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भजन : सुबह सुबह ले शिव का नाम लिरिक्स (Subah Subah Le Shiv Ka Naam Lyrics in Hindi) - Gulshan Kumar Hariharan Shiv Bhajan - Bhaktilok

157 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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देवादिदेव महादेव भगवान शिव की आराधना और उनकी महिमा का गुणगान करने वाले भजनों में 'सुबह सुबह ले शिव का नाम' (Subah Subah Le Shiv Ka Naam) का विशेष स्थान है। गुलशन कुमार की प्रसिद्ध शिव महिमा एल्बम और हरिहरन की जादुई एवं भावपूर्ण आवाज में गाया गया यह लोकप्रिय शिव भजन भक्तों के प्रातःकालीन स्मरण का मुख्य आधार है। हिंदू सनातन संस्कृति में ब्रह्म मुहूर्त या प्रातः काल का समय भगवान के ध्यान, स्मरण और जप के लिए अत्यंत पवित्र और ऊर्जावान माना जाता है। इस भजन का मुख्य भाव यह है कि यदि दिन की शुरुआत भगवान शिव के पावन नाम और उनके पवित्र पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' के स्मरण से की जाए, तो मनुष्य के जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है। इस विस्तृत मार्गदर्शिका में हम इस पावन भजन के सम्पूर्ण लिरिक्स, सरल हिंदी अर्थ, भावार्थ, गायन विधि, और इसके आध्यात्मिक महत्व का गहन अध्ययन करेंगे ताकि साधक इसे पूरी तन्मयता के साथ अपने दैनिक जीवन में अपना सकें।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

सुबह सुबह ले शिव का नाम,
कर ले बन्दे यह शुभ काम।
सुबह सुबह ले शिव का नाम,
शिव आयेंगे तेरे काम॥

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय
ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय...

खुद को राख लपेटे फिरते,
औरों को देते धन धाम।
देवो के हित विष पी डाला,
नीलकंठ को कोटि प्रणाम॥
॥ सुबह सुबह ले शिव...॥

शिव के चरणों में मिलते है,
सारी तीरथ चारो धाम।
करनी का सुख तेरे हाथों,
शिव के हाथों में परिणाम॥
॥ सुबह सुबह ले शिव...॥

शिव के रहते कैसी चिंता,
साथ रहे प्रभु आठों याम।
शिव को भजले सुख पायेगा,
मन को आएगा आराम॥
॥ सुबह सुबह ले शिव...॥

सुबह सुबह ले शिव का नाम,
कर ले बन्दे यह शुभ काम।
सुबह सुबह ले शिव का नाम,
शिव आयेंगे तेरे काम॥

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

देवादिदेव महादेव भोलेनाथ की महिमा का यह भजन मनुष्य को उसके जीवन के परम सत्य और आध्यात्मिक मार्ग से परिचित कराता है। भजन की शुरुआत में ही रचनाकार और गायक हरिहरन जी यह संदेश देते हैं कि साधक को अपने दिन की शुरुआत भौतिक या सांसारिक चिंताओं से करने के बजाय भगवान शिव के नाम स्मरण के साथ करनी चाहिए। प्रातःकाल का समय एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का होता है। यदि इस बेला में भगवान शिव का ध्यान कर लिया जाए, तो पूरे दिन के लिए मन में एक दिव्य सुरक्षा कवच और सकारात्मकता बनी रहती है.

भजन की दूसरी पंक्ति में महादेव के अद्वितीय स्वरूप और उनकी परम उदारता का वर्णन किया गया है। शिव वैराग्य के प्रतीक हैं, जो अपने शरीर पर श्मशान की भस्म लपेटे रहते हैं, परंतु अपने भक्तों को सांसारिक और आध्यात्मिक ऐश्वर्य, धन-धान्य तथा मोक्ष प्रदान करते हैं। समुद्र मंथन के समय देवताओं और संसार की रक्षा के लिए उन्होंने स्वयं हलाहल विष का पान कर लिया और 'नीलकंठ' कहलाए। ऐसे परोपकारी और करुणासागर भगवान शिव को कोटि-कोटि नमन करना प्रत्येक जीव का कर्तव्य है.

