🙏 संतोषी माता चालीसा – जय संतोषी मां जग जननी
(Santoshi Mata Chalisa Lyrics In Hindi) – Pamela Jain Bhajan 2026 | Maa Santoshi Chalisa
📝 संतोषी माता चालीसा विवरण
📜 संतोषी माता चालीसा लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ दोहा ॥
श्री गणपति पद नाय सिर, धरि हिय शारदा ध्यान ।
संतोषी मां की करुँ, कीर्ति सकल बखान ॥
॥ चौपाई ॥
जय संतोषी मां जग जननी, खल मति दुष्ट दैत्य दल हननी।
गणपति देव तुम्हारे ताता, रिद्धि सिद्धि कहलावहं माता॥1॥
माता पिता की रहौ दुलारी, कीर्ति केहि विधि कहुं तुम्हारी।
क्रिट मुकुट सिर अनुपम भारी, कानन कुण्डल को छवि न्यारी॥2॥
सोहत अंग छटा छवि प्यारी, सुंदर चीर सुनहरी धारी।
आप चतुर्भुज सुघड़ विशाल, धारण करहु गए वन माला॥3॥
निकट है गौ अमित दुलारी, करहु मयुर आप असवारी।
जानत सबही आप प्रभुताई, सुर नर मुनि सब करहि बड़ाई॥4॥
तुम्हरे दरश करत क्षण माई, दुख दरिद्र सब जाय नसाई।
वेद पुराण रहे यश गाई, करहु भक्ता की आप सहाई॥5॥
ब्रह्मा संग सरस्वती कहाई, लक्ष्मी रूप विष्णु संग आई।
शिव संग गिरजा रूप विराजी, महिमा तीनों लोक में गाजी॥6॥
शक्ति रूप प्रगती जन जानी, रुद्र रूप भई मात भवानी।
दुष्टदलन हित प्रगटी काली, जगमग ज्योति प्रचंड निराली॥7॥
चण्ड मुण्ड महिषासुर मारे, शुम्भ निशुम्भ असुर हनि डारे।
महिमा वेद पुरनन बरनी, निज भक्तन के संकट हरनी ॥8॥
रूप शारदा हंस मोहिनी, निरंकार साकार दाहिनी।
प्रगटाई चहुंदिश निज माय, कण कण में है तेज समाया॥9॥
पृथ्वी सूर्य चंद्र अरु तारे, तव इंगित क्रम बद्ध हैं सारे।
पालन पोषण तुमहीं करता, क्षण भंगुर में प्राण हरता॥10॥
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावैं, शेष महेश सदा मन लावे।
मनोकमना पूरण करनी, पाप काटनी भव भय तरनी॥11॥
चित्त लगय तुम्हें जो ध्यात, सो नर सुख सम्पत्ति है पाता।
बंध्या नारि तुमहिं जो ध्यावैं, पुत्र पुष्प लता सम वह पावैं॥12॥
पति वियोगी अति व्याकुल नारी, तुम वियोग अति व्याकुल हारी।
कन्या जो कोइ तुमको ध्यावै, अपना मन वांछित वर पावै॥13॥
शीलवान गुणवान हो मैया, अपने जन की नाव खिवैया।
विधि पूर्वक व्रत जो कोइ करहीं, ताहि अमित सुख संपत्ति भरहीं॥14॥
गुड़ और चना भोग तोहि भावै, सेवा करै सो आनंद पावै ।
श्रद्धा युक्त ध्यान जो धरहीं, सो नर निश्चय भव सों तरहीं॥15॥
उद्यापन जो करहि तुम्हारा, ताको सहज करहु निस्तारा।
नारी सुहागन व्रत जो करती, सुख सम्पत्ति सों गोदी भरती॥16॥
जो सुमिरत जैसी मन भावा, सो नर वैसों ही फल पावा।
सात शुक्र जो व्रत मन धारे, ताके पूर्ण मनोरथ सारे॥17॥
सेवा करहि भक्ति युक्त जोई, ताको दूर दरिद्र दुख होई।
जो जन शरण माता तेरी आवै, ताके क्षण में काज बनावै॥18॥
जय जय जय अम्बे कल्यानी, कृपा करौ मोरी महारानी।
जो कोइ पढ़ै मात चालीसा, तापै करहीं कृपा जगदीशा॥19॥
नित प्रति पाठ करै इक बार, सो नर रहै तुम्हारा प्यारा ।
नाम लेत बाधा सब भागे, रोग द्वेष कबहूँ ना लागे॥20॥
॥ दोहा ॥
संतोषी माँ के सदा बंदहूँ पग निश वास
पूर्ण मनोरथ हो सकल मात हरौ भव त्रास॥
🎤 गायिका :- पामेला जैन (Pamela Jain)
✍️ रचना :- पारंपरिक (Traditional)
🎵 संगीत :- सैमुअल पॉल (Samuel Paul)
🏢 म्यूजिक लेबल :- विंग्स म्यूजिक (Wings Music)
🙏 संतोषी माता चालीसा का महत्व और लाभ
