मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन
शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
🙏 ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।
(O Palan Hare, Nirgun Aur Nyare) – लता मंगेशकर की अमर प्रार्थना
📝 भजन विवरण
📜 गीत लिरिक्स (हिन्दी में)
ओ पालनहारे,
निर्गुण और न्यारे,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं।
हमरी उलझन सुलझाओ भगवन,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं॥
तुम्हीं हमका हो संभाले,
तुम्हीं हमरे रखवाले,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं॥
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं॥
चन्दा में तुम्हीं तो भरे हो चाँदनी,
सूरज में उजाला तुम्हीं से।
ये गगन है मगन,
तुम्हीं तो दिए हो इसे तारे।
भगवन, ये जीवन
तुम्हीं न सँवारोगे,
तो क्या कोई सँवारे।
ओ पालनहारे,
निर्गुण और न्यारे,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं॥
जो सुनो तो कहे,
प्रभुजी हमरी है बिनती।
दुखी जन को धीरज दो,
हारे नहीं वो कभी दुःख से।
तुम निर्बल को रक्षा दो,
रह पाएं निर्बल सुख से।
भक्ति को शक्ति दो,
भक्ति को शक्ति दो॥
जग के जो स्वामी हो,
इतनी तो अरज सुनो।
हैं पथ में अँधियारे,
दे दो वरदान में उजियारे॥
ओ पालनहारे,
निर्गुण और न्यारे,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं।
हमरी उलझन सुलझाओ भगवन,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं॥
ओ पालनहारे,
निर्गुण और न्यारे,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं।
हमरी उलझन सुलझाओ भगवन,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं॥
ओ पालनहारे,
निर्गुण और न्यारे,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं।
हमरी उलझन सुलझाओ भगवन,
तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं॥
🎤 गायिका : लता मंगेशकर (स्वर्गीय)
🙏 भजन का अर्थ और संदेश
यह लता मंगेशकर के स्वर में अमर प्रार्थना गीत है, जो ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास को व्यक्त करता है। “ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे, तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं” – हे पालनहारे (पालन करने वाले), तुम निर्गुण (गुणों से परे) और न्यारे (अद्वितीय) हो। तुम्हारे बिना हमारा कोई नहीं है। भक्त प्रार्थना करता है – “हमरी उलझन सुलझाओ भगवन” – हमारी उलझनों को सुलझाओ।
पहले अंतरे में – चाँद में चाँदनी तुम्हीं भरते हो, सूरज में उजाला तुम्हीं से है। आकाश तुम्हीं से तारों से भरा है। यदि तुम यह जीवन नहीं सँवारोगे, तो और कौन सँवारेगा? यह भक्त की मार्मिक विनती है।
दूसरे अंतरे में – दुखियों को धीरज दो, वे दुःख से कभी न हारें। निर्बल को रक्षा दो, वे सुख से रह सकें। भक्ति को शक्ति दो।
तीसरे अंतरे में – हे जग के स्वामी, यह प्रार्थना सुनो। रास्ते में अंधियारे हैं, हमें उजियारे का वरदान दो।
यह गीत हर उस व्यक्ति के दिल की आवाज़ है जो जीवन की कठिनाइयों में ईश्वर को पुकारता है। यह हमें सिखाता है कि जब कोई सहारा नहीं होता, तब भी ईश्वर हमारे साथ है, बस उसे पुकारने की आवश्यकता है।
🔍 गीत का विशेष महत्त्व
लता मंगेशकर की अमर आवाज़: यह प्रार्थना गीत लता जी के सुमधुर और भावपूर्ण स्वर में रिकॉर्ड हुआ था, जो आज भी करोड़ों लोगों के दिलों को छूता है।
“तुमरे बिन हमरा कौनो नाहीं” – शरणागति का मंत्र: यह पंक्ति सरल भाषा में पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त करती है। यह हमें बताती है कि ईश्वर के अलावा हमारा कोई सच्चा सहारा नहीं है।
निर्गुण और सगुण का समन्वय: “निर्गुण और न्यारे” कहकर ईश्वर के निराकार, सगुण से परे स्वरूप का आह्वान किया गया है, फिर भी भक्त उनसे अपनी उलझन सुलझाने की प्रार्थना करता है।
💖 भक्ति का सरलतम रूप
🎯 संदेश
जब जीवन में अंधियारा हो, उलझनें हों, और कोई सहारा न हो, तो बस एक ही सहारा है – ओ पालनहारे। उससे प्रार्थना करो, वह तुम्हारी सुनता है।
✨ आस्था का प्रतीक
यह गीत भारतीय जनमानस में इतना लोकप्रिय हुआ कि यह लगभग हर घर की प्रार्थना बन गया। लता दीदी के स्वर में यह प्रार्थना आज भी उतनी ही सजीव और मार्मिक है।
🙏 ॐ सर्वेश्वराय नमः ।। ओ पालनहारे, हमरी उलझन सुलझाओ भगवन ।।
🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ
यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "ओ पालनहारे, निर्गुण और न्यारे (प्रार्थना) लिरिक्स - लता मंगेशकर | O Palan Hare Nirgun Aur Nyare Lata Mangeshkar Prayer Lyrics" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।
भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।
🔍 विशेष महत्त्व और लाभ
श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।
सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।
🕒 साधना एवं गायन विधि
भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।
भजनों को गाने की सही विधि क्या है?
भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।
क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।
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