आगे की पंक्तियों में बताया गया है कि भगवान शिव के श्रीचरणों में ही संपूर्ण तीर्थों और चारों धामों का वास है। मनुष्य अपने कर्मों (करनी) के लिए स्वयं उत्तरदायी है, परंतु उन कर्मों का फल (परिणाम) महादेव के अधीन है। जब मनुष्य पूर्ण समर्पण के साथ शिव के चरणों में शरण लेता है, तो उसे जीवन के तमाम दुखों और चिंताओं से मुक्ति मिल जाती है। आठों पहर (आठों याम) महादेव की कृपा जिस मनुष्य के साथ रहती है, उसे संसार में किसी भी बात का भय नहीं रहता.

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

यह भजन केवल एक संगीतिक रचना नहीं है, बल्कि यह सनातन वैदिक दर्शन और शैव परंपरा का एक सारगर्भित संदेश है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • प्रातःकालीन स्मरण: यह भजन सुबह उठकर भगवान शिव का स्मरण करने की प्रेरणा देता है, जिससे मन शांत और ऊर्जावान बनता है।
  • महादेव का उदार स्वरूप: भजन में भगवान शिव के आशुतोष (शीघ्र प्रसन्न होने वाले) और त्यागी स्वभाव का सुंदर चित्रण किया गया है।
  • कर्म और फल का सिद्धांत: यह भजन मनुष्य को अपने कर्मों पर ध्यान केंद्रित करने और परिणाम शिव पर छोड़ने का संदेश देता है, जो श्रीमद्भगवद्गीता के निष्काम कर्म योग से मेल खाता है।
  • सार्वभौमिक लोकप्रियता: गुलशन कुमार की 'शिव महिमा' एल्बम का यह भजन भारत के घर-घर में प्रसिद्ध है और शिव भक्तों की प्लेलिस्ट का अनिवार्य हिस्सा है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

भजन गायन और श्रवण के लिए समय और मन की स्थिति का बहुत महत्व होता है:

  • सर्वोत्तम समय: ब्रह्म मुहूर्त में या सूर्योदय से पहले (प्रातः 4:00 बजे से 6:30 बजे के बीच) इस भजन को सुनना या गाना सबसे अधिक फलदायी होता है।
  • स्थान: घर के पूजा कक्ष में, शिव मंदिर में, या किसी शांत स्थान पर आसन लगाकर इसका पाठ करना चाहिए।
  • विशेष अवसर: महाशिवरात्रि, सावन मास के सोमवार, प्रदोष व्रत और प्रतिदिन की पूजा के समय इस भजन का निरंतर अभ्यास किया जा सकता है।
  • पूजा विधि: भगवान शिव को जल, बिल्वपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करते समय इस भजन को पृष्ठभूमि में बजाया जा सकता है या गुनगुनाया जा सकता है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

इस भजन के केंद्र में देवादिदेव महादेव, आशुतोष, भोलेनाथ, नीलकंठ भगवान शिव हैं। हिंदू धर्म में भगवान शिव को संहार के देवता के साथ-साथ परम योगी, जगतगुरु और मोक्षदाता माना जाता है। शैव परंपरा के अनुसार, शिव ही आदि और अंत हैं। इस भजन को स्वरबद्ध करने वाले प्रसिद्ध पार्श्व गायक हरिहरन हैं, जिनकी शास्त्रीय संगीत में गहरी पकड़ है, और इसके निर्माता संगीत की दुनिया में भक्ति संगीत को जन-जन तक पहुँचाने वाले गुलशन कुमार हैं। उनकी शिव तांडव स्तोत्र और अन्य शिव रचनाओं की तरह यह भजन भी अमर हो चुका है.

