🙏 मन मोहन प्यारा – दर्शन दीजो जी

(Man Mohan Pyara – Darshan Dijo Ji) – कृष्ण भजन / राजस्थानी भजन

🎤 गायक: रमेश जी शर्मा | तर्ज: “बलासा थाने” | गिरधारी से दर्शन की प्रार्थना

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: रमेश जी शर्मा
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / राजस्थानी लोक भजन
🎵 तर्ज: “बलासा थाने”
📀 विशेषता: मन मोहन (कृष्ण) से दर्शन, पाप कटने, भक्ति भरने और सांवरिया रंग देने की प्रार्थना – राजस्थानी भाषा में रचित भावपूर्ण भजन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी-राजस्थानी मिश्रित)

मन मोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी।

॥ दोहा ॥

गजब की बांसुरी बजती थी,
वृंदावन बसैया की,
तारीफ करूँ मुरली की,
या मुरलीधर कन्हैया की।
जहाँ काम ना चलता था,
तीरों और कमानों से,
विजय नटवर की होती थी,
वहां मुरली की तानों से।
मुरली वाले सांवरा,
तू एकर मा कानि देख,
नैना में रमा लूँ तने,
ज्यूँ काजल की रेख।

मन मोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

॥ अंतरा १ – दर्शन से पाप कटेला ॥

दर्शन से म्हारा,
पाप कटेला जी,
दर्शन से म्हारा,
पाप कटेला जी,
भवसागर से तिरस्या,
मनमोहन गिरधारी,
मनमोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

॥ अंतरा २ – हिवड़ा में भक्ति भर दीजो ॥

हिवड़ा में म्हारे,
भक्ति भर दीजो जी,
हिवड़ा में म्हारे,
भक्ति भर दीजो जी,
गुणगान करां थारो,
सांवरिया गिरधारी,
मनमोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

॥ अंतरा ३ – रंग श्याम सलोनो, मनड़ा में भायो ॥

रंग श्याम सलोनो,
मनड़ा में भायो जी,
रंग श्याम सलोनो,
मनड़ा में भायो जी,
सांवरिया रंग दीजो,
मेली चादर या म्हारी,
मनमोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

॥ अंतरा ४ – ‘नंदू’ भगता संग, श्याम रिझावा ॥

‘नंदू’ भगता संग,
श्याम रिझावा जी,
करुणा तो कर दीजो,
बरसे किरपा थारी,
मनमोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

मन मोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

🎤 गायक : रमेश जी शर्मा

🎵 तर्ज : बलासा थाने

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत मधुर कृष्ण भजन राजस्थानी मिश्रित भाषा में रचित है। “मन मोहन प्यारा, दर्शन दीजो जी” – भक्त मन मोहन (कृष्ण) से दर्शन देने की प्रार्थना करता है। “मांगा तो के मांगा, मैं था से गिरधारी” – भक्त कहता है कि मैंने गिरधारी से क्या माँगा? (अर्थात केवल दर्शन ही माँगा)।

दोहे में बाँसुरी की महिमा का वर्णन है – वृन्दावन में बसने वाले कृष्ण की बाँसुरी अद्भुत थी, जिसकी तानों से विजय होती थी, न कि तीर-कमान से। भक्त मुरली वाले सांवरिया से अपनी नैनों में समाने की प्रार्थना करता है, जैसे काजल की रेखा।

पहले अंतरे में – भक्त कहता है कि दर्शन से उसके पाप कटेंगे, और वह भवसागर (जन्म-मरण के समुद्र) से तैरकर पार हो जाएगा।

दूसरे अंतरे में – भक्त के हृदय में भक्ति भर देने की प्रार्थना, ताकि वह सांवरिया गिरधारी का गुणगान कर सके।

तीसरे अंतरे में – श्याम का रंग मन को भा गया है। भक्त चाहता है कि सांवरिया उसकी मैली चादर को रंग दे – अर्थात उसके जीवन को अपने रंग में रंग दे।

चौथे अंतरे में – ‘नंदू’ भक्त के संग रहकर श्याम को रिझाने की बात कहता है, और कृपा बरसाने की प्रार्थना करता है।

यह भजन कृष्ण भक्ति में पूर्ण समर्पण और दर्शन की गहरी तड़प को व्यक्त करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

राजस्थानी भाषा का प्रयोग: “हिवड़ा” (हृदय), “म्हारा” (मेरा), “तिरस्या” (तैरना), “सलोनो” (सुंदर), “मेली चादर” (मैली चादर) – ये शब्द राजस्थानी भाषा की सहजता और मिठास को दर्शाते हैं।

गिरधारी संबोधन: कृष्ण को “गिरधारी” (गोवर्धन धारी) कहना उनके बाल लीला स्वरूप का स्मरण है।

“मांगा तो के मांगा” – विनम्रता का भाव: यह पंक्ति भक्त की विनम्रता को दर्शाती है – वह कुछ विशेष नहीं माँगता, केवल दर्शन चाहता है।

💖 गिरधारी के प्रति समर्पण

🎯 संदेश

मन मोहन के दर्शन ही जीवन का सबसे बड़ा सुख है। उनके दर्शन से पाप कटते हैं, भक्ति भरती है, और जीवन उनके रंग में रंग जाता है। बस एक ही माँग है – दर्शन दीजो जी।

✨ आस्था का प्रतीक

रमेश जी शर्मा के स्वर में यह भजन कृष्ण भक्तों के हृदय में उतर जाता है। “मन मोहन प्यारा, दर्शन दीजो जी” की पुकार भक्त की तड़प को साकार करती है।

🙏 जय श्री कृष्ण ।। मन मोहन प्यारा दर्शन दीजो जी ।। गिरधारी की जय ।।

॥ इति कृष्ण भजनम् ॥
॥ मन मोहन प्यारा, दर्शन दीजो जी – मांगा तो के मांगा, मैं था से गिरधारी ॥