🙏 यदि नाथ का नाम दयानिधि है, तो दया भी करेंगे कभी न कभी
(Yadi Nath Ka Naam Dayanidhi Hai – To Daya Bhi Karenge Kabhi Na Kabhi) – भजन
📝 भजन विवरण
📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है
जहाँ गीध निषाद का आदर है,
जहाँ व्याध अजामिल का घर है।
वही वेश बदल कर उसी घर में,
हम जा ठहरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है
जिस अंग की शोभा सुहावनी है,
जिस श्यामल रंग में मोहनी है।
उस रूप सुधा से स्नेहियों के,
दृग प्याले भरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है
हम द्वार में आपके आके खड़े,
मुद्दत से इसी जिद पर हैं अड़े।
भव-सिंधु तरें जो बड़े से बड़े,
देवेन्द्र भी तरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है
करुणानिधि नाम सुनाया जिन्हें,
कर्णामृत पान कराया जिन्हें।
सरकार अदालत में ये गवाह,
सभी गुजरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है
✍️ रचनाकार :- लोक परम्परा / विश्वास भजन
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह अत्यंत आश्वासन देने वाला भजन है। “यदि नाथ का नाम दयानिधि है, तो दया भी करेंगे कभी न कभी” – भक्त का तर्क है कि यदि प्रभु का नाम ही “दयानिधि” (दया का भंडार) है, तो वे दया अवश्य करेंगे – चाहे कभी भी, पर करेंगे। “दुखहारी हरी, दुखिया जन के, दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी” – दुख हरने वाले हरी, दुखियों के दुख और क्लेश अवश्य हरेंगे। यह धैर्य और विश्वास का संदेश है – प्रभु की दया में देर हो सकती है, लेकिन अवश्य आएगी।
पहले अंतरे में – जहाँ गीध (जटायु), निषाद (गुह), व्याध (शिकारी) और अजामिल (प्रसिद्ध पापी) का आदर और घर है, वहाँ हम भी वेश बदलकर (किसी भी रूप में) जा ठहरेंगे। इसका अर्थ है – जिन पापियों पर प्रभु ने कृपा की (जटायु को मोक्ष, अजामिल को उद्धार), वहाँ हम भी जाएँगे – अर्थात हमें भी कृपा मिलेगी।
दूसरे अंतरे में – कृष्ण के श्यामल रंग और मोहक रूप का वर्णन। उस रूप-सुधा से स्नेहियों के नेत्र-प्याले भरेंगे – अर्थात एक दिन भक्तों को पूर्ण दर्शन मिलेंगे।
तीसरे अंतरे में – भक्त प्रभु के द्वार पर खड़े हैं, मुद्दत से इस जिद पर अड़े हैं कि दर्शन लेकर रहेंगे। भव-सिंधु (जन्म-मरण के सागर) को पार करने वाले देवेन्द्र भी (यानी बड़े से बड़े) एक दिन पार करेंगे – हम भी करेंगे।
चौथे अंतरे में – जिन्होंने करुणानिधि (दया के भंडार) का नाम सुना और कर्णामृत (कानों का अमृत) पिया, वे सभी अदालत (प्रभु के दरबार) में गवाह हैं – सब एक दिन प्रभु के पास पहुँचेंगे।
यह भजन हमें सिखाता है कि प्रभु की दया और कृपा पर भरोसा रखो। देर हो सकती है, पर अंधेर नहीं। विश्वास और धैर्य रखने वाले का उद्धार अवश्य होता है।
🔍 भजन का विशेष महत्त्व
दयानिधि नाम का विश्वास: भजन का मूल मंत्र यह है कि ईश्वर का नाम उसके स्वभाव को दर्शाता है। “दयानिधि” का अर्थ है दया का भंडार – वह दया कैसे नहीं करेगा?
पौराणिक उदाहरण: जटायु (गीध), निषाद (गुह), व्याध (शिकारी) और अजामिल – ये सभी ऐसे पात्र हैं जिन पर भगवान ने विशेष कृपा की। भजन इन उदाहरणों से आशा दिलाता है कि हम पर भी कृपा होगी।
धैर्य का संदेश: “कभी न कभी” – यह दोहराव हमें सिखाता है कि निराश न हों, प्रभु की कृपा का समय आएगा।
💖 विश्वास और धैर्य का संगम
🎯 संदेश
जब दुख बहुत बढ़ जाए, जब लगे कि अब उम्मीद नहीं, तो याद रखो – प्रभु का नाम दयानिधि है। वह दया अवश्य करेंगे, चाहे देर से सही। विश्वास और धैर्य मत खोना।
✨ आस्था का प्रतीक
यह भजन हर उस भक्त के लिए प्रेरणा है जो लंबे समय से प्रभु की कृपा की प्रतीक्षा कर रहा है। यह बताता है कि ईश्वर की दया में देर हो सकती है, लेकिन वह अवश्य आती है।
🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। दयानिधि नाथ की जय ।। दुखहारी हरी की जय ।।