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यदि नाथ का नाम दयानिधि है, तो दया भी करेंगे कभी न कभी (भजन) लिरिक्स | Yadi Nath Ka Naam Dayanidhi Hai To Daya Bhi Karenge Kabhi Na Kabhi Bhajan Lyrics

181 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

🙏 यदि नाथ का नाम दयानिधि है, तो दया भी करेंगे कभी न कभी

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

(Yadi Nath Ka Naam Dayanidhi Hai – To Daya Bhi Karenge Kabhi Na Kabhi) – भजन

🌸 दुखहारी हरी, दुखिया जन के – दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: भजन / प्रार्थना / विश्वास गीत
🎶 भाव: आस्था, धैर्य, समर्पण, कृपा
📍 विशेषता: ईश्वर के दयानिधि नाम पर अटूट विश्वास – दया अवश्य होगी
📀 प्रचलन: भक्तों में अत्यंत प्रिय, विशेषकर कठिन समय में गाया जाने वाला विश्वास भजन

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है

जहाँ गीध निषाद का आदर है,
जहाँ व्याध अजामिल का घर है।
वही वेश बदल कर उसी घर में,
हम जा ठहरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है

जिस अंग की शोभा सुहावनी है,
जिस श्यामल रंग में मोहनी है।
उस रूप सुधा से स्नेहियों के,
दृग प्याले भरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है

हम द्वार में आपके आके खड़े,
मुद्दत से इसी जिद पर हैं अड़े।
भव-सिंधु तरें जो बड़े से बड़े,
देवेन्द्र भी तरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है

करुणानिधि नाम सुनाया जिन्हें,
कर्णामृत पान कराया जिन्हें।
सरकार अदालत में ये गवाह,
सभी गुजरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।

यदि नाथ का नाम दयानिधि है
यदि नाथ का नाम दयानिधि है,
तो दया भी करेंगे कभी न कभी।
दुखहारी हरी, दुखिया जन के,
दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी।
यदि नाथ का नाम दयानिधि है

✍️ रचनाकार :- लोक परम्परा / विश्वास भजन

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत आश्वासन देने वाला भजन है। “यदि नाथ का नाम दयानिधि है, तो दया भी करेंगे कभी न कभी” – भक्त का तर्क है कि यदि प्रभु का नाम ही “दयानिधि” (दया का भंडार) है, तो वे दया अवश्य करेंगे – चाहे कभी भी, पर करेंगे। “दुखहारी हरी, दुखिया जन के, दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी” – दुख हरने वाले हरी, दुखियों के दुख और क्लेश अवश्य हरेंगे। यह धैर्य और विश्वास का संदेश है – प्रभु की दया में देर हो सकती है, लेकिन अवश्य आएगी।

पहले अंतरे में – जहाँ गीध (जटायु), निषाद (गुह), व्याध (शिकारी) और अजामिल (प्रसिद्ध पापी) का आदर और घर है, वहाँ हम भी वेश बदलकर (किसी भी रूप में) जा ठहरेंगे। इसका अर्थ है – जिन पापियों पर प्रभु ने कृपा की (जटायु को मोक्ष, अजामिल को उद्धार), वहाँ हम भी जाएँगे – अर्थात हमें भी कृपा मिलेगी।

दूसरे अंतरे में – कृष्ण के श्यामल रंग और मोहक रूप का वर्णन। उस रूप-सुधा से स्नेहियों के नेत्र-प्याले भरेंगे – अर्थात एक दिन भक्तों को पूर्ण दर्शन मिलेंगे।

तीसरे अंतरे में – भक्त प्रभु के द्वार पर खड़े हैं, मुद्दत से इस जिद पर अड़े हैं कि दर्शन लेकर रहेंगे। भव-सिंधु (जन्म-मरण के सागर) को पार करने वाले देवेन्द्र भी (यानी बड़े से बड़े) एक दिन पार करेंगे – हम भी करेंगे।

चौथे अंतरे में – जिन्होंने करुणानिधि (दया के भंडार) का नाम सुना और कर्णामृत (कानों का अमृत) पिया, वे सभी अदालत (प्रभु के दरबार) में गवाह हैं – सब एक दिन प्रभु के पास पहुँचेंगे।

यह भजन हमें सिखाता है कि प्रभु की दया और कृपा पर भरोसा रखो। देर हो सकती है, पर अंधेर नहीं। विश्वास और धैर्य रखने वाले का उद्धार अवश्य होता है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

दयानिधि नाम का विश्वास: भजन का मूल मंत्र यह है कि ईश्वर का नाम उसके स्वभाव को दर्शाता है। “दयानिधि” का अर्थ है दया का भंडार – वह दया कैसे नहीं करेगा?

पौराणिक उदाहरण: जटायु (गीध), निषाद (गुह), व्याध (शिकारी) और अजामिल – ये सभी ऐसे पात्र हैं जिन पर भगवान ने विशेष कृपा की। भजन इन उदाहरणों से आशा दिलाता है कि हम पर भी कृपा होगी।

धैर्य का संदेश: “कभी न कभी” – यह दोहराव हमें सिखाता है कि निराश न हों, प्रभु की कृपा का समय आएगा।

💖 विश्वास और धैर्य का संगम

🎯 संदेश

जब दुख बहुत बढ़ जाए, जब लगे कि अब उम्मीद नहीं, तो याद रखो – प्रभु का नाम दयानिधि है। वह दया अवश्य करेंगे, चाहे देर से सही। विश्वास और धैर्य मत खोना।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हर उस भक्त के लिए प्रेरणा है जो लंबे समय से प्रभु की कृपा की प्रतीक्षा कर रहा है। यह बताता है कि ईश्वर की दया में देर हो सकती है, लेकिन वह अवश्य आती है।

🙏 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।। दयानिधि नाथ की जय ।। दुखहारी हरी की जय ।।

॥ इति भजनम् ॥
॥ यदि नाथ का नाम दयानिधि है, तो दया भी करेंगे कभी न कभी – दुखहारी हरी, दुखिया जन के, दुख क्लेश हरेंगे कभी न कभी ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "यदि नाथ का नाम दयानिधि है, तो दया भी करेंगे कभी न कभी (भजन) लिरिक्स | Yadi Nath Ka Naam Dayanidhi Hai To Daya Bhi Karenge Kabhi Na Kabhi Bhajan Lyrics" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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