🙏 लागी लागी रे लागी प्रीत मोरी कान्हा से – श्याम दीवानी

(Lagi Lagi Re Lagi Preet Mori Kanha Se – Shyam Deewani) – कृष्ण भजन

🌸 लागी प्रीत मोरी कान्हा से – श्याम बिना सब सूना लागे

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / प्रेम भक्ति / श्याम दीवानी
🎶 भाव: प्रेम, आसक्ति, समर्पण, श्याम में खोया मन
📍 विशेषता: कान्हा से प्रीत लगने के बाद श्याम दीवानी हो जाने की अभिव्यक्ति
📀 प्रचलन: कृष्ण भक्तों में प्रिय, विशेषकर श्याम दीवानी भाव वालों के लिए

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

लागी लागी रे लागी लागी रे,
लागी प्रीत मोरी कान्हा से।
लागी लागी रे लागी लागी रे,
लागी प्रीत मोरी कान्हा से।

कान्हा कान्हा जाप बिना,
चैन कहाँ अब पावे मन।
श्याम बिना सब सूना लागे,
उनमें ही खोया मेरा मन।
कान्हा कान्हा जाप बिना,
चैन कहाँ अब पावे मन।

श्याम बिना सब सूना लागे,
उनमें ही खोया मेरा मन।
बंसी की धुन जब वो बजाए,
वन-उपवन के मोर नचाए।
मैं तो जोगन श्याम दीवानी,
पकड़ूँ उसे, वो हाथ ना आए।
लागी रे लागी रे लागी रे प्रीत मोरी,
कान्हा से लागी प्रीत मोरी।
लागी रे लागी रे लागी रे प्रीत मोरी,
कान्हा से लागी प्रीत मोरी।

लागी तो से प्रीत कन्हैया,
तुझ में ही लागा मोरा जिया।
लागी तो से प्रीत कन्हैया,
तुझ में ही लागा मोरा जिया।
चारों दिशा में दिखता मुझे तू,
चेहरा है प्यारा तेरा कन्हैया।

ब्रज के हम हैं प्रेमी पुराने,
श्याम सिवा मन कुछ भी ना जाने।
मेरा तन-मन तुझको ही पूजे,
कान्हा कान्हा नाम ही गूँजे।
लागी रे लागी रे लागी रे प्रीत मोरी,
कान्हा से लागी प्रीत मोरी।
लागी रे लागी रे लागी रे प्रीत मोरी,
कान्हा से लागी प्रीत मोरी।

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / कृष्ण भक्ति गीत

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत मधुर कृष्ण भजन है, जिसमें भक्त कान्हा से प्रेम लगने की बात कहता है। “लागी लागी रे लागी प्रीत मोरी कान्हा से” – मेरी प्रीत कान्हा से लग गई है। “कान्हा कान्हा जाप बिना, चैन कहाँ अब पावे मन” – कान्हा का जाप किए बिना मन को चैन नहीं मिलता।

“श्याम बिना सब सूना लागे, उनमें ही खोया मेरा मन” – श्याम के बिना सब सूना लगता है, मेरा मन तो उनमें ही खो गया है।

जब कान्हा बाँसुरी बजाते हैं, तो वन-उपवन के मोर नाचने लगते हैं। भक्त कहती है – “मैं तो जोगन श्याम दीवानी, पकड़ूँ उसे, वो हाथ ना आए” – मैं श्याम की दीवानी साध्वी हो गई हूँ, उसे पकड़ना चाहती हूँ पर वह हाथ नहीं आते।

“चारों दिशा में दिखता मुझे तू, चेहरा है प्यारा तेरा कन्हैया” – हर दिशा में केवल कान्हा ही दिखते हैं। “ब्रज के हम हैं प्रेमी पुराने, श्याम सिवा मन कुछ भी ना जाने” – हम ब्रज के पुराने प्रेमी हैं, श्याम के अलावा मन कुछ नहीं जानता।

यह भजन कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण और उनमें खो जाने की अवस्था को दर्शाता है – “श्याम दीवानी” होने का भाव।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

“जोगन श्याम दीवानी” – प्रेम की दीवानगी: यह भजन उस अवस्था को दर्शाता है जहाँ भक्त प्रेम में इतना लीन हो जाता है कि वह साध्वी (जोगन) बन जाती है, पर उसका प्रियतम (श्याम) उसे हाथ नहीं आता। यह मीरा की भक्ति परम्परा को याद दिलाता है।

ब्रज के प्रेमी पुराने: यह पंक्ति ब्रजभूमि और वहाँ की नित्य लीलाओं से जुड़ाव को दर्शाती है।

बाँसुरी पर मोर नाचना: कृष्ण की बाँसुरी के प्रभाव का यह सुंदर चित्रण है – जिस पर मोर भी नाच उठते हैं।

💖 श्याम दीवानी का भाव

🎯 संदेश

जब हृदय में कान्हा के प्रति सच्ची प्रीत लग जाती है, तो दुनिया की हर चीज़ सूनी लगने लगती है। भक्त श्याम का दीवाना हो जाता है, उसे हर ओर केवल श्याम ही दिखते हैं। यही प्रेम भक्ति का चरम है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हर उस भक्त के हृदय को छूता है जो कृष्ण के प्रति गहरा प्रेम रखता है। “लागी प्रीत मोरी कान्हा से” का उच्चारण मात्र भक्ति रस में डुबो देता है।

🙏 जय श्री कृष्ण ।। श्याम दीवानी की जय ।। लागी प्रीत मोरी कान्हा से ।।

॥ इति कृष्ण भजनम् ॥
॥ लागी लागी रे लागी प्रीत मोरी कान्हा से – श्याम बिना सब सूना लागे, उनमें ही खोया मेरा मन ॥