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Durga Bhajan Lyrics

संपूर्ण दुर्गा सप्तश्लोकी लिरिक्स (Sampurna durga saptshloki Lyrics in Hindi) - Bhaktilok

91 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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श्री दुर्गा सप्तश्लोकी: संकटहरण का दिव्य स्त्रोत

इस भक्ति से सराबोर स्तोत्र का पाठ संकट से मुक्ति और सुख-शांति की प्राप्ति के लिए करें।

 संपूर्ण दुर्गा सप्तश्लोकी लिरिक्स (Sampurna durga saptshloki Lyrics in Hindi) ॥ अथ सप्तश्लोकी दुर्गा ॥शिव उवाच:देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी ।कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ॥देव्युवाच:शृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम् ।मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते ॥विनियोग:ॐ अस्य श्री दुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीमहाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वत्यो देवताः, श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः ।ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हिसा ।बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति ॥1॥दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोःस्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि ।दारिद्र्यदुःखभयहारिणि त्वदन्यासर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता ॥2॥सर्वमंगलमंगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते ॥ ३ ॥शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे ।सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते ॥ ४ ॥सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते ।भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते ॥ ५ ॥रोगानशोषानपहंसि तुष्टा रूष्टातु कामान् सकलानभीष्टान् ।त्वामाश्रितानां न विपन्नराणांत्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति ॥ ६ ॥सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्र्वरि ।एवमेव त्वया कार्यमस्यद्वैरिविनाशनम् ॥ ७ ॥॥ इति श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा संपूर्णम् ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

दुर्गा सप्तश्लोकी एक विशेष स्तोत्र है जो देवी दुर्गा को समर्पित है। इसमें देवी की महिमा का गुणगान किया गया है, और भक्तों से उनकी कृपा प्राप्त करने का उपाय बताया गया है। पहले श्लोक में शिव और देवी के संवाद से प्रारंभ होता है, जहाँ शिव भक्तों को देवी की आराधना का महत्व समझाते हैं। मन्त्रो की शक्ति और उनके उच्चारण का प्रभाव यह दर्शाता है कि कठिनाई के समय में देवियों की स्मृति और भक्ति सच्चे मार्गदर्शन देती है। "दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः" इस चरण में यह दर्शाया गया है कि देवी दुर्गा का स्मरण करने से सभी जीवों के भय का नाश होता है। इस स्तोत्र में देवी के अनेक रूपों की महिमा है, जैसे कि "शरण्ये त्र्यम्बके गौरि" जो अपार संकटों से सहारा देती हैं।

भक्तों की भक्ति और श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए, सप्तश्लोकी दुर्गा में देवी को साक्षात् सानिध्य देने की बात की गई है। स्तोत्र का प्रत्येक श्लोक भक्तों को आश्वस्त करता है कि वे हर कठिनाई से निकल सकते हैं। शरणागत को प्रत्यक्ष सहायता की रूप में देवी की शक्ति का संकेत है, और यही शरणागति का सिद्धांत है, जो भक्तों को संकट, दरिद्रता, और दुख से मुक्ति दिलाता है। यहाँ देवी की कृपा का असीम महत्व है जिसका अनुभव भक्त लगातार कर सकते हैं। भावार्थ में यह स्पष्ट है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ देवी की आराधना करने से सभी इच्छायें पूर्ण होती हैं।

इस स्तोत्र में भक्ति मार्ग का गहरा विचार है। यह दर्शाता है कि श्रद्धा और भक्ति से एक व्यक्ति अपने जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि ला सकता है। देवी दुर्गा को हर शक्ति का स्रोत माना गया है। 'सर्वस्वरूपे सर्वेशे' इस श्लोक में यह संदेश है कि देवी हर रूप में विद्यमान हैं और सभी शक्तियों से युक्त हैं। यहाँ भक्ति का सार यह है कि सभी बाधाएं, कष्ट, और भय देवी के स्मरण से मिट सकते हैं। यह भक्तों को प्रोत्साहित करता है कि वे अपने प्रयासों में देवी की कृपा पर निर्भर रहें और भक्ति से आगे बढ़ें।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

दुर्गा सप्तश्लोकी का महत्वपूर्ण स्थान पुरानी भारतीय संस्कृति में है, जिसे देवी से संबंधित पौराणिक कथाओं और उपासना पद्धतियों में रचा गया है। यह स्तोत्र देवी दुर्गा के शक्तिशाली रूपों की पूजा में सहायक है। देवी दुर्गा का प्रमुख रूप महाकाली, महालक्ष्मी, और महासरस्वती का सम्मिलित स्वरूप है, जो सभी शक्तियों की देवी मानी जाती हैं। इस स्तोत्र का उल्लेख देवी भागवत और अन्य पुराणों में भी मिलता है, जहाँ नारी शक्ति की आराधना का गुणगान किया गया है। सप्तश्लोकी को विशेष रूप से नवरात्रि जैसे पर्वों पर पढ़ने का महत्व है, जहाँ देवी की उपासना के लिए विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।

मां जगदम्बा के ५१ पवित्र धामों की यात्रा और उनके आध्यात्मिक महत्व को समझने के लिए ५१ शक्तिपीठ दर्शन निर्देशिका अवश्य देखें। दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ मानसिक शांति, डर और अवसाद से मुक्ति, और आत्मविश्वास में वृद्धि कर सकता है। नियमित रूप से इसका जाप करने से व्यक्तित्व में सकारात्मकता आ सकती है और जीवन के संकटों का सामना करने की शक्ति मिलती है। यह स्तोत्र भक्ति के माध्यम से ध्यान और साधना की गहराई को बढ़ाने में मदद करता है, जिससे आत्मा को स्थिरता और संतुलन मिलता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन का पाठ सुबह के समय या नवरात्रि के विशेष पर्वों पर किया जा सकता है। पाठ के समय एक दीया जलाना, सफेद फूलों या देवीय वस्तुओं का चढ़ावा अर्पित करना शुभ माना गया है। ध्यान और समर्पण के साथ पढ़ने से अधिक फल मिलता है। सही मुद्रा में बैठकर या खड़े होकर, मन को शांत रखकर इस स्तोत्र का जाप करना चाहिए।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

दुर्गा सप्तश्लोकी क्या है?

दुर्गा सप्तश्लोकी देवी दुर्गा को संबोधित 7 श्लोकों का एक संग्रह है जो उनकी महिमा और शक्ति का वर्णन करता है।

क्या दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ रोज़ करना चाहिए?

हाँ, नियमित पाठ से मानसिक शांति, संकटों से मुक्ति, और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह दिन की शुरुआत सकारात्मकता के साथ करने में सहायक है।

क्या इस स्तोत्र का कोई विशेष अवसर है?

दुर्गा सप्तश्लोकी का पाठ नवरात्रि के दौरान और अन्य धार्मिक अवसरों पर विशेष महत्व रखता है किसके विशेष अनुष्ठान संपन्न किये जाते हैं।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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