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Krishna Bhajan

अब ना करूँगी बिहारी तोसे बतिया (विरह भजन) लिरिक्स - अभिषेक तिवारी | Ab Na Karungi Bihari Tose Batiya Virah Bhajan Abhishek Tiwari Lyrics

581 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 अब ना करूँगी बिहारी तोसे बतिया – विरह भजन

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Ab Na Karungi Bihari Tose Batiya – Virah Bhajan) – अभिषेक तिवारी

🎤 गायक: अभिषेक तिवारी | तर्ज: विरह भाव / गोपी प्रेम (Virah Bhav / Sweet Complaint)

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: अभिषेक तिवारी
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / विरह भजन / गोपी भाव
🎵 तर्ज: विरह भाव / गोपी प्रेम (Virah Bhav / Sweet Complaint)
📀 भाव: विरह, व्याकुलता, मीठी शिकायत, प्रेम में छल का अहसास

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

सह लूँगी सारी जुदाई वाली रतियाँ,
अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ॥
प्रीत लगाई और दिल शरमाया,
बेदर्दी तू फिर भी न आया।
झूठे तेरे वादे और झूठी तेरी बतियाँ,
अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ॥

तू भी झूठा, प्रीत भी झूठी,
प्रीत भी झूठी, और तू भी झूठा।
बेदर्दी तूने सब कुछ लूटा,
धड़क रही मेरी व्याकुल छतिया,
अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ॥

राह तकत बस रह गई सखियाँ,
पागल कर गई मोए तेरी अखियाँ।
राह तकत तेरी सारी सखियाँ,
अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ॥

प्यार जता के तन-मन लूटा,
कान्हा तूने सब कुछ लूटा।
झूठे तेरे वादे और झूठी तेरी बतियाँ,
अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ॥
अब ना करूँगी बिहारी तोसे बतिया॥

🎤 गायक : अभिषेक तिवारी

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत भावपूर्ण विरह भजन है, जिसमें गोपी के मन की व्यथा और कृष्ण (बिहारी) के प्रति मीठी शिकायत व्यक्त की गई है। “अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ” – अब मैं तुमसे बातें नहीं करूँगी (नाराज़गी और विरह की पीड़ा में)। लेकिन साथ ही कहती है – सह लूँगी सारी जुदाई वाली रातें।

गोपी कहती है – प्रीत लगाई, दिल शरमाया (प्रेम जताने में संकोच हुआ), पर बेदर्द तू फिर भी नहीं आया। तेरे वादे झूठे हैं, तेरी बातें झूठी हैं।

दूसरे अंतरे में – तू भी झूठा, प्रीत भी झूठी। बेदर्द तूने सब कुछ लूट लिया। मेरी छाती व्याकुल धड़क रही है।

तीसरे अंतरे में – सखियाँ राह देखते-देखते रह गईं। तेरी आँखों ने मुझे पागल कर दिया। सारी सखियाँ तेरी राह देख रही हैं।

यह भजन गोपियों के उस विरह को दर्शाता है जब कृष्ण वृन्दावन से गए और फिर नहीं लौटे। यह प्रेम, पीड़ा और मीठी शिकायत का अद्भुत मिश्रण है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

विरह रस की सजीव अभिव्यक्ति: यह भजन ब्रज की गोपियों के कृष्ण वियोग की पीड़ा को सजीव रूप में प्रस्तुत करता है। “अब न करूँगी बतियाँ” का भाव – नाराज़गी के बावजूद प्रेम की गहराई को दर्शाता है।

अभिषेक तिवारी का मार्मिक गायन: अभिषेक तिवारी अपने भावपूर्ण और मधुर स्वर के लिए जाने जाते हैं, जो इस भजन में विरह की पीड़ा को और भी प्रभावशाली बनाता है।

“झूठे वादे और झूठी बतियाँ”: यह पंक्ति प्रेम में धोखा महसूस होने पर भी उसी प्रेम में डूबे रहने की दुविधा को दर्शाती है।

💖 विरह में भी प्रेम की गहराई

🎯 संदेश

जहाँ सच्चा प्रेम होता है, वहाँ विरह में भी शिकायत मीठी लगती है। “अब न करूँगी बतियाँ” कहकर भी गोपी उसी की राह देखती है – यही प्रेम की विडंबना और गहराई है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हर उस भक्त को प्रेरणा देता है जो प्रभु के वियोग में तड़पता है। यह बताता है कि प्रभु से मीठी शिकायत करना भी एक भक्ति भाव है।

🙏 राधे-राधे ।। जय श्री कृष्ण ।। अब न करूँगी बिहारी तोसे बतियाँ ।।

॥ इति विरह भजनम् ॥
॥ सह लूँगी सारी जुदाई वाली रतियाँ – अब न करूँगी मैं, बिहारी तोसे बतियाँ ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "अब ना करूँगी बिहारी तोसे बतिया (विरह भजन) लिरिक्स - अभिषेक तिवारी | Ab Na Karungi Bihari Tose Batiya Virah Bhajan Abhishek Tiwari Lyrics" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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