🙏 कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही, हनुमान तुम्हारा क्या कहना
(Kalyug Mein Siddh Ho Dev Tum Hi, Hanuman Tumhara Kya Kehna) – Lakkha Bhajan
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
॥ स्थायी ॥
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना।
॥ अंतरा १ ॥
तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी शक्ति का क्या कहना।
तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी शक्ति का क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना॥
॥ अंतरा २ ॥
सीता की खोज करी तुमने,
तुम सात समंदर पार गए।
सीता की खोज करी तुमने,
तुम सात समंदर पार गए।
लंका को, लंका को
किया श्मशान प्रभु,
बलवान तुम्हारा क्या कहना।
लंका को किया श्मशान प्रभु,
बलवान तुम्हारा क्या कहना।
तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी शक्ति का क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना॥
॥ अंतरा ३ ॥
जब लक्ष्मण जी को शक्ति लगी,
तुम धौलागिरी पर्वत लाए।
जब लक्ष्मण जी को शक्ति लगी,
तुम धौलागिरी पर्वत लाए।
लक्ष्मण के, लक्ष्मण के बचाए आ करके
सब प्राण तुम्हारा क्या कहना।
लक्ष्मण के बचाए आ करके
सब प्राण तुम्हारा क्या कहना।
तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी शक्ति का क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना॥
॥ अंतरा ४ ॥
तुम भक्त शिरोमणि हो जग में,
तुम वीर शिरोमणि हो जग में।
तुम भक्त शिरोमणि हो जग में,
तुम वीर शिरोमणि हो जग में।
तेरे रोम-रोम में, तेरे रोम-रोम में बसते हैं
सियाराम, तुम्हारा क्या कहना।
तेरे रोम-रोम में बसते हैं
सियाराम, तुम्हारा क्या कहना।
तेरी भक्ति का क्या कहना,
तेरी शक्ति का क्या कहना।
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना॥
कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही,
हनुमान तुम्हारा क्या कहना॥
🎤 गायक :- लक्खा (Lakkha)
✍️ रचनाकार :- प्रचलित लोक भजन (अज्ञात)
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह शक्तिशाली हनुमान भजन कलियुग में हनुमान जी की सिद्धता और महिमा का गुणगान करता है। “कलयुग में सिद्ध हो देव तुम ही” – अर्थात कलियुग में आप ही सिद्ध देव (प्रत्यक्ष फल देने वाले) हैं। हनुमान जी को युग-प्रतियुग अमर और सिद्ध माना गया है – वे भक्तों की तुरंत सहायता करते हैं।
भजन में हनुमान जी के प्रमुख कार्यों का वर्णन है – सीता की खोज में सात समुद्र पार करना, लंका दहन करना, लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लाना (धौलागिरी पर्वत उठाना)। “तेरी भक्ति का क्या कहना, तेरी शक्ति का क्या कहना” – यह पंक्ति हनुमान जी की अपरंपार भक्ति और अद्वितीय शक्ति को नमन करती है।
भजन के अंत में कहा गया है – “तुम भक्त शिरोमणि हो जग में, तुम वीर शिरोमणि हो जग में” और “तेरे रोम-रोम में बसते हैं सियाराम”। यह हनुमान जी की सर्वोच्च रामभक्ति को दर्शाता है। यह भजन भक्तों को विश्वास दिलाता है कि कलियुग में हनुमान जी की उपासना से सभी संकट दूर हो सकते हैं।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
कलियुग में हनुमान जी की सिद्धता: मान्यता है कि कलियुग में हनुमान जी सर्वाधिक सिद्ध और शीघ्र फलदायी देवता हैं। उनका नाम जपने से, भजन गाने से या चालीसा पढ़ने से भक्तों के संकट तुरंत दूर होते हैं। यह भजन उसी विश्वास को प्रबल करता है।
“लक्खा भजन” – लोकप्रियता: यह भजन राजस्थानी लोक गायक लक्खा (Lakkha) द्वारा गाया गया है, जो अपने भक्ति गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके गाए इस भजन ने काफी लोकप्रियता अर्जित की है।
रामभक्ति का उत्कर्ष: “तेरे रोम-रोम में बसते हैं सियाराम” – यह पंक्ति बताती है कि हनुमान जी का शरीर ही राम-सीता का मंदिर है। उनकी भक्ति इतनी गहरी है कि वे स्वयं राम के अंश हैं।
💖 भक्ति रस का संगम
🎯 संदेश
कलियुग में भक्तों के लिए हनुमान जी सबसे सुलभ और सिद्ध देवता हैं। उनकी भक्ति, शक्ति और सियाराम के प्रति समर्पण अतुलनीय है। यह भजन हमें याद दिलाता है कि हनुमान जी की शरण में जाने से हर संकट का समाधान संभव है।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन उन सभी भक्तों के लिए प्रेरणा है जो कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। “हनुमान तुम्हारा क्या कहना” – यह वाक्य हनुमान जी की महिमा के आगे सब कुछ नतमस्तक होने का भाव व्यक्त करता है।
🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय बजरंग बली ।। जय श्री राम ।।