प्रस्तावना एवं परिचय
सम्पूर्ण मूल पाठ एवं पवित्र श्लोक
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 सुन लो पुकार मेरे हनुमत बाबा
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।
(Sun Lo Pukar Mere Hanumat Baba) – हनुमान जन्मोत्सव 2026 भजन
विवरण एवं मुख्य बिंदु
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ मुखड़ा ॥
सुन लो पुकार मेरे हनुमत बाबा,
सुन लो पुकार मेरे हनुमत बाबा।
जग से मैं हारा, बेसहारा—बेसहारा मैं।
(मारुति-नंदन)
सुन लो पुकार मेरे हनुमत बाबा,
सुन लो पुकार मेरे हनुमत बाबा॥
॥ अंतरा १ – शरणागति का बल ॥
जो भी आए तेरी शरण,
उसकी जय-जयकार हो।
हाथ तू पकड़ ले जिसका,
कैसे उसकी हार हो॥
मैं भी खड़ा हूँ द्वारे,
झोली पसार के।
जाऊँगा अपनी बिगड़ी
किस्मत सँवार के॥
तुम जाने दोगे कौन देगा
मेरी नैया को किनारा।
(मारुति-नंदन)
हे दुःख-भंजन, मारुति-नंदन,
सुन लो मेरी पुकार।
हे भगवान, सुन लो मेरी पुकार॥
॥ अंतरा २ – संकटमोचन की प्रार्थना ॥
जैसे लखन के प्राण बचाए,
संकटमोचन बनकर कर आए।
जैसे लखन के प्राण बचाए,
संकटमोचन बनकर कर आए॥
वैसे मेरी भी प्रभु लाज बचाओ,
राम के जैसे प्रभु काम बनाओ।
कसम राम जी की, मेरा दुःख जो न निवारा॥
(मारुति-नंदन)
॥ सीताराम मंत्र ॥
सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिए,
जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए।
सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिए,
जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए।
सीताराम, सीताराम, सीताराम कहिए,
जाहि विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए॥
🎤 गायक : हंसराज रघुवंशी
🎵 तर्ज : भावपूर्ण पुकार / हंसराज रघुवंशी स्टाइल
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत मार्मिक हनुमान भजन हनुमान जन्मोत्सव 2026 के अवसर पर हंसराज रघुवंशी द्वारा प्रस्तुत किया गया है। “सुन लो पुकार मेरे हनुमत बाबा” – भक्त हनुमान जी से करुणा पूर्वक अपनी पुकार सुनने का आग्रह करता है। वह कहता है कि वह संसार से हार चुका है और बेसहारा है।
पहले अंतरे में भक्त कहता है कि जो भी हनुमान जी की शरण में आता है, उसकी जय-जयकार होती है। जिसका हाथ वे पकड़ लेते हैं, उसकी हार नहीं हो सकती। भक्त हनुमान जी के द्वार पर झोली पसारे खड़ा है और अपनी बिगड़ी किस्मत सँवारने की प्रार्थना करता है। “तुम जाने दोगे कौन देगा मेरी नैया को किनारा” – वह पूछता है कि यदि हनुमान जी नहीं सुनेंगे तो और कौन उसकी नैया पार लगाएगा। वे दुःख-भंजन, मारुति-नंदन हैं – अतः अपनी पुकार सुनने का आग्रह है।
दूसरे अंतरे में भक्त लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग का स्मरण करता है – जैसे हनुमान जी ने संकटमोचन बनकर लक्ष्मण के प्राण बचाए थे, वैसे ही प्रभु उसकी लाज बचाएँ और राम की तरह उसका काम बनाएँ। वह राम की कसम खाते हुए कहता है कि यदि उसका दुःख न निवारा गया तो… (यह भक्त की व्याकुलता को दर्शाता है)।
अंत में “सीताराम, सीताराम” मंत्र के माध्यम से समर्पण का भाव व्यक्त किया गया है – जैसे राम रखें, वैसे ही रहना चाहिए।
यह भजन हनुमान जी के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास का प्रतीक है, विशेषकर हनुमान जयंती पर यह और भी प्रासंगिक हो जाता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
हनुमान जन्मोत्सव 2026 का विशेष भजन: यह भजन हनुमान जयंती के पावन अवसर पर भक्तों की करुण पुकार को प्रस्तुत करता है। इसमें शरणागति, विश्वास और संकटमोचन की प्रार्थना का अद्भुत समन्वय है।
हंसराज रघुवंशी की भावपूर्ण शैली: “तर्ज: भावपूर्ण पुकार” इस बात का संकेत है कि यह भजन अत्यंत भावुक और आत्मीय शैली में गाया गया है, जो श्रोता के हृदय को सीधे छूती है।
लक्ष्मण प्रसंग का स्मरण: “जैसे लखन के प्राण बचाए” पंक्ति हनुमान जी की संकटमोचक भूमिका को दर्शाती है और भक्त को आश्वस्त करती है कि वे आज भी उसी प्रकार रक्षा कर सकते हैं।
💖 भक्ति रस का संगम
🎯 संदेश
जीवन में जब कोई सहारा न हो, तो हनुमान जी ही एकमात्र सहारा हैं। उनकी शरण में जाने से सब संकट दूर होते हैं। उनकी पुकार सुनने की क्षमता अपार है, बस सच्चे मन से पुकारने की आवश्यकता है।
✨ आस्था का प्रतीक
हनुमान जयंती 2026 पर यह भजन लाखों भक्तों के हृदय में भक्ति का संचार करेगा। “सीताराम” मंत्र के माध्यम से समर्पण का भाव और भी गहरा हो जाता है।
🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय हनुमान ।। सुन लो पुकार मेरे हनुमत बाबा ।।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "सुन लो पुकार मेरे हनुमत बाबा (हनुमान जन्मोत्सव 2026) भजन लिरिक्स | Sun Lo Pukar Mere Hanumat Baba Hansraj Raghuwanshi Lyrics" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।
भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?
शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।
क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?
हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।
शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?
हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।
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