🙏 मेहंदीपुर में मच रही धूम, सालासर में मच रही धूम

(Mehandipur Mein Mach Rahi Dhoom, Salasar Mein Mach Rahi Dhoom) – Hanuman Janmotsav Bhajan

🎤 गायक/रचनाकार: कन्हैया मित्तल

📝 भजन विवरण

🎤 गायक/लेखक: कन्हैया मित्तल
🏷️ श्रेणी: हनुमान भजन / जन्मोत्सव विशेष
📍 भाव: उल्लास, भक्ति, उत्सव
📅 अवसर: हनुमान जन्मोत्सव (चैत्र पूर्णिमा)

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

मेहंदीपुर सजा है, सालासर सज गया है,
आ जाओ खुशियां मनाएं,
बजरंग बली का जन्म महोत्सव आ गया है।

॥ स्थायी ॥

मेहंदीपुर में मच रही धूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो,
सालासर में मच रही धूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो।
आयो जन्म महोत्सव थारो।
मेहंदीपुर में मच रही धूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो,
सालासर में मच रही धूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो।

॥ अंतरा १ ॥

चैत की पूर्णिमा जब-जब आवे,
थारो मोहनदास हरषावे,
चैत की पूर्णिमा जब-जब आवे,
थारो मोहनदास हरषावे,
गगन धरती ने लेवे चूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो,
सालासर में मच रही धूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो।

॥ अंतरा २ ॥

माता अंजनी के घर जाया,
बाबा पवन पुत्र कहलाया,
माता अंजनी के घर जाया,
बाबा पवन पुत्र कहलाया,
सारी दुनिया में है धूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो,
सालासर में मच रही धूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो।

॥ अंतरा ३ ॥

कोई शंख नगाड़ा बजावे,
कोई झूमे नाचे गावे,
कोई शंख नगाड़ा बजावे,
कोई झूमे नाचे गावे,
कोई खूब मचावे धूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो,
मेहंदीपुर में मच रही धूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो,
सालासर में मच रही धूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो।

मेहंदीपुर में मच रही धूम,
आयो जन्म महोत्सव थारो॥

🎤 गायक/रचनाकार :- कन्हैया मित्तल

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह भजन हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर रचा गया है, जो चैत्र मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। “मेहंदीपुर में मच रही धूम, सालासर में मच रही धूम” – मेहंदीपुर बालाजी (राजस्थान) और सालासर धाम (हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर) दोनों ही स्थान हनुमान भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह भजन बताता है कि इन दोनों धामों में जन्मोत्सव की धूम मची हुई है।

“चैत की पूर्णिमा जब-जब आवे, थारो मोहनदास हरषावे” – मोहनदास हनुमान जी का ही एक नाम है (जो भक्तों को मोहित करने वाले हैं)। चैत्र पूर्णिमा पर सारा वातावरण हर्षित हो उठता है। गगन-धरती (आकाश-पृथ्वी) मानो हनुमान जी को चूम रहे हैं।

भजन में हनुमान जी के जन्म की कथा का भी उल्लेख है – “माता अंजनी के घर जाया, बाबा पवन पुत्र कहलाया”। अंत में भक्तों के उत्साह को दर्शाया गया है – कोई शंख-नगाड़े बजाता है, कोई नाचता-गाता है, कोई खूब धूम मचाता है। यह भजन हनुमान जन्मोत्सव की खुशियाँ मनाने का आह्वान करता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

मेहंदीपुर बालाजी और सालासर धाम: राजस्थान के दो प्रसिद्ध हनुमान मंदिर – मेहंदीपुर (करौली जिला) और सालासर (चूरू जिला) – भक्तों के लिए आस्था के केंद्र हैं। यह भजन इन दोनों स्थानों पर एक साथ जन्मोत्सव के उत्सव को दर्शाता है।

हनुमान जन्मोत्सव (चैत्र पूर्णिमा): हिंदू कैलेंडर के अनुसार चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस दिन विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। यह भजन उसी उल्लास को व्यक्त करता है।

मोहनदास नाम: हनुमान जी को “मोहनदास” भी कहा जाता है क्योंकि वे भक्तों को अपनी भक्ति में मोहित (आकर्षित) कर लेते हैं। यह नाम विशेषकर राजस्थानी लोक भजनों में प्रचलित है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

हनुमान जन्मोत्सव हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति में उत्सव का भाव होना चाहिए। हनुमान जी के जन्म पर पूरा वातावरण आनंदित हो उठता है – हमें भी इस अवसर पर खुशियाँ बाँटनी चाहिए और भजन-कीर्तन में रमना चाहिए।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन मेहंदीपुर और सालासर जैसे पवित्र धामों की महिमा को दर्शाता है। यह भक्तों को इन स्थानों पर जाकर या वहाँ के अनुभव को मानसिक रूप से साझा करते हुए हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाने की प्रेरणा देता है।

🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय बजरंग बली ।। जय श्री राम ।।

॥ इति श्री हनुमान जन्मोत्सव भजनम् ॥
॥ चैत पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं – जय हनुमान ॥