मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे सुपरहिट भजन लिरिक्स (Dulhaniya Re Dulhaniya Re Lyrics in Hindi)
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
है सुंदर रूप मोहनिया,
है सुंदर रूप मोहनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
प्रथम दिन मां शैलपुत्री बेल सवारी,
मैंना जिनकी मात हिमाचल राजकुमारी।
बनी शिव शंकर की दुल्हनिया ,
बनी शिव शंकर की दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुजे दिन मां ब्रह्मचारिणी रूप निराला।
बाये कमंडल हाथ दाहिने जपती माला।
दुजे दिन मां ब्रह्मचारिणी रूप निराला।
बाये कमंडल हाथ दाहिने जपती माला।
मैया ओढ़े लाल चुनरिया,
मैया ओढ़े लाल चुनरिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
तीजे दिन मां चंद्रघंटा रूप तुम्हारा।
महेश मर्दिनी मात सिंह पर हो असवारा।
तीजे दिन मां चंद्रघंटा रूप तुम्हारा।
महेश मर्दिनी मात सिंह पर हो असवारा।
हो दुख संताप हरनीया हो दुख संताप हरनीया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
चौथे दिन कूष्मांडा अष्टभुजी करो आराधन।
अमृत कलशा मात करे ब्रह्मांड का पोषण।
चौथे दिन कूष्मांडा अष्टभुजी करो आराधन।
अमृत कलशा मात करे ब्रह्मांड का पोषण।
है मधुर मधुर मुस्कनिया,
है मधुर मधुर मुस्कनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
पंचम दिवस पर कमल बिराजे स्कंदमाता।
चतुर्भुजी मां कमल पुष्प है इनको भाता।
पंचम दिवस पर कमल बिराजे स्कंदमाता।
चतुर्भुजी मां कमल पुष्प है इनको भाता।
है सुंदर रूप मोहनिया,
है सुंदर रूप मोहनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
छठवें दिन में प्रकट भई कात्यायनी माता।
रूप चतुर्भुज सोने सी चमके है माता।
छठवें दिन में प्रकट भई कात्यायनी माता।
रूप चतुर्भुज सोने सी चमके है माता। शुमंगल मात करनीया,
शूमंगल मात करनीया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
वाहन गधा पर चढ़कर आवे कालरात्रि।
तीन नेत्र और चार भुजाएं कृपा पातरी।
वाहन गधा पर चढ़कर आवे कालरात्रि।
तीन नेत्र और चार भुजाएं कृपा पातरी।
मां असुर दमन है करणीया ,
मां असुर दमन है करनीया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
अष्टम दिवस महागौरी मां बेल सवारी।
श्वेत वर्ण श्रृंगार आभूषण शोभा न्यारी।
अष्टम दिवस महागौरी मां बेल सवारी।
श्वेत वर्ण श्रृंगार आभूषण शोभा न्यारी।
सोलह सिंगार करणीया ,
सोलह सिंगार करणीया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
नवमें दिन मां सिद्धयात्री कमल वासनी।
सब सिद्ध मां देने वाली वेद प्रकाशनी।
नवमें दिन मां सिद्धयात्री कमल वासनी।
सब सिद्ध मां देने वाली वेद प्रकाशनी।
जग पूजा मां के चरनिया,
जग पूजे मां के चरनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
हे शहनाज भवानी जिस दिन तुमको ध्यावे।
सुखी रखो संसार सकल जग यही मनावे।
हे शहनाज भवानी जिस दिन तुमको ध्यावे।
सुखी रखो संसार सकल जग यही मनावे।
है भक्त पखारे पैयां है भक्त पखारे पैयाँ रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
है सुंदर रूप मोहनिया,
है सुंदर रूप मोहनिया रे।
दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे,
नौ दिन बनी मां दुल्हनिया रे।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "दुल्हनिया रे दुल्हनिया रे सुपरहिट भजन लिरिक्स (Dulhaniya Re Dulhaniya Re Lyrics in Hindi) - Bhaktilok" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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