🙏 है मेरे गीत तेरे लिए राधा

(Hai Mere Geet Tere Liye Radha) – राधा-कृष्ण भजन – स्वस्ति मेहुल

🎤 गायिका / रचनाकार: स्वस्ति मेहुल | भक्ति, प्रेम, समर्पण

📝 भजन विवरण

🎤 गायिका / रचनाकार: स्वस्ति मेहुल
🏷️ श्रेणी: राधा-कृष्ण भजन / प्रेम भक्ति
🎶 भाव: समर्पण, श्रृंगार, रास, आत्मसमर्पण
📀 विशेषता: राधा के प्रति गीत, भाव, लय और शब्द का अद्वितीय समर्पण, मीरा की भक्ति का स्मरण

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

है मेरे गीत तेरे लिए राधा
लय हो तुम, तुम ही भाव हो राधा
जब-जब गाऊं, बस यही चाहूं
रास रचाएं कृष्ण और राधा..

॥ अंतरा १ – सम्मोहन, मीरा का रंग ॥

अब तुम से नज़रें हटती नहीं,
ये लीला है या सम्मोहन
राधा जू को कैसे रिझाऊं,
इतना बता दो हे मोहन
चढ़ा भक्ति का रंग ऐसा
चढ़ा था मीरा पे जैसा
चमक फीकी जग की लागे
बताओ जादू ये कैसा..

स्वस्ति बने वो दर्पण जिसको,
देख-देख शृंगार करे राधा
है मेरे गीत तेरे लिए राधा
लय हो तुम, तुम ही भाव हो राधा
जब-जब गाऊं, बस यही चाहूं
रास रचाएं कृष्ण और राधा..

॥ अंतरा २ – सब तुझ पे छोड़ा, घुंघरू बन जुड़ना ॥

हालात सभी स्वीकार किए,
बाकी सब तुझ पे छोड़ दिया
प्रीत लगी तेरे नाम की ऐसी,
नाता तुझ से जोड़ लिया
जुड़ी सब आस, अब तुझसे
जीत और हार, अब तुझसे
बंधूं चरणों में बन घुंघरू
मेरी झनकार अब तुझसे..

क्या ही लिखूं मैं तुम पर राधा,
अक्षर तुम ही, तुम ही शब्द हो राधा
है मेरे गीत तेरे लिए राधा
लय हो तुम, तुम ही भाव हो राधा
जब-जब गाऊं, बस यही चाहूं
रास रचाएं कृष्ण और राधा..

🎤 गायिका / रचनाकार : स्वस्ति मेहुल

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत मार्मिक राधा-कृष्ण भजन स्वस्ति मेहुल द्वारा रचित और गायित है। इसमें भक्त राधा के प्रति अपने गीत, लय और भाव को समर्पित करता है। “है मेरे गीत तेरे लिए राधा, लय हो तुम, तुम ही भाव हो राधा” – राधा ही गीत का आधार, उद्देश्य और भाव हैं। जब भी गाऊँ, यही चाहता हूँ कि रास (प्रेम-लीला) कृष्ण और राधा रचाएँ।

पहले अंतरे में – नज़रें राधा से नहीं हटतीं; यह लीला है या सम्मोहन? भक्त मोहन (कृष्ण) से पूछता है कि राधा को कैसे रिझाऊँ। भक्ति का ऐसा रंग चढ़ा जैसा मीरा पर चढ़ा था – जिससे जग की चमक फीकी लगने लगी। रचनाकार (स्वस्ति) स्वयं को वह दर्पण बनाना चाहती है जिसे देख-देख राधा श्रृंगार करे।

दूसरे अंतरे में – सारे हालात स्वीकार किए, बाकी सब राधा पर छोड़ दिया। प्रीत ऐसी लगी कि नाता जुड़ गया। सब आशाएँ, जीत-हार – सब राधा से। भक्त चरणों में घुंघरू बनकर बंधना चाहता है – उसकी झनकार भी राधा से ही है।

अंत में – क्या लिखूँ राधा पर? अक्षर भी तुम, शब्द भी तुम। यह गीत पूर्ण रूप से राधा को समर्पित है। यह भजन राधा के प्रति गहरे प्रेम, समर्पण और सेवा भाव को दर्शाता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

राधा के प्रति गीत, लय और भाव का समर्पण: यह भजन अनूठा है क्योंकि यह राधा को ही लय और भाव कहता है – अर्थात संगीत का हर तत्व राधा है।

मीरा की भक्ति का स्मरण: “चढ़ा भक्ति का रंग ऐसा, चढ़ा था मीरा पे जैसा” – मीरा के कृष्ण प्रेम की ऊंचाई को यहाँ राधा के लिए उदाहरण बनाया गया है।

घुंघरू बन चरणों में बंधना: यह सेवा भाव और नम्रता का प्रतीक है – भक्त कुछ भी नहीं चाहता, बस राधा के चरणों की धूल बनना चाहता है।

💖 राधा भक्ति का अद्वितीय रस

🎯 संदेश

सच्ची भक्ति में भक्त अपने आराध्य में ही लीन हो जाता है – उसके गीत, शब्द, लय, भाव – सब आराध्य ही हो जाते हैं। राधा के प्रति ऐसा समर्पण ही सबसे उत्तम भक्ति है।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हर उस भक्त के लिए प्रेरणा है जो राधा-कृष्ण के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करना चाहता है। यह बताता है कि भक्ति में श्रृंगार, संगीत और काव्य का कितना महत्व है।

🙏 राधे-राधे ।। जय श्री कृष्ण ।। स्वस्ति मेहुल की राधा भक्ति को नमन ।।

॥ इति स्वस्ति मेहुल कृत भजनम् ॥
॥ है मेरे गीत तेरे लिए राधा, लय हो तुम, तुम ही भाव हो राधा ॥