🙏 अब ना करूँगी बिहारी तोसे बतिया – विरह भजन

(Ab Na Karungi Bihari Tose Batiya – Virah Bhajan) – अभिषेक तिवारी

🎤 गायक: अभिषेक तिवारी | तर्ज: विरह भाव / गोपी प्रेम (Virah Bhav / Sweet Complaint)

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: अभिषेक तिवारी
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / विरह भजन / गोपी भाव
🎵 तर्ज: विरह भाव / गोपी प्रेम (Virah Bhav / Sweet Complaint)
📀 भाव: विरह, व्याकुलता, मीठी शिकायत, प्रेम में छल का अहसास

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

सह लूँगी सारी जुदाई वाली रतियाँ,
अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ॥
प्रीत लगाई और दिल शरमाया,
बेदर्दी तू फिर भी न आया।
झूठे तेरे वादे और झूठी तेरी बतियाँ,
अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ॥

तू भी झूठा, प्रीत भी झूठी,
प्रीत भी झूठी, और तू भी झूठा।
बेदर्दी तूने सब कुछ लूटा,
धड़क रही मेरी व्याकुल छतिया,
अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ॥

राह तकत बस रह गई सखियाँ,
पागल कर गई मोए तेरी अखियाँ।
राह तकत तेरी सारी सखियाँ,
अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ॥

प्यार जता के तन-मन लूटा,
कान्हा तूने सब कुछ लूटा।
झूठे तेरे वादे और झूठी तेरी बतियाँ,
अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ॥
अब ना करूँगी बिहारी तोसे बतिया॥

🎤 गायक : अभिषेक तिवारी

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत भावपूर्ण विरह भजन है, जिसमें गोपी के मन की व्यथा और कृष्ण (बिहारी) के प्रति मीठी शिकायत व्यक्त की गई है। “अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ” – अब मैं तुमसे बातें नहीं करूँगी (नाराज़गी और विरह की पीड़ा में)। लेकिन साथ ही कहती है – सह लूँगी सारी जुदाई वाली रातें।

गोपी कहती है – प्रीत लगाई, दिल शरमाया (प्रेम जताने में संकोच हुआ), पर बेदर्द तू फिर भी नहीं आया। तेरे वादे झूठे हैं, तेरी बातें झूठी हैं।

दूसरे अंतरे में – तू भी झूठा, प्रीत भी झूठी। बेदर्द तूने सब कुछ लूट लिया। मेरी छाती व्याकुल धड़क रही है।

तीसरे अंतरे में – सखियाँ राह देखते-देखते रह गईं। तेरी आँखों ने मुझे पागल कर दिया। सारी सखियाँ तेरी राह देख रही हैं।

यह भजन गोपियों के उस विरह को दर्शाता है जब कृष्ण वृन्दावन से गए और फिर नहीं लौटे। यह प्रेम, पीड़ा और मीठी शिकायत का अद्भुत मिश्रण है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

विरह रस की सजीव अभिव्यक्ति: यह भजन ब्रज की गोपियों के कृष्ण वियोग की पीड़ा को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है। “अब न करूँगी बतियाँ” का भाव – नाराज़गी के बावजूद प्रेम की गहराई को दर्शाता है।

अभिषेक तिवारी का मार्मिक गायन: अभिषेक तिवारी अपने भावपूर्ण और मधुर स्वर के लिए जाने जाते हैं, जो इस भजन में विरह की पीड़ा को और भी प्रभावशाली बनाता है।

“झूठे वादे और झूठी बतियाँ”: यह पंक्ति प्रेम में धोखा महसूस होने पर भी उसी प्रेम में डूबे रहने की दुविधा को दर्शाती है।

💖 विरह में भी प्रेम की गहराई

🎯 संदेश

जहाँ सच्चा प्रेम होता है, वहाँ विरह में भी शिकायत मीठी लगती है। “अब न करूँगी बतियाँ” कहकर भी गोपी उसी की राह देखती है – यही प्रेम की विडंबना और गहराई है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हर उस भक्त को प्रेरणा देता है जो प्रभु के वियोग में तड़पता है। यह बताता है कि प्रभु से मीठी शिकायत करना भी एक भक्ति भाव है।

🙏 राधे-राधे ।। जय श्री कृष्ण ।। अब न करूँगी बिहारी तोसे बतियाँ ।।

॥ इति विरह भजनम् ॥
॥ सह लूँगी सारी जुदाई वाली रतियाँ – अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ ॥