Santoshi Mata Aarti

जय संतोषी माता आरती (शुक्रवार स्पेशल) सम्पूर्ण लिरिक्स | Jai Santoshi Maa Aarti Friday Special Complete Lyrics

377 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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प्रस्तावना एवं परिचय

सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 जय संतोषी माता आरती

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Jai Santoshi Maa Aarti – शुक्रवार स्पेशल – सम्पूर्ण लिरिक्स)

🌸 शुक्रवार विशेष – संतोषी माता की सम्पूर्ण आरती | गुड़ चना प्रिय भोग

विवरण एवं मुख्य बिंदु

🏷️ श्रेणी:आरती / देवी भजन / शुक्रवार विशेष
🎶 भाव:श्रद्धा, भक्ति, संतोष, समृद्धि
📍 विशेषता:संतोषी माता की पूर्ण आरती, शुक्रवार के दिन विशेष रूप से प्रचलित
📀 प्रचलन:संतोषी माता के भक्तों में अत्यंत लोकप्रिय, व्रत-कथा के अंत में गायी जाती है

📜 जय संतोषी माता आरती – सम्पूर्ण लिरिक्स (हिन्दी)

जय संतोषी माता, मैया संतोषी माता।
अपने सेवक-जन को सुख-सम्पत्ति दाता॥
जय संतोषी माता॥

सुंदर चीर सुनहरी, माँ धारण कीन्हो।
हीरा-पन्ना दमके, तन श्रृंगार लीन्हो॥
जय संतोषी माता॥

गेरू-लाल छटा छवि, बदन कमल सोहे।
मंद हँसत करुणामयी, त्रिभुवन-जन मोहे॥
जय संतोषी माता॥

स्वर्ण सिंहासन बैठी, चँवर ढुरे प्यारे।
धूप, दीप, मधु-मेवा, भोग धरें न्यारे॥
जय संतोषी माता॥

गुड़ अरु चना परमप्रिय, तामे संतोष कियो।
संतोषी कहलाई, भक्तन वैभव दियो॥
जय संतोषी माता॥

शुक्रवार प्रिय मानत, आज दिवस सोही।
भक्त-मण्डली छाई, कथा सुनत मोही॥
जय संतोषी माता॥

मंदिर जगमग ज्योति, मंगल ध्वनि छाई।
विनय करें हम बालक, चरणन सिर नाई॥
जय संतोषी माता॥

भक्ति-भावमय पूजा अंगीकृत कीजै।
जो मन बसे हमारे, इच्छा-फल दीजै॥
जय संतोषी माता॥

दुखी, दरिद्री, रोगी, संकटमुक्त किए।
बहु धन-धान्य भरे घर, सुख-सौभाग्य दिए॥
जय संतोषी माता॥

ध्यान धर्यो जिस जन ने, मनवांछित फल पायो।
पूजा-कथा श्रवण कर, घर आनंद आयो॥
जय संतोषी माता॥

शरण गहे की लज्जा राखियो जगदंबे।
संकट तू ही निवारे, दयामयी अम्बे॥
जय संतोषी माता॥

संतोषी माँ की आरती जो कोई नर गावे।
ऋद्धि-सिद्धि सुख-सम्पत्ति, जी भरकर पावे॥
जय संतोषी माता॥

📖 परम्परा : संतोषी माता व्रत एवं कथा से संकलित

🙏 आरती का अर्थ एवं महत्व

यह सम्पूर्ण आरती संतोषी माता की महिमा, स्वरूप और कृपा का वर्णन करती है। “जय संतोषी माता, मैया संतोषी माता, अपने सेवक-जन को सुख-सम्पत्ति दाता” – माँ अपने भक्तों को सुख और संपत्ति देने वाली हैं।

आरती में माता के वस्त्र, आभूषण, गेरू-लाल छटा, कमल के समान मुखमंडल, मंद-मंद मुस्कान और करुणा का वर्णन है। वे स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान हैं, उन्हें धूप, दीप, मधु, मेवा और भोग अर्पित किए जाते हैं। गुड़ और चना माता को परम प्रिय हैं – इसी कारण वे संतोषी (संतोष देने वाली) कहलाईं।

शुक्रवार का दिन माता को प्रिय है। इस दिन व्रत, कथा और आरती करने से मनोवांछित फल मिलते हैं। आरती में कहा गया है कि दुखी, दरिद्र, रोगी, संकटग्रस्त लोगों को माता मुक्ति देती हैं, घर धन-धान्य और सुख-सौभाग्य से भर देती हैं।

जो भी श्रद्धा से यह आरती गाता है, उसे ऋद्धि-सिद्धि और अपार सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है। यह आरती हर शुक्रवार को और संतोषी माता व्रत के अंत में अवश्य गाई जाती है।

🔍 संतोषी माता आरती का विशेष महत्त्व

शुक्रवार विशेष: संतोषी माता का दिन शुक्रवार माना जाता है। इस दिन व्रत रखने, कथा सुनने और आरती करने से माता विशेष प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी करती हैं।

गुड़-चने का महत्व: आरती में उल्लेख है कि गुड़ और चना माता को परम प्रिय हैं। इन्हीं के कारण माता “संतोषी” कहलाईं – संतोष (प्रसन्नता) देने वाली।

फल श्रुति: आरती के अंत में कहा गया है कि इस आरती को गाने वाले को ऋद्धि-सिद्धि, सुख, संपत्ति और मनोवांछित फल प्राप्त होता है।

💖 संतोषी माता की कृपा

🎯 संदेश

सच्चे मन से संतोषी माता की आरती और व्रत-कथा करने से जीवन के सभी दुख दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि, धन-धान्य, संतान-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

✨ आस्था का प्रतीक

संतोषी माता आरती हर शुक्रवार को लाखों भक्तों के हृदय में भक्ति और आस्था का संचार करती है। यह आरती माँ के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता का सशक्त माध्यम है।

🙏 जय संतोषी माता ।। मैया संतोषी माता ।। जय जय संतोषी माता ।।

॥ इति संतोषी माता आरती सम्पूर्णम् ॥
🌺 शुक्रवार के दिन अवश्य करें इस आरती का पाठ, माता होंगी प्रसन्न 🌺
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "जय संतोषी माता आरती (शुक्रवार स्पेशल) सम्पूर्ण लिरिक्स | Jai Santoshi Maa Aarti Friday Special Complete Lyrics" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

श्रेणियां: Santoshi Mata Aarti Evening Bhajan

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 26 Sep 2026

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