मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 जगदम्बा भवानी – तू जाने माँ तेरियाँ
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।
(Jagadamba Bhavani Tu Jaane Maa Teriyaan Lyrics In Hindi) – Hansraj Raghuvanshi Maa Bhajan 2026
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने,
तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने॥
॥ अंतरा १ ॥
माँ की ममता से ऊपर,
ना जग में कोई छाया है।
मैं राह तकूँ हर दिन तेरा,
तू ही मेरा साया है।
तुम रुद्राणी, तुम ब्रह्माणी,
तुमसे ही जग ये आया है।
मैं क्यों ना तुमको पूजूँ माँ,
तुमने ही मुझे बनाया है॥
॥ अंतरा २ ॥
जब मन ये मेरा डर से काँपे,
तुम हिम्मत भरने आना।
कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी,
मुझ पे कृपा बरसाना।
कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी,
मुझ पे कृपा बरसाना॥
जय माँ, जय माँ,
जय माँ, जय माँ॥
॥ अंतरा ३ ॥
चाहे पार करो, चाहे आर करो,
मेरी मैया तुम स्वीकार करो।
मैं आया जग से खा के धोखे,
अब नैया मेरी पार करो।
उद्धार करो माँ, मुझे प्यार करो माँ,
मैं जग का सताया, दुलार करो माँ।
जब भटकूँ मैं इस दुनिया से,
रस्ता तू मुझको दिखा देना।
कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी,
मुझ पे कृपा बरसाना।
कभी जगदंबा, कभी बनके भवानी,
मुझ पे कृपा बरसाना॥
तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने,
तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने॥
🎤 गायक :- हंसराज रघुवंशी (Hansraj Raghuvanshi)
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह भावपूर्ण भजन "जगदम्बा भवानी (तू जाने माँ तेरियाँ)" हंसराज रघुवंशी की सुरीली आवाज़ में माँ जगदम्बा और माँ भवानी के प्रति अगाध श्रद्धा और समर्पण को दर्शाता है। भजन का मूल स्वर एक भक्त की माँ के प्रति गहरी आस्था और उनसे मिलने वाली कृपा का वर्णन करता है।
"तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने" – यह मुखड़ा भक्त की उस गहरी आस्था को दर्शाता है जहाँ वह माँ से कहता है कि तू ही जाने तेरी बातें (तेरियाँ)। यह माँ के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास का प्रतीक है।
"माँ की ममता से ऊपर, ना जग में कोई छाया है" – भक्त कहता है कि इस संसार में माँ की ममता से बढ़कर कोई छाया (सुरक्षा) नहीं है। वह हर दिन माँ की राह तकता है, क्योंकि माँ ही उसका साया (सहारा) है।
"तुम रुद्राणी, तुम ब्रह्माणी, तुमसे ही जग ये आया है" – माँ को रुद्राणी (रुद्र की शक्ति) और ब्रह्माणी (ब्रह्मा की शक्ति) कहकर उनके सर्वोच्च स्वरूप का वर्णन किया गया है। यह संपूर्ण जगत माँ से ही उत्पन्न हुआ है। भक्त कहता है कि माँ ने ही उसे बनाया है, इसलिए वह उनकी पूजा करता है।
"जब मन ये मेरा डर से काँपे, तुम हिम्मत भरने आना" – जब कभी भक्त का मन डर से काँपता है, वह माँ से प्रार्थना करता है कि वे कभी जगदम्बा के रूप में, कभी भवानी के रूप में आकर उसमें हिम्मत भर दें और उस पर कृपा बरसाएँ।
"चाहे पार करो, चाहे आर करो, मेरी मैया तुम स्वीकार करो" – भक्त कहता है कि माँ चाहे उसे पार करें (संसार सागर से पार) या आर (विघ्न) करें, वह सब स्वीकार है। वह जग से धोखा खाकर माँ के पास आया है, और उसकी नैया (जीवन रूपी नाव) को पार करने की प्रार्थना करता है।
