Krishna Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

मन मोहन प्यारा दर्शन दीजो जी (कृष्ण भजन) लिरिक्स

मन मोहन प्यारा दर्शन दीजो जी कृष्ण भजन के बोल पढ़ें। संदर्भ एवं व्याख्या सहित सुंदर राजस्थानी भजन लिरिक्स।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 मन मोहन प्यारा – दर्शन दीजो जी

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें।

(Man Mohan Pyara – Darshan Dijo Ji) – कृष्ण भजन / राजस्थानी भजन

🎤 गायक: रमेश जी शर्मा | तर्ज: “बलासा थाने” | गिरधारी से दर्शन की प्रार्थना

📝 भजन विवरण

🎤 गायक: रमेश जी शर्मा
🏷️ श्रेणी: कृष्ण भजन / राजस्थानी लोक भजन
🎵 तर्ज: “बलासा थाने”
📀 विशेषता: मन मोहन (कृष्ण) से दर्शन, पाप कटने, भक्ति भरने और सांवरिया रंग देने की प्रार्थना – राजस्थानी भाषा में रचित भावपूर्ण भजन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी-राजस्थानी मिश्रित)

मन मोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी।

॥ दोहा ॥

गजब की बांसुरी बजती थी,
वृंदावन बसैया की,
तारीफ करूँ मुरली की,
या मुरलीधर कन्हैया की।
जहाँ काम ना चलता था,
तीरों और कमानों से,
विजय नटवर की होती थी,
वहां मुरली की तानों से।
मुरली वाले सांवरा,
तू एकर मा कानि देख,
नैना में रमा लूँ तने,
ज्यूँ काजल की रेख।

मन मोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

॥ अंतरा १ – दर्शन से पाप कटेला ॥

दर्शन से म्हारा,
पाप कटेला जी,
दर्शन से म्हारा,
पाप कटेला जी,
भवसागर से तिरस्या,
मनमोहन गिरधारी,
मनमोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

॥ अंतरा २ – हिवड़ा में भक्ति भर दीजो ॥

हिवड़ा में म्हारे,
भक्ति भर दीजो जी,
हिवड़ा में म्हारे,
भक्ति भर दीजो जी,
गुणगान करां थारो,
सांवरिया गिरधारी,
मनमोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

॥ अंतरा ३ – रंग श्याम सलोनो, मनड़ा में भायो ॥

रंग श्याम सलोनो,
मनड़ा में भायो जी,
रंग श्याम सलोनो,
मनड़ा में भायो जी,
सांवरिया रंग दीजो,
मेली चादर या म्हारी,
मनमोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

॥ अंतरा ४ – ‘नंदू’ भगता संग, श्याम रिझावा ॥

‘नंदू’ भगता संग,
श्याम रिझावा जी,
करुणा तो कर दीजो,
बरसे किरपा थारी,
मनमोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

मन मोहन प्यारा,
दर्शन दीजो जी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी,
मांगा तो के मांगा,
मैं था से गिरधारी

🎤 गायक : रमेश जी शर्मा

🎵 तर्ज : बलासा थाने

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत मधुर कृष्ण भजन राजस्थानी मिश्रित भाषा में रचित है। “मन मोहन प्यारा, दर्शन दीजो जी” – भक्त मन मोहन (कृष्ण) से दर्शन देने की प्रार्थना करता है। “मांगा तो के मांगा, मैं था से गिरधारी” – भक्त कहता है कि मैंने गिरधारी से क्या माँगा? (अर्थात केवल दर्शन ही माँगा)।

दोहे में बाँसुरी की महिमा का वर्णन है – वृन्दावन में बसने वाले कृष्ण की बाँसुरी अद्भुत थी, जिसकी तानों से विजय होती थी, न कि तीर-कमान से। भक्त मुरली वाले सांवरिया से अपनी नैनों में समाने की प्रार्थना करता है, जैसे काजल की रेखा।

पहले अंतरे में – भक्त कहता है कि दर्शन से उसके पाप कटेंगे, और वह भवसागर (जन्म-मरण के समुद्र) से तैरकर पार हो जाएगा।

दूसरे अंतरे में – भक्त के हृदय में भक्ति भर देने की प्रार्थना, ताकि वह सांवरिया गिरधारी का गुणगान कर सके।

तीसरे अंतरे में – श्याम का रंग मन को भा गया है। भक्त चाहता है कि सांवरिया उसकी मैली चादर को रंग दे – अर्थात उसके जीवन को अपने रंग में रंग दे।

चौथे अंतरे में – ‘नंदू’ भक्त के संग रहकर श्याम को रिझाने की बात कहता है, और कृपा बरसाने की प्रार्थना करता है।

यह भजन कृष्ण भक्ति में पूर्ण समर्पण और दर्शन की गहरी तड़प को व्यक्त करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

राजस्थानी भाषा का प्रयोग: “हिवड़ा” (हृदय), “म्हारा” (मेरा), “तिरस्या” (तैरना), “सलोनो” (सुंदर), “मेली चादर” (मैली चादर) – ये शब्द राजस्थानी भाषा की सहजता और मिठास को दर्शाते हैं।

