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Durga Bhajan Lyrics

Tumhi Meri Naiya Tumhi Ho Khavaiya Lyrics (Durga Bhajan) – तुम्हीं मेरी नईया तुम्हीं हो खवईया

196 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें।

🙏 तुम्हीं मेरी नईया तुम्हीं हो खवईया

(Tumhi Meri Naiya Tumhi Ho Khavaiya) – Durga Bhajan 2026

ॐ श्री दुर्गायै नमः ॥

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/अपलोडर: अनिलरामूर्तिभोपाल
🏷️ श्रेणी: दुर्गा भजन
🎵 धुन आधारित: तुम्हीं मेरे मंदिर तुम्हीं मेरी पूजा

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ धुन ॥

तुम्हीं मेरे मंदिर तुम्हीं मेरी पूजा
तुम्हीं, मेरी नईया, तुम्हीं हो खवईया,
तुम्हीं, आसरा हो, तुम्हीं आसरा हो ॥

॥ स्थायी ॥

तुम्हीं मेरी नईया तुम्हीं हो खवईया

॥ अंतरा १ ॥

कदर मेरी मईया, किसी ने ना जानी,
हमेशा रहा मेरी, आंखों में पानी ॥
गैर तो, गैर अपनों, ने रुलाया ॥
तुम्हीं, आसरा हो, तुम्हीं आसरा हो ।
तुम्हीं, मेरी नईया, तुम्हीं हो...

॥ अंतरा २ ॥

बचपन से ही मैं, हूँ निरभागी,
तेरी दया से मेरी, किस्मत मां जागी ॥
आप ने ही, मईया मुझको, गले से लगाया ॥
तुम्हीं, आसरा हो, तुम्हीं आसरा हो ।
तुम्हीं, मेरी नईया, तुम्हीं हो...

॥ अंतरा ३ ॥

जिन रिश्तो से, आशा लगाई,
उन रिश्तो ने, निराशा दिखाई ॥
मतलब की, दुनिया में, कोई ना हमारा ॥
तुम्हीं, आसरा हो, तुम्हीं आसरा हो ।
तुम्हीं, मेरी नईया, तुम्हीं हो...

॥ अंतरा ४ ॥

तेरा नाम लेकर, जिए जा रही हूँ,
जहर ज़िन्दगी का, पिए जा रही हूँ ॥
तेरा नाम, है मुझको, प्राणों से प्यारा ॥
तुम्हीं, आसरा हो, तुम्हीं आसरा हो ।
तुम्हीं, मेरी नईया, तुम्हीं हो...

📤 अपलोडर :- अनिलरामूर्तिभोपाल

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन माँ दुर्गा के प्रति भक्त की अटूट श्रद्धा और समर्पण को दर्शाता है। "तुम्हीं मेरी नईया, तुम्हीं हो खवईया" – भक्त कहता है कि माँ ही उसकी नैया (जीवन रूपी नाव) हैं और माँ ही उसे पार लगाने वाली खेवैया (मल्लाह) हैं।

भक्त अपनी व्यथा व्यक्त करता है कि दुनिया में किसी ने उसकी कदर नहीं जानी, हमेशा उसकी आँखों में आँसू रहे। गैर तो गैर, अपनों ने भी उसे रुलाया। लेकिन माँ ही उसका एकमात्र आसरा हैं। बचपन से निर्भागी होने के बावजूद, माँ की दया से उसकी किस्मत जागी और माँ ने उसे गले से लगाया।

जिन रिश्तों से आशा लगाई, उन्होंने निराशा दी। इस मतलबी दुनिया में कोई अपना नहीं – केवल माँ ही सहारा हैं। भक्त कहता है कि वह माँ का नाम लेकर जी रही है और जिंदगी का जहर पी रही है, फिर भी माँ का नाम उसे प्राणों से प्यारा है।

यह भजन उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणादायक है जो जीवन के संघर्षों में घिरे हैं और माँ दुर्गा को अपना एकमात्र सहारा मानते हैं।

