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Krishna Bhajan

हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी (श्री कृष्ण आरती) लिरिक्स | He Gopal Krishna Karoon Aarti Teri Shri Krishna Aarti Lyrics

300 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी – श्री कृष्ण आरती

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(He Gopal Krishna, Karoon Aarti Teri – Shri Krishna Aarti)

🌸 प्रेम में रंगी भक्ति – कान्हा तेरा रूप अनुपम

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: कृष्ण आरती / भजन
🎶 भाव: श्रद्धा, प्रेम, समर्पण, आराधना
📍 विशेषता: हरे कृष्ण महामंत्र सहित, गोपाल कृष्ण की भावपूर्ण आरती
📀 प्रचलन: कृष्ण भक्तों में प्रिय, साँझ-सवेरे गायी जाने वाली आरती

📜 आरती लिरिक्स (हिन्दी में)

हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी,
हे प्रिया पति, मैं करूँ आरती तेरी।
तुझपे ओ कान्हा, बलि-बलि जाऊँ,
साँझ-सवेरे तेरे गुण गाऊँ,
प्रेम में रंगी, मैं रंगी भक्ति में तेरी,
हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी।

ये माटी का तन है तेरा,
मन और प्राण भी तेरे,
मैं एक गोपी, तुम हो कन्हैया,
तुम हो भगवान मेरे।
कृष्ण कृष्ण कृष्ण रटे आत्मा मेरी,
हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी।

हरे कृष्ण, हरे कृष्ण,
कृष्ण कृष्ण हरे-हरे,
हरे रामा, हरे रामा,
रामा रामा हरे-हरे।
कान्हा तेरा रूप अनुपम,
मन को हरता जाए,
मन ये चाहे हर पल अँखियाँ,
तेरा दर्शन पाए।
दर्श तेरा, प्रेम तेरा, आस है मेरी,
हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी।

तुझपे ओ कान्हा, बलि-बलि जाऊँ,
साँझ-सवेरे तेरे गुण गाऊँ,
प्रेम में रंगी, मैं रंगी भक्ति में तेरी,
हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी,
हे प्रिया पति, मैं करूँ आरती तेरी।

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / कृष्ण भक्ति

🙏 आरती का अर्थ और महत्व

यह भावपूर्ण कृष्ण आरती भक्त के हृदय की पुकार है। “हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी, हे प्रिया पति, मैं करूँ आरती तेरी” – भक्त कृष्ण को गोपाल (ग्वालों के पालक) और प्रिया पति (राधा के स्वामी) के रूप में संबोधित करता है। वह कहता है कि मैं तुझपे बलि-बलि जाऊँ (न्योछावर हो जाऊँ), साँझ-सवेरे तेरे गुण गाऊँ, और प्रेम में रंगी हुई भक्ति करूँ।

पहले अंतरे में – यह मिट्टी का तन, मन और प्राण – सब तेरे हैं। मैं एक गोपी हूँ, तुम कन्हैया हो, तुम मेरे भगवान हो। मेरी आत्मा केवल “कृष्ण-कृष्ण” ही रटती है।

दूसरे अंतरे में – हरे कृष्ण महामंत्र का उच्चारण किया गया है। कान्हा का रूप अनुपम (अद्वितीय) है, मन को हरता है। मन हर पल आँखों से तेरा दर्शन पाना चाहता है। तेरा दर्शन, तेरा प्रेम ही मेरी आशा है।

यह आरती कृष्ण भक्ति में लीन होकर प्रेम और समर्पण व्यक्त करने का सुंदर माध्यम है।

🔍 आरती का विशेष महत्त्व

प्रिया पति संबोधन: कृष्ण को “प्रिया पति” कहना राधा के प्रति उनके प्रेम और उन्हें स्वामी मानने का भाव है। यह माधुर्य भक्ति का द्योतक है।

हरे कृष्ण महामंत्र: इस आरती में हरे कृष्ण महामंत्र का उल्लेख है, जो कलियुग में सबसे प्रभावशाली मंत्र माना जाता है।

दर्शन की आशा: “मन ये चाहे हर पल अँखियाँ तेरा दर्शन पाए” – यह भक्त की प्रभु के दर्शन की निरंतर तड़प को दर्शाती है।

💖 कृष्ण भक्ति का सार

🎯 संदेश

कृष्ण की आरती करते हुए भक्त अपना सब कुछ – तन, मन, प्राण – उन्हें अर्पित कर देता है। प्रेम और भक्ति के रंग में रंगकर ही सच्चा दर्शन और आनंद प्राप्त होता है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह आरती हर कृष्ण भक्त के हृदय में उल्लास और समर्पण भर देती है। “हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी” का उच्चारण मात्र मन को शांति और आनंद देता है।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। हरे कृष्ण हरे कृष्ण ।। जय श्री कृष्ण ।।

॥ इति श्री कृष्ण आरती सम्पूर्णम् ॥
॥ हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी – प्रेम में रंगी भक्ति में तेरी ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "हे गोपाल कृष्ण, करूँ आरती तेरी (श्री कृष्ण आरती) लिरिक्स | He Gopal Krishna Karoon Aarti Teri Shri Krishna Aarti Lyrics" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 04 Sep 2026

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