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Santoshi Mata Aarti

जय संतोषी माता आरती (शुक्रवार स्पेशल) सम्पूर्ण लिरिक्स | Jai Santoshi Maa Aarti Friday Special Complete Lyrics

344 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah | 2 मिनट पठन समय
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🙏 जय संतोषी माता आरती

(Jai Santoshi Maa Aarti – शुक्रवार स्पेशल – सम्पूर्ण लिरिक्स)

🌸 शुक्रवार विशेष – संतोषी माता की सम्पूर्ण आरती | गुड़ चना प्रिय भोग

📝 आरती विवरण

🏷️ श्रेणी: आरती / देवी भजन / शुक्रवार विशेष
🎶 भाव: श्रद्धा, भक्ति, संतोष, समृद्धि
📍 विशेषता: संतोषी माता की पूर्ण आरती, शुक्रवार के दिन विशेष रूप से प्रचलित
📀 प्रचलन: संतोषी माता के भक्तों में अत्यंत लोकप्रिय, व्रत-कथा के अंत में गायी जाती है

📜 जय संतोषी माता आरती – सम्पूर्ण लिरिक्स (हिन्दी)

जय संतोषी माता, मैया संतोषी माता।
अपने सेवक-जन को सुख-सम्पत्ति दाता॥
जय संतोषी माता॥

सुंदर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हो।
हीरा-पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो॥
जय संतोषी माता॥

गेरू-लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे।
मंद हँसत करुणामयी, त्रिभुवन-जन मोहे॥
जय संतोषी माता॥

स्वर्ण सिंहासन बैठी, चँवर ढुरे प्यारे।
धूप, दीप, मधु-मेवा, भोग धरें न्यारे॥
जय संतोषी माता॥

गुड़ अरु चना परमप्रिय, तामे संतोष कियो।
संतोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो॥
जय संतोषी माता॥

शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही।
भक्त-मण्डली छाई, कथा सुनत मोही॥
जय संतोषी माता॥

मंदिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई।
विनय करें हम बालक, चरणन सिर नाई॥
जय संतोषी माता॥

भक्ति-भावमय पूजा अंगीकृत कीजै।
जो मन बसे हमारे, इच्छा-फल दीजै॥
जय संतोषी माता॥

दुखी, दरिद्री, रोगी, संकटमुक्त किए।
बहु धन-धान्य भरे घर, सुख-सौभाग्य दिए॥
जय संतोषी माता॥

ध्यान धर्यो जिस जन ने, मनवांछित फल पायो।
पूजा-कथा श्रवण कर, घर आनंद आयो॥
जय संतोषी माता॥

शरण गहे की लज्जा राखियो जगदंबे।
संकट तू ही निवारे, दयामयी अम्बे॥
जय संतोषी माता॥

संतोषी माँ की आरती जो कोई नर गावे।
ऋद्धि-सिद्धि सुख-सम्पत्ति, जी भरकर पावे॥
जय संतोषी माता॥

📖 परम्परा : संतोषी माता व्रत एवं कथा से संकलित

🙏 आरती का अर्थ एवं महत्व

यह सम्पूर्ण आरती संतोषी माता की महिमा, स्वरूप और कृपा का वर्णन करती है। “जय संतोषी माता, मैया संतोषी माता, अपने सेवक-जन को सुख-सम्पत्ति दाता” – माँ अपने भक्तों को सुख और संपत्ति देने वाली हैं।

आरती में माता के वस्त्र, आभूषण, गेरू-लाल छटा, कमल के समान मुखमंडल, मंद-मंद मुस्कान और करुणा का वर्णन है। वे स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं, उन्हें धूप, दीप, मधु, मेवा और भोग अर्पित किए जाते हैं। गुड़ और चना माता को परम प्रिय हैं – इसी कारण वे संतोषी (संतोष देने वाली) कहलाईं।

शुक्रवार का दिन माता को प्रिय है। इस दिन व्रत, कथा और आरती करने से मनोवांछित फल मिलते हैं। आरती में कहा गया है कि दुखी, दरिद्र, रोगी, संकटग्रस्त लोगों को माता मुक्ति देती हैं, घर धन-धान्य और सुख-सौभाग्य से भर देती हैं।

जो भी श्रद्धा से यह आरती गाता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि और अपार सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है। यह आरती हर शुक्रवार को और संतोषी माता व्रत के अंत में अवश्य गाई जाती है।

🔍 संतोषी माता आरती का विशेष महत्त्व

शुक्रवार विशेष: संतोषी माता का दिन शुक्रवार माना जाता है। इस दिन व्रत रखने, कथा सुनने और आरती करने से माता विशेष प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी करती हैं।

गुड़-चने का महत्व: आरती में उल्लेख है कि गुड़ और चना माता को परम प्रिय हैं। इन्हीं के कारण माता “संतोषी” कहलाईं – संतोष (प्रसन्नता) देने वाली।

फल श्रुति: आरती के अंत में कहा गया है कि इस आरती को गाने वाले को ऋद्धि-सिद्धि, सुख, संपत्ति और मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

💖 संतोषी माता की कृपा

🎯 संदेश

सच्चे मन से संतोषी माता की आरती और व्रत-कथा करने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य, संतान-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

✨ आस्था का प्रतीक

संतोषी माता आरती हर शुक्रवार को लाखों भक्तों के हृदय में भक्ति और आस्था का संचार करती है। यह आरती माँ के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का सशक्त माध्यम है।

🙏 जय संतोषी माता ।। मैया संतोषी माता ।। जय जय संतोषी माता ।।

॥ इति संतोषी माता आरती सम्पूर्णम् ॥
🌺 शुक्रवार के दिन अवश्य करें इस आरती का पाठ, माता होंगी प्रसन्न 🌺
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सनातन संस्कृति एवं प्रामाणिक संपादन

यह भजन/आरती लिरिक्स भक्तिलोक संपादकीय मंडल द्वारा विभिन्न धर्मग्रंथों, वैदिक संहिताओं और प्रामाणिक गायक प्रस्तुतियों के आधार पर समीक्षित एवं शुद्धीकृत किया गया है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 07 Aug 2026

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एआई आध्यात्मिक मार्गदर्शक (AI Guru)

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