🎵 धुन के बारे में

इस भजन की धुन प्रसिद्ध भजन "तुम्हीं मेरे मंदिर तुम्हीं मेरी पूजा" से ली गई है, जो एक अत्यंत लोकप्रिय भक्ति गीत है। इस धुन पर आधारित यह दुर्गा भजन माँ की महिमा का गुणगान करता है और भक्त के हृदय की व्यथा को माँ के चरणों में रखता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

🚤 नईया और खवईया का प्रतीक

नईया (नाव) और खवईया (मल्लाह) का प्रतीक यहाँ जीवन रूपी समुद्र को पार करने के लिए माँ को एकमात्र सहारा बताता है। माँ ही नाव हैं और माँ ही उसे पार लगाने वाली।

🤱 माँ का वात्सल्य

भजन में माँ का वात्सल्य रूप दिखता है – निर्भागी को गले लगाना, दीन-दुखियों की सुनना, और अपने भक्तों को कभी निराश न करना।

💔 संसार की निष्ठुरता

भजन संसार की निष्ठुरता को भी उजागर करता है – गैर तो गैर, अपने भी रुला देते हैं। यह मतलबी दुनिया में कोई अपना नहीं, केवल माँ ही एकमात्र सहारा हैं।

✨ नाम का महत्व

"तेरा नाम है मुझको प्राणों से प्यारा" – भक्त के लिए माँ का नाम ही उसके जीवन का आधार है। नाम लेकर ही वह जी रही है और जीवन का जहर पी रही है।

🎯 संदेश : इस संसार में कोई अपना नहीं, सब मतलब के रिश्ते हैं। केवल माँ दुर्गा ही एकमात्र सच्चा सहारा हैं जो कभी निराश नहीं करतीं। वे ही हमारी नईया हैं और वे ही हमें भवसागर से पार लगाने वाली खेवैया।

ॐ श्री दुर्गायै नमः ॥ इति दुर्गाभजनम् ॥
॥ जय माता दी जय माता दी जय जय माता दी ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

आदिशक्ति माता दुर्गा, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित यह भजन "Tumhi Meri Naiya Tumhi Ho Khavaiya Lyrics (Durga Bhajan) – तुम्हीं मेरी नईया तुम्हीं हो खवईया" जगत जननी की कृपा और महिमा का गान करता है। सनातन परंपरा में स्त्री शक्ति को सृष्टि का आदि कारण माना गया है। इस भजन की एक-एक पंक्ति माता के ममतामयी और दुष्टनाशिनी रूप का वर्णन करती है।

भजन का मूल स्वर माता के प्रति समर्पण का है। जब भक्त माता के चरणों में प्रणाम कर अपनी प्रार्थना रखता है, तो देवी मां उसके समस्त कष्टों को हर लेती हैं। यह भजन साधक के भीतर शक्ति, करुणा, तेज और पवित्रता का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

देवीभागवत पुराण के अनुसार, माता की उपासना से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष चारों पुरुषार्थों की सिद्धि होती है। विशेषकर नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन करने से घर में रिद्धि-सिद्धि और सुख-समृद्धि का वास होता है।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। देवी भजनों के संकीर्तन से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, दरिद्रता का नाश होता है और व्यापार तथा नौकरी में उन्नति के द्वार खुलते हैं। यह जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अनुभव कराता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

माता की पूजा के लिए शुक्रवार, अष्टमी तिथि और नवरात्रि का काल सर्वोत्तम है। पूजा स्थान पर लाल फूल, धूप-दीप अर्पित कर मां के सामने घी का अखण्ड ज्योत जलाएं और भक्तिभाव से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

मां दुर्गा के भजनों का संकीर्तन विशेष रूप से कब करना चाहिए?

यद्यपि नियमित संकीर्तन उत्तम है, किन्तु शुक्रवार के दिन और शारदीय व चैत्र नवरात्रि के पावन दिनों में मां दुर्गा के भजन असीम सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।

देवी पूजा में किस रंग के वस्त्रों का उपयोग करना शुभ माना जाता है?

माता दुर्गा और शक्ति स्वरूपा देवी पूजा में लाल, पीले अथवा नारंगी (भगवा) रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना गया है।

क्या देवी उपासना से व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं?

हाँ, मां लक्ष्मी और मां दुर्गा की कृपा से व्यापार में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और आर्थिक तंगी से मुक्ति मिलती है।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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