अवसर पर हार्दिक बधाई देता है। “तैनूं तेरेयां नरातियां दी वधाई ऐ, वधाई ऐ, वधाई माँ” – भक्त माँ को उनके नवरात्रों की बधाई देते हैं। माँ को “मेहरांवाली” (कृपा करने वाली) कहा गया है, जो कृपा ही कृपा बरसाती हैं।
पहले अंतरे में भक्त कहते हैं कि माँ के मंदिर सज गए हैं, हमने अपने घर भी सजाए हैं। तारे जगमगा रहे हैं, फूलों ने राहें महका दी हैं। भक्तों ने माँ के लिए एक सुंदर चुन्नी भी बनाई है।
दूसरे अंतरे में – माँ की ज्योत जलाकर उनके बालक (भक्त) उनकी राह देख रहे हैं। सारे घर में खुशियाँ और रौनक माँ के साथ ही हैं। भक्त कहते हैं – “हम तेरे बच्चे हैं और तू हमारी भोली माई है।”
तीसरे अंतरे में ढोल-नगाड़े बज रहे हैं, हर ओर रौनक छाई है। बच्चों को माँ से मिलना है – कितनी सुंदर घड़ियाँ आई हैं। माँ के लिए चंदन की चौकी बनाई गई है।
यह भजन पंजाबी-हिन्दी मिश्रित भाषा में रचा गया है और नवरात्रि के जगरातों में गाया जाता है। यह माँ के प्रति भक्तों के प्रेम, समर्पण और कृतज्ञता को दर्शाता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
नवरात्रि की हार्दिक बधाई: यह गीत नवरात्रि के अवसर पर माँ दुर्गा का अभिनंदन करता है। “नरातियां दी वधाई” (नवरात्रों की बधाई) का भाव अद्वितीय है।
पंजाबी लोक शैली: “ढोल नगाड़े”, “चंदन दी चौकी”, “सोहणी चुन्नी” जैसे शब्द पंजाबी संस्कृति के सजीव चित्र प्रस्तुत करते हैं। यह भजन पंजाब के जगराता (जागरण) की परम्परा का अभिन्न अंग है।
माँ-बच्चे का नाता: “असीं तेरे बच्चे हां, ते तूं साड़ी भोली माई” – यह पंक्ति माँ दुर्गा और भक्तों के गहरे, आत्मीय संबंध को दर्शाती है।
💖 नवरात्रि का उल्लास और भक्ति
🎯 संदेश
नवरात्रि के नौ दिन माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम समय होते हैं। माँ के प्रति सच्ची भक्ति और उन्हें बधाई देने की यह भावना हर भक्त को उनके चरणों में समर्पित कर देती है।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन नवरात्रि के पावन पर्व पर माँ के मंदिरों और घरों में गूंजता है। यह हर भक्त के हृदय में माँ के प्रति प्रेम और श्रद्धा का संचार करता है।
🙏 जय माता दी ।। जय अंबे माँ ।। तैनूं तेरेयां नरातियां दी वधाई ऐ ।।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "तैनूं तेरेयां नरातियां दी वधाई ऐ (नवरात्रि भेंट) लिरिक्स - अंश शर्मा | Tainu Tereyan Naratiyan Di Vadhai Ae Navratri Bhent Lyrics" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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