मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 खुशियों से झूमे मन सारे – के जन्मे है हनुमान प्यारे
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।
(Khushiyon Se Jhume Man Sare – Ke Janme Hai Hanuman Pyare) – हनुमान जन्मोत्सव गीत
📝 गीत विवरण
📜 गीत लिरिक्स (हिन्दी में)
खुशियों से झूमे मन सारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
महलों में गूंजे जयकारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
खुशियों से झूमे मन सारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
॥ अंतरा १ – चैत्र पूनम अलबेला ॥
चैत्र मास पूनम अलबेला,
चतुर्दशी तिथि मंगल बेला।
भोर के चमके हैं तारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
खुशियों से झूमे मन सारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
महलों में गूंजे जयकारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
॥ अंतरा २ – माँ अंजनी के लाल, केसरी हर्षाए ॥
माँ अंजनी ने लाल है ज्याये,
राजा केसरी अति हरषाये।
बाजे शंख नगाड़े,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
खुशियों से झूमे मन सारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
महलों में गूंजे जयकारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
॥ अंतरा ३ – रेशम की डोरी, चंदन का पलना ॥
रेशम की डोरी चन्दन का पलना,
जुग जुग जीवे अंजनी का ललना।
जग में करें उजियारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
खुशियों से झूमे मन सारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
महलों में गूंजे जयकारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
॥ अंतरा ४ – कोटि सूर्य सा मुखड़ा चमके ॥
कोटि सूर्य सा मुखड़ा चमके,
अंग अंग से अति बल दमके।
चंचल नैना मतवारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
खुशियों से झूमे मन सारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
महलों में गूंजे जयकारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
॥ अंतरा ५ – रुद्र ग्यारहवे, शिव अवतारी ॥
रूद्र ग्यारहवे शिव अवतारी,
मोहक छवि पर जग बलिहारी।
रूप कपीस का धारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
खुशियों से झूमे मन सारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
महलों में गूंजे जयकारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
॥ अंतरा ६ – चारों दिशाएं मंगल गावे ॥
चारों दिशाएं मंगल गावे,
सुर नर नारी दरशन पावें।
सजे है गाँव चौबारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
खुशियों से झूमे मन सारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
महलों में गूंजे जयकारे,
के जन्मे है हनुमान प्यारे।
🎵 तर्ज : “लाला की सुन के में आई”
🗣️ भाषा: हिन्दी – लोक भाषा मिश्रित
🙏 गीत का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत लोकप्रिय हनुमान जन्मोत्सव गीत हनुमान जी के जन्म की खुशी में गाया जाता है। “खुशियों से झूमे मन सारे, के जन्मे है हनुमान प्यारे” – सारे मन खुशी से झूम उठे क्योंकि प्यारे हनुमान जी का जन्म हुआ है। महलों में जयकारे गूंज रहे हैं।
पहले अंतरे में जन्म के शुभ समय का उल्लेख – चैत्र मास की पूर्णिमा, चतुर्दशी तिथि और मंगल बेला – यह हनुमान जयंती का पावन संयोग है। भोर के तारे चमक रहे हैं।
दूसरे अंतरे में माता अंजनी और पिता केसरी के हर्ष का वर्णन – “माँ अंजनी ने लाल है ज्याये” (जन्म दिया), राजा केसरी अति प्रसन्न हुए, शंख और नगाड़े बज रहे हैं।
तीसरे अंतरे में बाल हनुमान के पालने की सजावट – रेशम की डोरी, चंदन का पलना। अंजनी का लालना (बालक) जुग-जुग जीवे, वह जगत में उजियारा करे।
चौथे अंतरे में बाल हनुमान का सौंदर्य – कोटि सूर्य के समान चमकता मुखड़ा, अंग-अंग से अत्यधिक बल दमकता है, चंचल नैन मतवाले हैं।
पाँचवें अंतरे में हनुमान जी के शिव अवतार होने का उल्लेख – रुद्र ग्यारहवे, शिव अवतारी। उनका मोहक रूप देखकर जग बलिहारी है। वे कपीश (वानरराज) का रूप धारण करते हैं।
छठे अंतरे में कहा गया है कि चारों दिशाएँ मंगल गा रही हैं, देवता, मनुष्य, नारी सब दर्शन पा रहे हैं। गाँव और चौबारे सज गए हैं।
यह गीत हनुमान जन्म की पूरी लीला – तिथि, माता-पिता का हर्ष, बाल हनुमान का सौंदर्य और शिव अवतार – को सरल और उल्लासपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करता है।
🔍 गीत का विशेष महत्त्व
हनुमान जयंती का प्रमुख लोकगीत: यह गीत हनुमान जयंती के अवसर पर भक्तों द्वारा बड़े उल्लास के साथ गाया जाता है। इसकी सरल और दोहरावदार पंक्तियाँ सामूहिक गायन के लिए अत्यंत उपयुक्त हैं।
लोक परम्परा का सजीव चित्रण: “रेशम की डोरी, चंदन का पलना”, “शंख नगाड़े”, “सजे गाँव चौबारे” – ये शब्द भारतीय जन्मोत्सव परम्पराओं को जीवंत कर देते हैं।
शिव अवतार का उल्लेख: “रुद्र ग्यारहवे शिव अवतारी” – यह पंक्ति हनुमान जी के शिव स्वरूप को रेखांकित करती है, जो उनकी दिव्यता और महिमा का बोध कराती है।
💖 उल्लास और भक्ति का संगम
🎯 संदेश
हनुमान जी का जन्म संपूर्ण सृष्टि में आनंद और उजियारा लेकर आता है। उनके जन्मोत्सव का गीत गाकर हम उनके प्रति अपनी श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
✨ आस्था का प्रतीक
यह गीत हर साल हनुमान जयंती पर लाखों भक्तों के हृदय में उल्लास भरता है। हर पंक्ति भक्तों को बाल हनुमान के दर्शन कराती है और भक्ति में डुबो देती है।
🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय बजरंगबली ।। खुशियों से झूमे मन सारे – के जन्मे है हनुमान प्यारे ।।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "खुशियों से झूमे मन सारे, के जन्मे है हनुमान प्यारे (हनुमान जन्मोत्सव) लिरिक्स | Khushiyon Se Jhume Man Sare Ke Janme Hai Hanuman Pyare Lyrics" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।
भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?
शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।
क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?
हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।
शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?
हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।
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