गिरधारी संबोधन: कृष्ण को “गिरधारी” (गोवर्धन धारी) कहना उनके बाल लीला स्वरूप का स्मरण है।

“मांगा तो के मांगा” – विनम्रता का भाव: यह पंक्ति भक्त की विनम्रता को दर्शाती है – वह कुछ विशेष नहीं माँगता, केवल दर्शन चाहता है।

💖 गिरधारी के प्रति समर्पण

🎯 संदेश

मन मोहन के दर्शन ही जीवन का सबसे बड़ा सुख है। उनके दर्शन से पाप कटते हैं, भक्ति भरती है, और जीवन उनके रंग में रंग जाता है। बस एक ही माँग है – दर्शन दीजो जी।

✨ आस्था का प्रतीक

रमेश जी शर्मा के स्वर में यह भजन कृष्ण भक्तों के हृदय में उतर जाता है। “मन मोहन प्यारा, दर्शन दीजो जी” की पुकार भक्त की तड़प को साकार करती है।

🙏 जय श्री कृष्ण ।। मन मोहन प्यारा दर्शन दीजो जी ।। गिरधारी की जय ।।

॥ इति कृष्ण भजनम् ॥
॥ मन मोहन प्यारा, दर्शन दीजो जी – मांगा तो के मांगा, मैं था से गिरधारी ॥
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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

प्रस्तुत राधा-कृष्ण भजन "मन मोहन प्यारा दर्शन दीजो जी (कृष्ण भजन) लिरिक्स | Man Mohan Pyara Darshan Dijo Ji Ramesh Sharma Krishna Bhajan Lyrics" के माध्यम से भक्त और आराध्य के परम संबंध को दर्शाया गया है। वैष्णव संप्रदाय में राधा-कृष्ण का प्रेम लौकिक प्रेम न होकर जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। इस भजन की एक-एक पंक्ति का सार यही है कि भगवान श्री कृष्ण स्वयं राधा रानी के प्रेम के अधीन हैं। बिना राधा के न तो वे मुरली बजाते हैं और न ही गोपी-गोपियों को सुख देते हैं।

भजन के पदों में यह स्पष्ट होता है कि वृंदावन की कुंज गलियों में जब तक 'राधे-राधे' नाम की गूंज नहीं होती, तब तक भगवान श्यामसुंदर का मन भी वहां नहीं रमता। भक्त राधा जी से आग्रह करता है कि वे भी कृष्ण की इस भक्ति और दिव्यता का रहस्य उजागर करें, ताकि एक सामान्य साधक भी कृष्ण प्रेम का अधिकारी बन सके।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

ब्रह्म पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, भगवान कृष्ण की आराधना से पूर्व राधा जी का नाम स्मरण करना अनिवार्य माना गया है। राधा नाम की महिमा स्वयं कृष्ण गाते हैं। इस भजन को श्रद्धापूर्वक गाने या सुनने से साधक के हृदय में भक्ति रस का संचार होता है और मानसिक विकारों तथा चिंताओं का समूल नाश होता है।

श्रीमद्भगवद्गीता के दिव्य उपदेशों को जानने के लिए भगवद्गीता खंड अवश्य पढ़ें और भगवान कृष्ण की लीलाओं के गहन अध्ययन के लिए ब्रह्म पुराण का पाठ करें। राधा-कृष्ण भजन के गायन से गृहक्लेश दूर होता है, दांपत्य जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक वातावरण सात्विक बनता है। यदि इसका नियमित संकीर्तन किया जाए, तो साधक को मानसिक एकाग्रता और दिव्य शांति की अनुभूति होती है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

इस भजन के संकीर्तन के लिए सर्वोत्तम समय प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त) अथवा संध्या आरती के समय का है। गायन के समय दीप प्रज्वलित कर, तुलसी दल अर्पित करें और शुद्ध भाव से युगल सरकार (राधा-कृष्ण) की छवि का ध्यान करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

इस भजन के मुख्य आराध्य देव कौन हैं?

इस भजन के मुख्य आराध्य देव युगल सरकार अर्थात भगवान श्री कृष्ण और श्री राधा रानी जी हैं।

राधा-कृष्ण भजन का पाठ किस दिन विशेष रूप से करना चाहिए?

यद्यपि भगवान के नाम संकीर्तन के लिए हर दिन शुभ है, किन्तु एकादशी, पूर्णिमा और शनिवार/रविवार के दिन इसका संकीर्तन विशेष फलदायी माना गया है।

क्या यह भजन पारिवारिक सुख-शांति के लिए सहायक है?

हाँ, राधा-कृष्ण के भक्तिमय भजनों को घर में नियमित रूप से गाने अथवा सुनने से दांपत्य प्रेम बढ़ता है और नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है।

श्रेणियां: Krishna Bhajan Ram Bhajan

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 20 Oct 2026

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