संतोषी माता शक्ति की देवी हैं जो संतोष (सन्तुष्टि) का प्रतीक हैं। इनकी उपासना से मनुष्य के जीवन में संतोष, सुख और समृद्धि आती है। संतोषी माता चालीसा का नियमित पाठ करने से सभी मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं।
प्रमुख लाभ:
- दुख-दरिद्र का नाश: "तुम्हरे दरश करत क्षण माई, दुख दरिद्र सब जाय नसाई" – माता के दर्शन मात्र से सभी दुख और दरिद्रता दूर हो जाते हैं।
- संतान सुख: "बंध्या नारि तुमहिं जो ध्यावैं, पुत्र पुष्प लता सम वह पावैं" – बंध्या स्त्री भी संतोषी माता का ध्यान करने से संतान सुख प्राप्त करती है।
- व्रत का महत्व: "विधि पूर्वक व्रत जो कोइ करहीं, ताहि अमित सुख संपत्ति भरहीं" – विधि पूर्वक व्रत करने से अपार सुख और संपत्ति की प्राप्ति होती है।
- सात शुक्रवार का व्रत: "सात शुक्र जो व्रत मन धारे, ताके पूर्ण मनोरथ सारे" – सात शुक्रवार का व्रत रखने से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
- भोग: "गुड़ और चना भोग तोहि भावै" – संतोषी माता को गुड़ और चने का भोग अत्यंत प्रिय है।
पाठ विधि: संतोषी माता चालीसा का पाठ प्रातःकाल स्नान करने के बाद या शुक्रवार के दिन विशेष रूप से करना चाहिए। माता की प्रतिमा या चित्र के सामने घी का दीपक जलाकर, श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ करें। अंत में माता की आरती करें और गुड़-चने का भोग लगाएं।
🔍 संतोषी माता का विशेष महत्त्व
📖 पौराणिक महत्व
संतोषी माता का उल्लेख मुख्य रूप से "व्रत राज" नामक ग्रंथ में मिलता है। वे भगवान शंकर और माता पार्वती की पुत्री मानी जाती हैं। इस चालीसा के अनुसार, गणपति देव इनके ताता (पिता) हैं और रिद्धि-सिद्धि इनकी माता कहलाती हैं।
🎨 स्वरूप वर्णन
- चतुर्भुज (चार भुजाओं वाली)
- सिर पर क्रिट मुकुट (किरीट मुकुट)
- कानों में कुंडल
- सुनहरी चीर धारण किए हुए
- वन माला धारण किए हुए
- मयूर (मोर) पर सवार
🙏 विभिन्न रूप
- शारदा रूप: ज्ञान का रूप
- हंस मोहिनी: मोहित करने वाली
- शक्ति रूप: शक्ति का स्वरूप
- रुद्र रूप: संहारक रूप
- काली रूप: दुष्टों का नाश करने वाली
📅 व्रत विशेष
- शुक्रवार: संतोषी माता का दिन
- सात शुक्रवार: विशेष व्रत
- उद्यापन: व्रत पूर्ण होने पर किया जाने वाला अनुष्ठान
॥ जय संतोषी मां जग जननी, खल मति दुष्ट दैत्य दल हननी ॥
💖 संतोषी माता चालीसा का संदेश
🎯 संदेश
संतोषी माता चालीसा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति और संतोष से ही जीवन में सुख और समृद्धि आती है। माता की कृपा से सभी दुख-दरिद्र दूर होते हैं और मनुष्य के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। यह चालीसा नारी सशक्तिकरण का भी प्रतीक है जहाँ बंध्या नारी, पति वियोगिनी और कन्याएँ माता का ध्यान करके अपनी मनोकामनाएँ पूर्ण करती हैं।
✨ पामेला जैन की आवाज़ में
संतोषी माता चालीसा को प्रसिद्ध पार्श्वगायिका पामेला जैन ने अपनी मधुर आवाज़ दी है। सैमुअल पॉल के संगीत ने इस पारंपरिक चालीसा को एक नया आयाम दिया है। विंग्स म्यूजिक लेबल द्वारा प्रस्तुत यह भजन माता के भक्तों के लिए एक अनमोल उपहार है।
🙏 ॐ श्री संतोषी मातायै नमः || संतोषी माता की जय 🙏
गायिका: पामेला जैन | संगीत: सैमुअल पॉल | म्यूजिक लेबल: विंग्स म्यूजिक
॥ जय संतोषी माता की ॥
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