🙏 राधा रानी हमें भी बता दे ज़रा – तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा
(Radha Rani Hamein Bhi Bata De Zara – Tera Deewana Kaise Hua Sanwara) – राधा-कृष्ण भजन
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
कान्हा की तस्वीर पे रख के राधे हाथ,
सच्ची-सच्ची बोलना, हम पूछें जो बात!
राधा रानी हमें भी बता दे ज़रा,
तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?
राधा रानी हमें भी बता दे ज़रा,
तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?
राधे-राधे, राधे रटे हर घड़ी बावरा,
तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?
राधा रानी हमें भी बता दे ज़रा,
तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?
तुम ना आए तो, जमुना पे आता नहीं,
तुम ना हो तो, ये बंसी बजाता नहीं।
तेरी पानी सी लस्सी भी हँस के पिए,
हम खिलाएँ तो, माखन भी खाता नहीं!
जादू-टोना बता कौन सा है करा?
तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?
राधा रानी हमें भी बता दे ज़रा,
तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?
तेरी गलियों के चक्कर लगाने लगा,
रोज़ बरसाने में आने-जाने लगा।
चूड़ी वाली, कभी मेहंदी वाली,
कभी रूप नित-दिन नए ये बनाने लगा!
दे जवाब आज तू सोलह आने खरा,
तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?
राधा रानी हमें भी बता दे ज़रा,
तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?
कल तलक जो चरणजीत का मीत था,
जो निभाता सदा प्रीत की रीत था।
उसकी बंसी तेरे गीत गाने लगी,
जिसकी धुन में लिखा मैंने हर गीत था!
रह गया, रह गया प्रेम मेरा धरा का धरा,
तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?
राधा रानी हमें भी बता दे ज़रा,
तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?
राधे-राधे, राधे-राधे...
🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / राधा-कृष्ण भक्ति गीत
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत मनोरम राधा-कृष्ण भजन है, जिसमें भक्त राधा से पूछता है कि कृष्ण उनके दीवाने कैसे हो गए। “राधा रानी हमें भी बता दे ज़रा, तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?” – क्या जादू है राधा में कि श्याम उनका दीवाना हो गया?
पहले अंतरे में – कृष्ण बिना राधा के जमुना पर नहीं आते, बिना राधा के बाँसुरी नहीं बजाते। वे केवल राधा के हाथों की लस्सी हँसकर पीते हैं, दूसरों के दिए माखन को भी नहीं खाते। यह दर्शाता है कि कृष्ण पूर्ण रूप से राधा पर आश्रित हैं।
दूसरे अंतरे में – कृष्ण राधा की गलियों के चक्कर लगाने लगे, रोज़ बरसाने आने-जाने लगे। वे राधा के लिए चूड़ी वाला, मेहंदी वाला, हर दिन नया रूप बनाने लगे। यह उनके प्रेम की गहराई को दर्शाता है।
तीसरे अंतरे में – जो व्यक्ति (चरणजीत – संभवतः रचनाकार का नाम) कल तक केवल मित्र था, प्रीत की रीत निभाता था, उसकी बाँसुरी अब राधा के गीत गाने लगी। प्रेम वैसा का वैसा रह गया, बस राधा का नाम लेता है।
यह भजन राधा के प्रभाव और कृष्ण के उनके प्रति अपार प्रेम का सजीव वर्णन करता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
प्रश्नोत्तरी शैली का भजन: यह भजन अनूठा है क्योंकि इसमें भक्त सीधे राधा रानी से प्रश्न करता है – “तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा?” यह भक्ति और जिज्ञासा का अद्भुत मिश्रण है।
कृष्ण की राधा पर निर्भरता: हर अंतरे में यह दिखाया गया है कि कृष्ण हर क्रिया में राधा पर आश्रित हैं – बिना राधा के न बाँसुरी, न जमुना, न माखन।
“चरणजीत” का उल्लेख: अंतरे में ‘चरणजीत’ नाम आता है, जो संभवतः रचनाकार या भक्त का नाम है, जो इस भजन को व्यक्तिगत बनाता है।
💖 राधा-कृष्ण प्रेम का रहस्य
🎯 संदेश
राधा के प्रेम ने कृष्ण को दीवाना बना दिया। यह प्रेम इतना गहरा है कि कृष्ण हर पल, हर क्रिया में राधा का साथ चाहते हैं। सच्चा प्रेम बिना किसी जादू-टोने के भी दीवाना बना देता है – बस सच्चाई चाहिए।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन राधा-कृष्ण भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। “राधा रानी हमें भी बता दे ज़रा” – यह पंक्ति हर उस भक्त के हृदय की आवाज़ है जो राधा-कृष्ण के अद्भुत प्रेम को समझना चाहता है।
🙏 राधे-राधे ।। जय श्री कृष्ण ।। तेरा दीवाना कैसे हुआ साँवरा? ।।