भजन की रचना एवं पृष्ठभूमि | Composition & Background

यह भजन टी-सीरीज (T-Series) के बैनर तले जारी की गई अत्यंत लोकप्रिय ऑडियो कैसेट और एल्बम 'शिव महिमा' का एक प्रमुख हिस्सा है। 1990 के दशक में गुलशन कुमार ने भारतीय devotional music market में एक क्रांति लाई थी, जिसमें शास्त्रीय और सुगम संगीत के मिश्रण से भगवान शिव की महिमा का गुणगान किया गया था। इस भजन के गीत और संगीत ने करोड़ों शिव भक्तों के दिलों में विशेष जगह बनाई। सावन के महीने में और प्रत्येक सोमवार को देश के कोने-कोने में स्थित शिव मंदिरों में यह भजन मुख्य रूप से गूंजता है.

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

इस भजन की भाषा बहुत ही सरल, सुगम और आम बोलचाल की हिंदी तथा ब्रज-अवधि मिश्रित लोकभाषा है, जिसे हर उम्र के लोग आसानी से समझ सकते हैं और गा सकते हैं। इसमें अनुप्रास और यमक अलंकारों का सुंदर प्रयोग हुआ है। लय और ताल की दृष्टि से यह भजन आश्वस्त करने वाला और मन को झूमने पर मजबूर करने वाला है। इसके साथ गूंजने वाला पंचाक्षर मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' इसकी आध्यात्मिक गहराई को और अधिक बढ़ा देता है, जिससे साधक का मन तुरंत ध्यान की अवस्था में चला जाता है। अधिक जानकारी के लिए आप श्री हनुमान चालीसा और अन्य भक्ति ग्रंथों का भी अध्ययन कर सकते हैं.

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

यह भजन हमें जीवन जीने के कई महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाता है:

  • चिंतामुक्त जीवन: जब आप ईश्वर पर पूर्ण विश्वास रखते हैं, तो सांसारिक चिंताएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।
  • निस्वार्थ भाव: भगवान शिव की तरह अपने जीवन में त्याग और परोपकार की भावना को अपनाना चाहिए।
  • नियमित साधना: दिन की शुरुआत सकारात्मक और पवित्र विचारों के साथ करनी चाहिए।
  • कर्म प्रधानता: अपने हिस्से का कर्म पूरी ईमानदारी से करना चाहिए और परिणाम को ईश्वर के हाथों में सौंप देना चाहिए।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / वाक्यांश सरल अर्थ सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ
सुबह सुबह प्रातःकाल, ब्रह्म मुहूर्त दिन का सबसे पवित्र और ऊर्जावान समय
नीलकंठ नीले गले वाले समुद्र मंथन के समय विषपान करने के कारण भगवान शिव का नाम
तीरथ चारो धाम प्रमुख पवित्र तीर्थ स्थल समस्त धार्मिक यात्राओं का पुण्य शिव चरणों में मिलना
आठों याम आठों पहर, चौबीसों घंटे प्रभु की कृपा और उपस्थिति का निरंतर अहसास
धन धाम धन-दौलत और वैभव सांसारिक सुख-सुविधाएं जो शिव अपने भक्तों को देते हैं

पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ | Line-by-Line Explanation

"सुबह सुबह ले शिव का नाम, कर ले बन्दे यह शुभ काम।"
अर्थात हे मनुष्य! अपने दिन की शुरुआत सुबह-सुबह भगवान शिव के पावन नाम से कर, यही सबसे उत्तम और कल्याणकारी कार्य है।

"खुद को राख लपेटे फिरते, औरों को देते धन धाम।"
अर्थात जो महादेव स्वयं वैरागी हैं और शरीर पर भस्म रमाते हैं, वे अपने शरणागत भक्तों को समस्त सुख-समृद्धि और वैभव प्रदान करते हैं.