"उद्धार करो माँ, मुझे प्यार करो माँ, मैं जग का सताया, दुलार करो माँ" – भक्त माँ से उद्धार, प्यार और दुलार की याचना करता है। वह इस दुनिया से सताया हुआ है, इसलिए जब भी वह भटके, माँ उसे रास्ता दिखा दे।
🔍 माँ भजन का विशेष महत्त्व
"तू जाने माँ तेरियाँ" का भाव: यह मुखड़ा बहुत ही गहरा और मार्मिक है। "तेरियाँ" का अर्थ है तेरी बातें या तेरे भाव। भक्त कहता है कि हे माँ, तू ही जाने तेरी बातें – यह उस परिपूर्ण समर्पण को दर्शाता है जहाँ भक्त माँ के रहस्यों को जानने का दावा नहीं करता, बस उन पर विश्वास करता है।
माँ के विभिन्न रूप: इस भजन में माँ के कई रूपों का उल्लेख है – जगदम्बा (जगत की माता), भवानी (कल्याणकारी), रुद्राणी (रुद्र की शक्ति), ब्रह्माणी (ब्रह्मा की शक्ति)। यह दर्शाता है कि माँ ही सभी शक्तियों का स्रोत हैं।
"जय माँ, जय माँ" का उद्घोष: बीच में आने वाला यह जयकार भजन को और अधिक भक्तिमय बना देता है। यह माँ के प्रति श्रद्धा और उल्लास को दर्शाता है।
"चाहे पार करो, चाहे आर करो": यह पंक्ति भक्त के अद्भुत समर्पण को दर्शाती है। वह कहता है कि माँ चाहे उसे पार लगाए या विघ्न दे, वह सब स्वीकार है। यह पूर्ण समर्पण का भाव है।
हंसराज रघुवंशी का गायन: गायक हंसराज रघुवंशी ने अपनी सुरीली और भावपूर्ण आवाज़ में इस भजन को जीवंत कर दिया है। उनके गायन में वह गहराई और श्रद्धा है जो इस भजन को विशेष बनाती है। यह भजन हर उस भक्त के दिल की आवाज़ है जो माँ के दरबार में अपनी व्यथा लेकर आता है और उनसे कृपा की भीख माँगता है।
💖 माँ की कृपा का आह्वान
🎯 संदेश
इस भजन का मूल संदेश यह है कि माँ ही इस जगत की सबसे बड़ी शक्ति हैं। वे रुद्राणी हैं, ब्रह्माणी हैं, जगदम्बा हैं और भवानी हैं। उनकी ममता से बढ़कर इस संसार में कोई छाया नहीं। जब मन डर से काँपता है, तो माँ ही हिम्मत भरने आती हैं। जो भी जग से धोखा खाकर, सताया हुआ माँ के पास आता है, माँ उसे प्यार और दुलार देती हैं, उसकी नैया पार लगाती हैं, और उसे सही रास्ता दिखाती हैं।
✨ समर्पण की पराकाष्ठा
तू जाने माँ तेरियाँ केवल एक भजन नहीं, बल्कि समर्पण की उस पराकाष्ठा का प्रतीक है जहाँ भक्त माँ के प्रति अपना सब कुछ समर्पित कर देता है। यह भजन हर उस व्यक्ति के दिल की आवाज़ है जो माँ की शरण में आना चाहता है, जो जग के धोखों से तंग आकर माँ के दरबार में पहुँचता है, और माँ से केवल प्यार, दुलार और उद्धार की भीख माँगता है। यह भजन हमें सिखाता है कि माँ के दरबार में सबका स्वागत है, चाहे कोई कैसा भी हो।
🙏 ॐ श्री जगदम्बायै नमः || जय माँ भवानी || जय माँ जगदम्बा 🙏
गायक: हंसराज रघुवंशी | Singer: Hansraj Raghuvanshi
॥ तू जाने माँ तेरियाँ, तू जाने ॥
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "Jagadamba Bhavani Tu Jaane Maa Teriyaan Lyrics (जगदम्बा भवानी तू जाने माँ तेरियाँ) – Hansraj Raghuvanshi Maa Bhajan 2026" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।
भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।
मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?
यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?
माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।
क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?
हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।
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