Krishna Bhajan सोमवार विशेष (महादेव शिव व चंद्र देव)

लागी लागी रे लागी प्रीत मोरी कान्हा से (श्याम दीवानी)लिरिक्स

लागी लागी रे लागी प्रीत मोरी कान्हा से भजन लिरिक्स पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित श्याम दीवानी कान्हा भजन का आनंद लें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 लागी लागी रे लागी प्रीत मोरी कान्हा से – श्याम दीवानी

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Lagi Lagi Re Lagi Preet Mori Kanha Se – Shyam Deewani) – कृष्ण भजन

🌸 लागी प्रीत मोरी कान्हा से – श्याम बिना सब सूना लागे

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / प्रेम भक्ति / श्याम दीवानी
🎶 भाव: प्रेम, आसक्ति, समर्पण, श्याम में खोया मन
📍 विशेषता: कान्हा से प्रीत लगने के बाद श्याम दीवानी हो जाने की अभिव्यक्ति
📀 प्रचलन: कृष्ण भक्तों में प्रिय, विशेषकर श्याम दीवानी भाव वालों के लिए

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

लागी लागी रे लागी लागी रे,
लागी प्रीत मोरी कान्हा से।
लागी लागी रे लागी लागी रे,
लागी प्रीत मोरी कान्हा से।

कान्हा कान्हा जाप बिना,
चैन कहाँ अब पावे मन।
श्याम बिना सब सूना लागे,
उनमें ही खोया मेरा मन।
कान्हा कान्हा जाप बिना,
चैन कहाँ अब पावे मन।

श्याम बिना सब सूना लागे,
उनमें ही खोया मेरा मन।
बंसी की धुन जब वो बजाए,
वन-उपवन के मोर नचाए।
मैं तो जोगन श्याम दीवानी,
पकड़ूँ उसे, वो हाथ ना आए।
लागी रे लागी रे लागी रे प्रीत मोरी,
कान्हा से लागी प्रीत मोरी।
लागी रे लागी रे लागी रे प्रीत मोरी,
कान्हा से लागी प्रीत मोरी।

लागी तो से प्रीत कन्हैया,
तुझ में ही लागा मोरा जिया।
लागी तो से प्रीत कन्हैया,
तुझ में ही लागा मोरा जिया।
चारों दिशा में दिखता मुझे तू,
चेहरा है प्यारा तेरा कन्हैया।

ब्रज के हम हैं प्रेमी पुराने,
श्याम सिवा मन कुछ भी ना जाने।
मेरा तन-मन तुझको ही पूजे,
कान्हा कान्हा नाम ही गूँजे।
लागी रे लागी रे लागी रे प्रीत मोरी,
कान्हा से लागी प्रीत मोरी।
लागी रे लागी रे लागी रे प्रीत मोरी,
कान्हा से लागी प्रीत मोरी।

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / कृष्ण भक्ति गीत

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत मधुर कृष्ण भजन है, जिसमें भक्त कान्हा से प्रेम लगने की बात कहता है। “लागी लागी रे लागी प्रीत मोरी कान्हा से” – मेरी प्रीत कान्हा से लग गई है। “कान्हा कान्हा जाप बिना, चैन कहाँ अब पावे मन” – कान्हा का जाप किए बिना मन को चैन नहीं मिलता।

“श्याम बिना सब सूना लागे, उनमें ही खोया मेरा मन” – श्याम के बिना सब सूना लगता है, मेरा मन तो उनमें ही खो गया है।

जब कान्हा बाँसुरी बजाते हैं, तो वन-उपवन के मोर नाचने लगते हैं। भक्त कहती है – “मैं तो जोगन श्याम दीवानी, पकड़ूँ उसे, वो हाथ ना आए” – मैं श्याम की दीवानी साध्वी हो गई हूँ, उसे पकड़ना चाहती हूँ पर वह हाथ नहीं आते।

“चारों दिशा में दिखता मुझे तू, चेहरा है प्यारा तेरा कन्हैया” – हर दिशा में केवल कान्हा ही दिखते हैं। “ब्रज के हम हैं प्रेमी पुराने, श्याम सिवा मन कुछ भी ना जाने” – हम ब्रज के पुराने प्रेमी हैं, श्याम के अलावा मन कुछ नहीं जानता।

यह भजन कृष्ण के प्रति पूर्ण समर्पण और उनमें खो जाने की अवस्था को दर्शाता है – “श्याम दीवानी” होने का भाव।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

“जोगन श्याम दीवानी” – प्रेम की दीवानगी: यह भजन उस अवस्था को दर्शाता है जहाँ भक्त प्रेम में इतना लीन हो जाता है कि वह साध्वी (जोगन) बन जाती है, पर उसका प्रियतम (श्याम) उसे हाथ नहीं आता। यह मीरा की भक्ति परम्परा को याद दिलाता है।

ब्रज के प्रेमी पुराने: यह पंक्ति ब्रजभूमि और वहाँ की नित्य लीलाओं से जुड़ाव को दर्शाती है।

बाँसुरी पर मोर नाचना: कृष्ण की बाँसुरी के प्रभाव का यह सुंदर चित्रण है – जिस पर मोर भी नाच उठते हैं।

💖 श्याम दीवानी का भाव

🎯 संदेश

जब हृदय में कान्हा के प्रति सच्ची प्रीत लग जाती है, तो दुनिया की हर चीज़ सूनी लगने लगती है। भक्त श्याम का दीवाना हो जाता है, उसे हर ओर केवल श्याम ही दिखते हैं। यही प्रेम भक्ति का चरम है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हर उस भक्त के हृदय को छूता है जो कृष्ण के प्रति गहरा प्रेम रखता है। “लागी प्रीत मोरी कान्हा से” का उच्चारण मात्र भक्ति रस में डुबो देता है।

🙏 जय श्री कृष्ण ।। श्याम दीवानी की जय ।। लागी प्रीत मोरी कान्हा से ।।

॥ इति कृष्ण भजनम् ॥
॥ लागी लागी रे लागी प्रीत मोरी कान्हा से – श्याम बिना सब सूना लागे, उनमें ही खोया मेरा मन ॥
साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "लागी लागी रे लागी प्रीत मोरी कान्हा से (श्याम दीवानी) भजन लिरिक्स | Lagi Lagi Re Lagi Preet Mori Kanha Se Shyam Deewani Bhajan Lyrics" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

श्रेणियां: Krishna Bhajan Shyam Bhajan

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!