"शिव के चरणों में मिलते है, सारी तीरथ चारो धाम।"
अर्थात भगवान शिव के चरणों की शरण में जाने मात्र से संपूर्ण तीर्थों और चारों धामों की यात्रा का पुण्य प्राप्त हो जाता है.

"शिव के रहते कैसी चिंता, साथ रहे प्रभु आठों याम।"
अर्थात जब रक्षक के रूप में स्वयं शिव आपके साथ चौबीसों घंटे मौजूद हैं, तो फिर किसी भी बात की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है.

भजन से जुड़े मंत्र एवं श्लोक | Related Mantra & Shlok

इस भजन के साथ निम्नलिखित पावन मंत्रों का जाप करने से विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है:

ॐ नमः शिवाय॥

मृत्युंजय महेश्वराय शरणागतवत्सलाय नमः॥

कपूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा वसंतं हृदयारविन्दे भवं भवानी सहितं नमामि॥

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

श्रेणी विवरण
भजन का नाम सुबह सुबह ले शिव का नाम (Subah Subah Le Shiv Ka Naam)
आराध्य देव भगवान शिव (महादेव / भोलेनाथ)
गायक हरिहरन (Hariharan)
संगीत निर्देशक / निर्माता गुलशन कुमार (T-Series शिव महिमा)
भाषा हिंदी / लोक भाषा
मुख्य भाव भक्ति, समर्पण, प्रातः स्मरण और शरणागति
उपयुक्त अवसर प्रातःकालीन पूजा, सावन सोमवार, महाशिवरात्रि

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह प्रसिद्ध भजन लोकप्रिय पार्श्व गायक हरिहरन द्वारा गाया गया है और इसे गुलशन कुमार की प्रसिद्ध एल्बम 'शिव महिमा' के तहत प्रस्तुत किया गया था।

इस भजन को प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में या दिन की शुरुआत करते समय सुनना सबसे उत्तम और मन को शांति देने वाला माना जाता है।

इस भजन का मुख्य संदेश यह है कि मनुष्य को अपने दिन की शुरुआत ईश्वर स्मरण से करनी चाहिए, कर्म पूरी निष्ठा से करना चाहिए और फल भगवान शिव पर छोड़ देना चाहिए।

हाँ, सावन मास, महाशिवरात्रि और प्रत्येक सोमवार के दिन इस भजन का श्रवण और गायन विशेष रूप से फलदायी और आनंददायक होता है।

समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला, तो संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उसे अपने गले में रोक लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए।

'शिव महिमा' एल्बम के निर्माता प्रसिद्ध संगीत उद्यमी और टी-सीरीज के संस्थापक स्वर्गीय श्री गुलशन कुमार जी थे।

इस भजन के दौरान और इसके साथ महामंत्र 'ॐ नमः शिवाय' का निरंतर जप करना अत्यंत लाभकारी होता है।

अवश्य! इसकी सरल शब्दावली और मधुर धुन के कारण बच्चे इसे बहुत जल्दी सीख लेते हैं, जो उनके संस्कारों के विकास में सहायक है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया गया है कि प्रस्तुत भजन के लिरिक्स, अर्थ और सांस्कृतिक संदर्भ पूरी तरह से प्रामाणिक, शुद्ध और सनातन परंपरा के अनुकूल हों। इस लेख का उद्देश्य शिव भक्तों को एक ही स्थान पर संपूर्ण जानकारी और भक्ति रस प्रदान करना है।

स्रोत एवं संदर्भ | Sources & References

  • पारंपरिक शिव स्तोत्र एवं भजन संग्रह
  • टी-सीरीज 'शिव महिमा' एल्बम संदर्भ ग्रंथ
  • वैदिक सनातन धर्म एवं शैव परंपरा के ग्रंथ
  • लोकप्रिय भक्ति साहित्य एवं संकीर्तन परंपरा

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 25 Sep 2026

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